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मन की बात का 138वां एपिसोड: मोहोल ने कहा — जनभागीदारी और स्थानीय सशक्तिकरण को मिली नई दिशा

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मन की बात का 138वां एपिसोड: मोहोल ने कहा — जनभागीदारी और स्थानीय सशक्तिकरण को मिली नई दिशा

सारांश

केंद्रीय मंत्री मुरलीधर मोहोल ने पुणे में 'मन की बात' का 138वां एपिसोड सुनते हुए जनभागीदारी, महिला स्वयं सहायता समूहों, पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छता संदेशों को रेखांकित किया। साथ ही मराठवाड़ा-विदर्भ में सूखे से जूझ रहे किसानों के लिए राहत पैकेज की प्रक्रिया जारी होने की जानकारी दी।

मुख्य बातें

केंद्रीय मंत्री मुरलीधर मोहोल ने 27 सितंबर 2026 को पुणे में एनडीए कार्यकर्ताओं के साथ 'मन की बात' का 138वां एपिसोड सुना।
प्रधानमंत्री ने महिला स्वयं सहायता समूहों की सराहना की और उन्हें ग्रामीण आर्थिक सशक्तिकरण का माध्यम बताया।
असम के सोनाई रूपई अभयारण्य में हाथियों की वापसी और सुंदरबन में मैंग्रोव संरक्षण के उदाहरण दिए गए।
वोकल फॉर लोकल और 'एक जिला, एक उत्पाद' पहल के जरिए स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने का आह्वान किया गया।
मराठवाड़ा और विदर्भ में सूखे की स्थिति पर मोहोल ने कहा — महाराष्ट्र सरकार ने सूखा घोषित किया और राहत पैकेज तैयार करने की प्रक्रिया जारी है।

केंद्रीय मंत्री मुरलीधर मोहोल ने 27 सितंबर 2026 को पुणे के जनसंपर्क कार्यालय में एनडीए कार्यकर्ताओं के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' का 138वां एपिसोड सुना। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम सरकार और नागरिकों के बीच सीधे संवाद का एक असाधारण मंच बन चुका है, जिसकी वैश्विक स्तर पर मिसाल दुर्लभ है।

जनभागीदारी को मिली नई पहचान

मोहोल ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी हर महीने के आखिरी रविवार को 'मन की बात' के जरिए देशवासियों से संवाद करते हैं। इस कार्यक्रम में समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य करने वाले व्यक्तियों और प्रेरणादायी पहलों को सामने लाया जाता है। उनके अनुसार, यह संवाद समाज में जनभागीदारी की भावना को मज़बूत करता है और लोगों को सकारात्मक बदलाव के लिए प्रेरित करता है।

महिला स्वयं सहायता समूहों की सराहना

मोहोल ने बताया कि इस एपिसोड में प्रधानमंत्री ने महिला स्वयं सहायता समूहों के कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि देशभर में इन समूहों के माध्यम से महिलाएं संगठित होकर विभिन्न व्यवसायों में सक्रिय हैं और अपने परिवार के साथ-साथ समाज की आर्थिक स्थिति को मज़बूत करने में योगदान दे रही हैं। मोहोल ने रेखांकित किया कि ये समूह ग्रामीण और स्थानीय स्तर पर आर्थिक सशक्तिकरण का महत्वपूर्ण माध्यम बन रहे हैं।

पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता

मोहोल ने प्रधानमंत्री के पर्यावरण संरक्षण संदेश का उल्लेख करते हुए कहा कि पेड़-पौधों, वन्यजीवों और पूरे पारिस्थितिकी तंत्र का संतुलन बनाए रखना प्रत्येक नागरिक का दायित्व है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री ने असम के सोनाई रूपई अभयारण्य में हाथियों की वापसी, 'पिग्मी हॉग' के संरक्षण तथा सुंदरबन में महिलाओं द्वारा मैंग्रोव वनों के संरक्षण जैसे उदाहरण सामने रखे। मोहोल ने कहा कि जैव विविधता को सुरक्षित रखना आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी जिम्मेदारी है।

