27 जुलाई 2026
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मानसून सत्र: NEET विवाद पर हंगामा, 27 जुलाई को राज्यसभा-लोकसभा दोपहर 2 बजे तक स्थगित

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मानसून सत्र: NEET विवाद पर हंगामा, 27 जुलाई को राज्यसभा-लोकसभा दोपहर 2 बजे तक स्थगित

सारांश

संसद के मानसून सत्र का दूसरा सप्ताह भी बाधित रहा — NEET पेपर लीक और जंतर मंतर पर छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के विरोध में विपक्ष ने नियम 267 के तहत तत्काल चर्चा की माँग की, जिसे सभापति ने अस्वीकार कर दिया और दोनों सदन दोपहर 2 बजे तक स्थगित हो गए।

मुख्य बातें

27 जुलाई को मानसून सत्र के दूसरे सप्ताह में राज्यसभा और लोकसभा दोनों की कार्यवाही पहले 12 बजे और फिर दोपहर 2 बजे तक स्थगित की गई।
नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने नियम 267 के तहत NEET विवाद और जंतर मंतर पर पुलिस कार्रवाई पर तत्काल बहस की माँग की।
राधाकृष्णन ने विपक्ष का नोटिस अस्वीकार करते हुए कहा कि 'अत्यंत दुर्लभ' स्थिति में भी पूरे सदन की सर्वसम्मति आवश्यक है।
नियम 267 के तहत सदन की समस्त नियमित कार्यवाही रोककर केवल नोटिस वाले विषय पर चर्चा होती है, और अंत में मतदान का भी प्रावधान है।
पूर्व सभापतियों की रूलिंग के आधार पर पीठ ने स्पष्ट किया कि यह नियम सामान्यतः अस्वीकार किया जाता रहा है।

नई दिल्ली में संसद के मानसून सत्र का दूसरा सप्ताह भी विपक्षी हंगामे की भेंट चढ़ गया। 27 जुलाई, सोमवार को राज्यसभा और लोकसभा — दोनों सदनों की कार्यवाही पहले दोपहर 12 बजे और फिर दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित करनी पड़ी। विपक्ष NEET परीक्षा विवाद और जंतर मंतर पर प्रदर्शनकारी छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई के मुद्दे पर तत्काल चर्चा की माँग कर रहा था।

मुख्य घटनाक्रम

सदन की कार्यवाही शुरू होते ही राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष एवं कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कड़े शब्दों में कहा कि भारत के इतिहास में ऐसा पहले कभी नहीं हुआ कि युवाओं के साथ इस तरह का व्यवहार किया गया हो। खड़गे ने नियम 267 के तहत नोटिस देकर NEET पेपर लीक और प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के विषय पर सदन की अन्य कार्यवाही स्थगित कर तत्काल बहस की माँग रखी।

कांग्रेस के साथ-साथ अन्य विपक्षी दलों के सांसद भी इसी माँग के साथ सदन में उठ खड़े हुए, जिससे दोनों सदनों में शोर-शराबा बढ़ गया और अंततः कार्यवाही बाधित हो गई।

सभापति की प्रतिक्रिया और नियम 267 पर विवाद

राज्यसभा सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने विपक्ष के नोटिस को अस्वीकार कर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया — 'खड़गे जी, मैंने इस विषय पर पहले ही अपना निर्णय दे दिया है। उस निर्णय में मैंने स्वयं कोई असहमति व्यक्त नहीं की है। इस पर असहमति उस समिति ने जताई थी, जिसमें मनमोहन सिंह जी, प्रणब मुखर्जी जी, वाजपेयी जी और कई अन्य वरिष्ठ नेता सदस्य थे। बताइए, क्या मुझे नियमों के अनुसार चलना चाहिए या नियम तोड़ देने चाहिए।'

इस पर खड़गे ने पलटवार करते हुए कहा कि उपसभापति ने स्वयं कहा था कि 'अत्यंत दुर्लभ' परिस्थितियों में नियम 267 के तहत नोटिस स्वीकार किए जा सकते हैं, और NEET जैसा संकट निश्चित रूप से उसी श्रेणी में आता है। सभापति ने जवाब दिया कि 'अत्यंत दुर्लभ' स्थिति में भी पूरे सदन की सर्वसम्मति अनिवार्य है, जो इस मामले में उपलब्ध नहीं है।

गौरतलब है कि नियम 267 के तहत राज्यसभा में सदन की समस्त नियमित कार्यवाही को स्थगित कर केवल उसी विषय पर चर्चा होती है जिस पर सभापति को नोटिस दिया गया हो। इस नियम की एक विशेषता यह भी है कि इसके तहत हुई चर्चा के अंत में मतदान का प्रावधान है — जो इसे विपक्ष के लिए विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण औज़ार बनाता है। पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि विभिन्न पूर्व सभापतियों ने इस नियम को सामान्यतः अस्वीकार किया है और इस संबंध में रूलिंग भी दी जा चुकी है।

