नीट-पेपर लीक विवाद: मानसून सत्र के दूसरे दिन भी संसद ठप, लोकसभा-राज्यसभा बुधवार तक स्थगित
सारांश
मुख्य बातें
मानसून सत्र के दूसरे दिन, मंगलवार 21 जुलाई को, नीट यूजी 2026 परीक्षा में कथित पेपर लीक और जंतर मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के मुद्दे पर विपक्ष के भारी हंगामे के कारण लोकसभा और राज्यसभा दोनों की कार्यवाही बुधवार, 22 जुलाई, सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। लगातार दूसरे दिन संसद की कार्यवाही बाधित होने से विधायी एजेंडा पूरी तरह ठप रहा।
मुख्य घटनाक्रम
मंगलवार सुबह 11 बजे जैसे ही दोनों सदनों में कार्यवाही शुरू हुई, विपक्षी सांसद नीट परीक्षा और पेपर लीक मामले पर तत्काल चर्चा की माँग करते हुए सदन के वेल में उतर आए। राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने इस विषय पर अपना पक्ष रखा, लेकिन इसके तुरंत बाद हंगामा और भड़क गया।
राज्यसभा की कार्यवाही पहले दोपहर 12 बजे तक, फिर दोपहर 2 बजे तक स्थगित की गई। दोनों बार हंगामा जारी रहा और अंततः सदन को बुधवार तक के लिए स्थगित करना पड़ा। लोकसभा में भी विपक्षी सांसदों की नारेबाजी और वेल में आने के कारण कार्यवाही इसी तरह बाधित रही।
विपक्ष की माँग
कांग्रेस समेत विपक्षी दलों के सांसदों ने राज्यसभा में नियम 267 के तहत काम रोकने का नोटिस दिया था। उनकी माँग थी कि नीट यूजी 2026 और पेपर लीक मामले पर सदन में तत्काल चर्चा कराई जाए। विपक्ष का कहना है कि जंतर मंतर पर धरने पर बैठे छात्रों की आवाज़ को संसद में जगह मिलनी चाहिए।
राज्यसभा के उपसभापति ने विपक्षी सदस्यों से बार-बार शांति बनाए रखने और नियम-आधारित कार्यवाही का पालन करने का अनुरोध किया, लेकिन हंगामा थमा नहीं। पीठासीन अधिकारियों ने भी कई बार सदस्यों से अपनी-अपनी सीटों पर लौटने की अपील की, जो बेअसर रही।
विधायी कार्य पर असर
हंगामे के कारण दोनों सदनों में प्रश्नकाल और सूचीबद्ध विधायी कार्य नहीं हो सके। सरकार अपने विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाना चाहती थी, लेकिन विपक्ष के आक्रामक रुख के चलते एक भी महत्वपूर्ण कार्य नहीं निपटाया जा सका। यह मानसून सत्र का लगातार दूसरा दिन है जब संसद की कार्यवाही हंगामे की भेंट चढ़ी।
आगे क्या होगा
मानसून सत्र के आगामी दिनों में भी सरकार और विपक्ष के बीच तीखे टकराव के संकेत बने हुए हैं। नीट पेपर लीक का मुद्दा राजनीतिक रूप से संवेदनशील बना हुआ है और विपक्ष इसे सदन में उठाने पर अड़ा है। बुधवार, 22 जुलाई को जब दोनों सदन फिर बैठेंगे, तब यह देखना अहम होगा कि क्या सरकार और विपक्ष के बीच कोई सहमति बन पाती है।