मन की बात का 138वां एपिसोड: मोहोल ने कहा — जनभागीदारी और स्थानीय सशक्तिकरण को मिली नई दिशा
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय मंत्री मुरलीधर मोहोल ने 27 सितंबर 2026 को पुणे के जनसंपर्क कार्यालय में एनडीए कार्यकर्ताओं के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' का 138वां एपिसोड सुना। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम सरकार और नागरिकों के बीच सीधे संवाद का एक असाधारण मंच बन चुका है, जिसकी वैश्विक स्तर पर मिसाल दुर्लभ है।
जनभागीदारी को मिली नई पहचान
मोहोल ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी हर महीने के आखिरी रविवार को 'मन की बात' के जरिए देशवासियों से संवाद करते हैं। इस कार्यक्रम में समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य करने वाले व्यक्तियों और प्रेरणादायी पहलों को सामने लाया जाता है। उनके अनुसार, यह संवाद समाज में जनभागीदारी की भावना को मज़बूत करता है और लोगों को सकारात्मक बदलाव के लिए प्रेरित करता है।
महिला स्वयं सहायता समूहों की सराहना
मोहोल ने बताया कि इस एपिसोड में प्रधानमंत्री ने महिला स्वयं सहायता समूहों के कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि देशभर में इन समूहों के माध्यम से महिलाएं संगठित होकर विभिन्न व्यवसायों में सक्रिय हैं और अपने परिवार के साथ-साथ समाज की आर्थिक स्थिति को मज़बूत करने में योगदान दे रही हैं। मोहोल ने रेखांकित किया कि ये समूह ग्रामीण और स्थानीय स्तर पर आर्थिक सशक्तिकरण का महत्वपूर्ण माध्यम बन रहे हैं।
पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता
मोहोल ने प्रधानमंत्री के पर्यावरण संरक्षण संदेश का उल्लेख करते हुए कहा कि पेड़-पौधों, वन्यजीवों और पूरे पारिस्थितिकी तंत्र का संतुलन बनाए रखना प्रत्येक नागरिक का दायित्व है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री ने असम के सोनाई रूपई अभयारण्य में हाथियों की वापसी, 'पिग्मी हॉग' के संरक्षण तथा सुंदरबन में महिलाओं द्वारा मैंग्रोव वनों के संरक्षण जैसे उदाहरण सामने रखे। मोहोल ने कहा कि जैव विविधता को सुरक्षित रखना आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी जिम्मेदारी है।
स्वच्छता, पोषण और वोकल फॉर लोकल
प्रधानमंत्री ने महात्मा गांधी की जयंती से पूर्व नदियों, कुओं, समुद्र तटों और सार्वजनिक स्थानों की सफाई में जुटे युवाओं के प्रयासों की सराहना की और स्वच्छता को जनआंदोलन का रूप देने की अपील की। इसके साथ ही सितंबर में मनाए गए 'पोषण माह' का उल्लेख करते हुए छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और मिजोरम की पहलों को रेखांकित किया गया। आगामी त्योहारों को देखते हुए प्रधानमंत्री ने 'वोकल फॉर लोकल' और 'एक जिला, एक उत्पाद' जैसी पहलों के जरिए स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने का आह्वान किया।
महाराष्ट्र के सूखे पर मोहोल की चिंता
मोहोल ने मराठवाड़ा और विदर्भ सहित महाराष्ट्र के कई हिस्सों में किसानों की सूखे से उत्पन्न कठिनाइयों का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों में सूखा घोषित किया है और राहत पैकेज तैयार करने की प्रक्रिया जारी है। उन्होंने कहा कि संकट की घड़ी में किसानों और आम नागरिकों के साथ खड़ा रहना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। आने वाले समय में राहत वितरण की गति और पारदर्शिता पर सबकी नज़र रहेगी।