4 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

इरशाद कामिल: अखबारों से बॉलीवुड तक, 'कुन फया कुन' से 'सैयारा' तक का सफर

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
इरशाद कामिल: अखबारों से बॉलीवुड तक, 'कुन फया कुन' से 'सैयारा' तक का सफर

सारांश

अखबारों की सुर्खियाँ लिखने वाला एक युवक मुंबई पहुँचा और 'चमेली' से शुरू कर 'सैयारा' तक का सफर तय किया। इरशाद कामिल की कहानी सिर्फ एक गीतकार की नहीं, बल्कि हिंदी-उर्दू साहित्य की उस विरासत की है जो बॉलीवुड के पर्दे पर आज भी जीवित है।

मुख्य बातें

इरशाद कामिल का जन्म 5 सितंबर 1971 को मलेरकोटला, पंजाब में हुआ।
उन्होंने पत्रकारिता के बाद हिंदी कविता में पीएचडी की और कई अखबारों में काम किया।
बॉलीवुड करियर की शुरुआत 2004 में फिल्म 'चमेली' से हुई।
'जब वी मेट' , 'रॉकस्टार' , 'कबीर सिंह' , 'जवान' और 'सैयारा' सहित दर्जनों बड़ी फिल्मों के गीत लिखे।
'कुन फया कुन' , 'अगर तुम साथ हो' और 'ओ माही' उनके सबसे चर्चित गीतों में शामिल हैं।
हिंदी-उर्दू की साहित्यिक गहराई और पंजाबी भाषा की पकड़ उनकी विशिष्ट पहचान है।

बॉलीवुड के शीर्ष गीतकारों में शुमार इरशाद कामिल का जन्म 5 सितंबर 1971 को पंजाब के संगरूर जिले के मलेरकोटला में एक मध्यमवर्गीय पंजाबी मुस्लिम परिवार में हुआ था। दो दशकों से अधिक के करियर में उन्होंने 'जब वी मेट' से लेकर 'सैयारा' तक दर्जनों फिल्मों के लिए ऐसे गीत रचे जो आज भी श्रोताओं के दिलों में बसे हैं। पत्रकारिता से शुरू हुई उनकी यात्रा हिंदी कविता में पीएचडी और फिर बॉलीवुड की चकाचौंध तक पहुँची।

जन्म और परिवार

इरशाद कामिल के पिता मोहम्मद सिद्दीक एक सरकारी कॉलेज के रसायन विज्ञान विभाग में कार्यरत थे और माँ का नाम बेगम इकबाल बानो था। वे सात भाई-बहनों में सबसे छोटे हैं। उनके नाम के पीछे भी एक दिलचस्प किस्सा है — उनकी माँ गर्भावस्था के दौरान ऑल इंडिया रेडियो पर 'तामिल इरशाद' नाम का एक कार्यक्रम नियमित रूप से सुनती थीं, और उसी से प्रेरित होकर उन्होंने अपने बेटे का नाम 'इरशाद' रखा।

शिक्षा और साहित्यिक पृष्ठभूमि

इरशाद कामिल ने पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी करने के बाद हिंदी कविता में पीएचडी की डिग्री हासिल की। बचपन से ही साहित्य के प्रति गहरी रुचि ने उनकी हिंदी और उर्दू भाषा पर पकड़ को पुख्ता किया। यही भाषाई समृद्धि आगे चलकर उनके गीतों की पहचान बनी। गौरतलब है कि हिंदी सिनेमा में ऐसे गीतकार विरले ही होते हैं जिनके पास साहित्य में शोध की पृष्ठभूमि हो।

संघर्ष से सफलता तक

पढ़ाई पूरी करने के बाद इरशाद ने कई अखबारों में काम किया। कवि बनने की ललक उन्हें मुंबई खींच लाई, लेकिन शुरुआती दिन आसान नहीं थे। कई चुनौतियों और आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। अपनी मेहनत और हुनर के दम पर उन्होंने धीरे-धीरे बॉलीवुड में अपनी जगह बनाई। यह ऐसे समय में आया जब इंडस्ट्री में नए गीतकारों के लिए जगह बनाना बेहद मुश्किल माना जाता था।