स्वच्छता, पोषण और वोकल फॉर लोकल

प्रधानमंत्री ने महात्मा गांधी की जयंती से पूर्व नदियों, कुओं, समुद्र तटों और सार्वजनिक स्थानों की सफाई में जुटे युवाओं के प्रयासों की सराहना की और स्वच्छता को जनआंदोलन का रूप देने की अपील की। इसके साथ ही सितंबर में मनाए गए 'पोषण माह' का उल्लेख करते हुए छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और मिजोरम की पहलों को रेखांकित किया गया। आगामी त्योहारों को देखते हुए प्रधानमंत्री ने 'वोकल फॉर लोकल' और 'एक जिला, एक उत्पाद' जैसी पहलों के जरिए स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने का आह्वान किया।

महाराष्ट्र के सूखे पर मोहोल की चिंता

मोहोल ने मराठवाड़ा और विदर्भ सहित महाराष्ट्र के कई हिस्सों में किसानों की सूखे से उत्पन्न कठिनाइयों का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों में सूखा घोषित किया है और राहत पैकेज तैयार करने की प्रक्रिया जारी है। उन्होंने कहा कि संकट की घड़ी में किसानों और आम नागरिकों के साथ खड़ा रहना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। आने वाले समय में राहत वितरण की गति और पारदर्शिता पर सबकी नज़र रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसके संदेशों का ज़मीनी असर एक अलग बहस की माँग करता है — स्वयं सहायता समूहों की सराहना और 'वोकल फॉर लोकल' का आह्वान वर्षों से दोहराया जाता रहा है, फिर भी ग्रामीण महिला उद्यमियों की बाज़ार पहुँच और आमदनी के ठोस आँकड़े सार्वजनिक क्षेत्र में दुर्लभ हैं। इसी तरह मराठवाड़ा और विदर्भ में सूखे की चर्चा नई नहीं है — यह क्षेत्र दशकों से कृषि संकट का पर्याय बना हुआ है, और 'राहत पैकेज तैयार हो रहा है' जैसे वाक्य किसानों को तब तक राहत नहीं देते जब तक वितरण की समयसीमा और राशि स्पष्ट न हो। 138 एपिसोड के बाद सवाल यह है कि इन प्रेरणादायी कहानियों को नीतिगत जवाबदेही से कब जोड़ा जाएगा।
RashtraPress
27 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'मन की बात' का 138वां एपिसोड कब प्रसारित हुआ और इसमें क्या खास था?
'मन की बात' का 138वां एपिसोड 27 सितंबर 2026 को प्रसारित हुआ। इसमें प्रधानमंत्री मोदी ने महिला स्वयं सहायता समूह, पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता अभियान, पोषण माह और वोकल फॉर लोकल जैसे विषयों पर देशवासियों से संवाद किया।
केंद्रीय मंत्री मुरलीधर मोहोल ने 'मन की बात' पर क्या कहा?
केंद्रीय मंत्री मुरलीधर मोहोल ने पुणे में एनडीए कार्यकर्ताओं के साथ एपिसोड सुनने के बाद कहा कि यह कार्यक्रम जनभागीदारी को बढ़ावा देता है और समाज में सकारात्मक बदलावों को नई पहचान दिलाता है। उन्होंने महिला सशक्तिकरण और पर्यावरण संदेशों को विशेष रूप से रेखांकित किया।
प्रधानमंत्री ने 'मन की बात' में पर्यावरण संरक्षण पर कौन-से उदाहरण दिए?
प्रधानमंत्री ने असम के सोनाई रूपई अभयारण्य में हाथियों की वापसी, 'पिग्मी हॉग' के संरक्षण और सुंदरबन में महिलाओं द्वारा मैंग्रोव वनों की सुरक्षा के उदाहरण दिए। उन्होंने कहा कि जैव विविधता और प्राकृतिक संतुलन को बनाए रखना आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी जिम्मेदारी है।
महाराष्ट्र के सूखे पर मोहोल ने क्या जानकारी दी?
मोहोल ने बताया कि मराठवाड़ा और विदर्भ सहित महाराष्ट्र के कई हिस्सों में किसान सूखे का सामना कर रहे हैं। राज्य सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों में सूखा घोषित किया है और राहत पैकेज तैयार करने की प्रक्रिया जारी बताई गई है।
'वोकल फॉर लोकल' और 'एक जिला, एक उत्पाद' से किसे फायदा होगा?
इन पहलों का लाभ मुख्य रूप से स्थानीय उद्यमियों, किसानों और महिला स्वयं सहायता समूहों को मिलने की संभावना है। इनके जरिए पारंपरिक कलाओं और ग्रामीण उत्पादों को देश-दुनिया के बाज़ार तक पहुँचाने में मदद मिल सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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