मानसून सत्र में FCRA बिल और झारखंड छात्र आंदोलन पर सत्ता-विपक्ष में तीखी जुबानी जंग
सारांश
मुख्य बातें
संसद के मानसून सत्र 2026 में 11 अगस्त को एक बार फिर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए। एफसीआरए (FCRA) संशोधन विधेयक, झारखंड में छात्रों का विरोध-प्रदर्शन और राम मंदिर चढ़ावा विवाद — इन तीन मुद्दों पर दोनों पक्षों के बीच तीखी बयानबाज़ी हुई। जहाँ भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने विपक्ष पर सदन की कार्यवाही बाधित करने का आरोप लगाया, वहीं विपक्षी दलों ने छात्रों के साथ एकजुटता और संसद में जवाबदेही की माँग दोहराई।
FCRA विधेयक पर सरकार का पक्ष
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने FCRA संशोधन विधेयक को लेकर विपक्ष की आशंकाओं को खारिज किया। उन्होंने कहा कि इस विधेयक में ऐसा कुछ भी नहीं है जिससे किसी को डरने की ज़रूरत हो। उनके अनुसार, देश में विदेशी फंडिंग के लेन-देन को नियंत्रित करने के लिए पहले से नियम और कानून मौजूद हैं, और उनका पालन होना ज़रूरी है। सिंह ने स्पष्ट किया कि डर केवल उन्हें होना चाहिए जो इन नियमों का गलत या गैर-कानूनी तरीके से इस्तेमाल करते हैं।
झारखंड छात्र आंदोलन और विपक्ष का रुख
समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद राजीव राय ने झारखंड में जारी छात्र विरोध-प्रदर्शनों पर कहा कि उन्हें प्रदर्शन के दौरान छात्रों द्वारा कहे गए सटीक शब्दों की जानकारी नहीं है। हालाँकि, उन्होंने यह स्पष्ट किया कि देश में जहाँ भी अन्याय होगा, सपा छात्रों के साथ खड़ी रहेगी। राय ने राम मंदिर चढ़ावे में कथित अनियमितताओं के मुद्दे पर भी संसद में तत्काल चर्चा की माँग की। उन्होंने सवाल उठाया कि जिस चढ़ावे के नाम पर राजनीतिक समर्थन और योगदान जुटाया गया, उसी में चोरी के आरोप लगने पर चर्चा से परहेज़ क्यों किया जा रहा है।
BJP का पलटवार — सदन चलाने की माँग
BJP सांसद जगदंबिका पाल ने विपक्ष पर पलटवार करते हुए कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सदन में जवाब देने के लिए तैयार हैं, लेकिन विपक्ष सदन को चलने ही नहीं देना चाहता। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि देश की जनता की अपेक्षा है कि संसद में विधेयकों पर सार्थक चर्चा हो। केंद्रीय राज्यमंत्री रामदास आठवले ने भी विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि बार-बार हंगामा करना लोकतंत्र के लिए उचित नहीं है और आने वाले चुनाव में इसका खामियाजा विपक्षी दलों को भुगतना पड़ेगा। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका महत्वपूर्ण है — सरकार से सवाल पूछना और मुद्दों पर चर्चा करना उनका अधिकार है, परंतु निरंतर कार्यवाही बाधित करना उचित नहीं।
हरभजन सिंह की पंजाब में नशे पर चिंता
BJP सांसद हरभजन सिंह ने पंजाब में नशे की बढ़ती समस्या पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि पंजाब अपनी खुशहाली, खेल और भाईचारे के लिए जाना जाता रहा है, लेकिन अब नशे की लत के कारण राज्य की एक अलग तस्वीर सामने आ रही है। हरभजन सिंह ने कहा कि अगर समय रहते पर्याप्त कदम उठाए गए होते, तो आज नशे से जुड़े इतने वीडियो और इतनी चर्चा नहीं होती। उन्होंने सरकार से इस मामले में ठोस कार्रवाई की माँग की। इसके अलावा, उन्होंने केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव से मुलाकात कर हिमाचल प्रदेश के अंब तक जाने वाली तीन ट्रेनों से जुड़े मुद्दे पर भी चर्चा की।
आगे क्या होगा
मानसून सत्र के शेष दिनों में FCRA विधेयक पर राज्यसभा में चर्चा जारी रहने की संभावना है। विपक्ष के तेवर देखते हुए सदन में और व्यवधान से इनकार नहीं किया जा सकता। झारखंड छात्र आंदोलन और राम मंदिर चढ़ावा विवाद — दोनों मुद्दे राजनीतिक रूप से संवेदनशील बने हुए हैं और इन पर संसद के भीतर और बाहर दोनों जगह बहस तेज़ होने के आसार हैं।