NEET विवाद की पृष्ठभूमि

बीते दिनों जंतर मंतर, नई दिल्ली में NEET परीक्षा और पेपर लीक के विरोध में बड़ी संख्या में छात्र सड़कों पर उतरे थे। पुलिस द्वारा इन प्रदर्शनकारियों पर की गई कार्रवाई ने विपक्ष को संसद में आक्रामक रुख अपनाने का अवसर दे दिया। यह ऐसे समय में आया है जब NEET पेपर लीक मामला पहले से ही राष्ट्रीय बहस का केंद्र बना हुआ है और सर्वोच्च न्यायालय में भी इससे जुड़ी याचिकाएँ विचाराधीन हैं।

आम जनता और छात्रों पर असर

संसद में बार-बार होने वाले व्यवधान से NEET सुधार और पेपर लीक पर विधायी चर्चा टलती जा रही है, जिसका सीधा असर लाखों उन छात्रों पर पड़ रहा है जो परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की माँग कर रहे हैं। विपक्ष का तर्क है कि सदन में बहस न होने देकर सरकार जवाबदेही से बच रही है।

क्या होगा आगे

मानसून सत्र के शेष सप्ताहों में NEET और पेपर लीक के मुद्दे पर गतिरोध जारी रहने की आशंका है। यदि सरकार और विपक्ष के बीच चर्चा की शर्तों पर सहमति नहीं बनती, तो सत्र का बड़ा हिस्सा बिना उत्पादक विधायी कार्य के समाप्त हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों सदन को बहस के मंच के बजाय प्रतीकात्मक संघर्ष के अखाड़े में बदल देते हैं। NEET पेपर लीक पर लाखों छात्र जवाब चाहते हैं, लेकिन संसद में वह बहस नहीं हो पा रही जो होनी चाहिए। नियम 267 पर विवाद असल में प्रक्रियागत नहीं, राजनीतिक है — सरकार जवाबदेही से बचना चाहती है और विपक्ष मतदान-युक्त बहस के ज़रिए सरकार को घेरना। इस गतिरोध की कीमत अंततः वे छात्र चुकाते हैं जिनके भविष्य पर सवाल उठे हैं।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

27 जुलाई को संसद की कार्यवाही क्यों स्थगित हुई?
NEET परीक्षा विवाद और जंतर मंतर पर प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के विरोध में विपक्षी सांसदों ने हंगामा किया, जिसके कारण राज्यसभा और लोकसभा दोनों की कार्यवाही पहले दोपहर 12 बजे और फिर दोपहर 2 बजे तक स्थगित करनी पड़ी।
नियम 267 क्या है और विपक्ष इसे क्यों उठा रहा है?
नियम 267 राज्यसभा की प्रक्रिया का वह प्रावधान है जिसके तहत सदन की सभी नियमित कार्यवाहियाँ स्थगित कर केवल नोटिस में उल्लिखित विषय पर चर्चा होती है, और अंत में मतदान भी हो सकता है। विपक्ष इसी मतदान प्रावधान के कारण इस नियम के तहत NEET पर बहस चाहता है, ताकि सरकार को सीधे जवाबदेह ठहराया जा सके।
सभापति ने विपक्ष का नोटिस क्यों अस्वीकार किया?
सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने कहा कि पूर्व सभापतियों ने नियम 267 को सामान्यतः अस्वीकार किया है और इस पर रूलिंग भी दी जा चुकी है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि 'अत्यंत दुर्लभ' परिस्थितियों में भी इस नियम को लागू करने के लिए पूरे सदन की सर्वसम्मति आवश्यक है, जो इस मामले में नहीं थी।
NEET विवाद की पृष्ठभूमि क्या है?
NEET परीक्षा में पेपर लीक के आरोपों के बाद देशभर में छात्रों का आक्रोश भड़का था। नई दिल्ली के जंतर मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई हुई, जिस पर विपक्ष ने संसद में सवाल उठाए। यह मामला सर्वोच्च न्यायालय में भी विचाराधीन है।
मानसून सत्र में आगे क्या होने की संभावना है?
NEET और पेपर लीक के मुद्दे पर गतिरोध जारी रहने की आशंका है। यदि सरकार और विपक्ष के बीच चर्चा की शर्तों पर सहमति नहीं बनती, तो सत्र का बड़ा हिस्सा उत्पादक विधायी कार्य के बिना समाप्त हो सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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