मानसून सत्र के आखिरी दिन संसद में NDA-विपक्ष आमने-सामने, लोकसभा अनिश्चितकाल के लिए स्थगित
सारांश
मुख्य बातें
संसद के मकर द्वार पर 13 अगस्त को मानसून सत्र के अंतिम दिन राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन (NDA) और विपक्षी दलों के सांसद एक बार फिर आमने-सामने आ गए। दोनों पक्षों ने अलग-अलग तख्तियाँ लेकर एक-दूसरे के खिलाफ नारेबाजी की, जबकि लोकसभा को उसी दिन अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया।
विपक्ष के विरोध के मुद्दे
विपक्षी सांसदों के एक वर्ग ने अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी से जुड़े मामले पर सरकार के खिलाफ नारे लगाए और संबंधित तख्तियाँ प्रदर्शित कीं। अन्य विपक्षी सांसदों ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की संसद से कथित 'अनुपस्थिति' को लेकर सवाल उठाए।
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने गृह मंत्री के बहस के प्रस्ताव को यह कहते हुए नकार दिया कि विपक्ष को 'गृह मंत्री की कल्पनाओं या उपदेशों में कोई दिलचस्पी नहीं है।' उन्होंने कहा कि देश की युवा पीढ़ी यह जानना चाहती है कि 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान छात्रों पर गोली चलाने का आदेश किसने दिया था।
NDA का पलटवार
NDA सांसदों ने झारखंड में 'विधानसभा घेराव' मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई को लेकर कांग्रेस और राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए तख्तियाँ लेकर नारेबाजी की।
केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल ने विपक्ष पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, 'विपक्ष पूरी तरह से नकारात्मक दृष्टिकोण अपनाए हुए हैं। पूरा मानसून सत्र हंगामे और गतिरोध के भेंट चढ़ा दिया। रोज गोल-पोस्ट बदले — इनकी मंशा कभी सदन को चलाने की थी ही नहीं।' उन्होंने यह भी कहा कि उनके संसदीय कार्य मंत्री ने सदन में स्पष्ट रूप से विपक्ष को अपनी सीटों पर वापस आने और चर्चा में भाग लेने का आमंत्रण दिया था।
गृह मंत्री का रुख
बुधवार को गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि वे नीट पेपर लीक मुद्दे पर और 20 जुलाई के संसद मार्च के दौरान छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई के बारे में हर सवाल का जवाब देने को तैयार हैं। उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह जानबूझकर सदन में चर्चा को रोक रहा है।
सत्र का अंत और आगे की राह
मानसून सत्र के दौरान लगातार हंगामे और गतिरोध के बीच गुरुवार, 13 अगस्त को लोकसभा को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। यह ऐसे समय में आया है जब नीट पेपर लीक, राम मंदिर चढ़ावा विवाद और झारखंड पुलिस कार्रवाई जैसे कई अनसुलझे मुद्दे संसद की दहलीज पर खड़े हैं। गौरतलब है कि पूरा मानसून सत्र किसी बड़े विधायी कार्य के बिना समाप्त हो गया, और शीतकालीन सत्र तक इन मुद्दों पर संसद में बहस की संभावना अधर में है।