बॉलीवुड करियर और प्रमुख फिल्में

इरशाद कामिल ने बॉलीवुड में अपने करियर की शुरुआत वर्ष 2004 में फिल्म 'चमेली' के गीतों से की। इसके बाद उन्होंने जिन फिल्मों के लिए गीत लिखे, उनकी सूची बेहद लंबी और प्रभावशाली है — 'जब वी मेट', 'लव आज कल', 'रॉकस्टार', 'आशिकी 2', 'रांझणा', 'हाईवे', 'तमाशा', 'कबीर सिंह', 'अमर सिंह चमकीला', 'प्रेम रतन धन पायो', 'सुल्तान', 'अतरंगी रे', 'डंकी', 'कॉकटेल', 'सन ऑफ सरदार', 'वन्स अपॉन अ टाइम इन मुंबई', 'जवान', 'जीरो', 'हैप्पी न्यू ईयर' और 'सैयारा' उनमें प्रमुख हैं।

उनके लिखे कुछ सबसे चर्चित गीतों में 'कुन फया कुन', 'अगर तुम साथ हो', 'आज जिन चढ़ेया', 'मेरा नाम तू', 'पी लूं', 'चाशनी', 'मनवा लागे', 'तुम तक', 'दिल दिया गल्ला' और 'ओ माही' शामिल हैं।

शैली और पहचान

इरशाद कामिल मुख्य रूप से अपनी संजीदा लेखनी, साहित्यिक गहराई और हिंदी-उर्दू शब्दों के सहज तालमेल के लिए जाने जाते हैं। पंजाबी भाषा पर भी उनकी मज़बूत पकड़ उनके गीतों को एक अलग रंग देती है। दो दशक के करियर में उन्होंने कई प्रतिष्ठित पुरस्कार भी जीते हैं। आने वाले वर्षों में भी उनकी कलम से नए गीत सुनने की उम्मीद बनी रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिल्म की आत्मा हुआ करते थे — और यह संयोग नहीं कि उनके सबसे यादगार गीत उन्हीं फिल्मों में हैं जिन्हें दशकों बाद भी याद किया जाता है। पत्रकारिता और पीएचडी की पृष्ठभूमि ने उनके शब्दों को वह वज़न दिया जो सतही पॉप लिरिक्स में नहीं मिलता। बॉलीवुड में जब 'इंस्टेंट हिट' की होड़ में गीतों की साहित्यिक गुणवत्ता गिर रही है, कामिल जैसे गीतकारों की मौजूदगी इस इंडस्ट्री के लिए एक ज़रूरी संतुलन है।
RashtraPress
4 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इरशाद कामिल कौन हैं और वे किस लिए जाने जाते हैं?
इरशाद कामिल बॉलीवुड के प्रतिष्ठित गीतकार हैं जो 'कुन फया कुन', 'अगर तुम साथ हो' और 'ओ माही' जैसे गीतों के लिए जाने जाते हैं। उनकी पहचान हिंदी-उर्दू की साहित्यिक गहराई और पंजाबी भाषा के सहज प्रयोग के लिए है।
इरशाद कामिल का जन्म कब और कहाँ हुआ?
इरशाद कामिल का जन्म 5 सितंबर 1971 को पंजाब के संगरूर जिले के मलेरकोटला में हुआ था। वे एक मध्यमवर्गीय पंजाबी मुस्लिम परिवार में सात भाई-बहनों में सबसे छोटे हैं।
इरशाद कामिल ने बॉलीवुड में करियर की शुरुआत कैसे की?
पत्रकारिता और हिंदी कविता में पीएचडी के बाद उन्होंने कई अखबारों में काम किया। इसके बाद मुंबई आकर संघर्ष किया और 2004 में फिल्म 'चमेली' के गीत लिखकर बॉलीवुड में कदम रखा।
इरशाद कामिल ने किन प्रमुख फिल्मों के लिए गीत लिखे हैं?
उन्होंने 'जब वी मेट', 'रॉकस्टार', 'आशिकी 2', 'रांझणा', 'कबीर सिंह', 'अमर सिंह चमकीला', 'जवान', 'डंकी' और 'सैयारा' सहित दर्जनों बड़ी फिल्मों के लिए गीत लिखे हैं। दो दशक के करियर में उनकी फिल्मोग्राफी बेहद विस्तृत और विविध है।
इरशाद कामिल के नाम के पीछे क्या कहानी है?
उनकी माँ गर्भावस्था के दौरान ऑल इंडिया रेडियो पर 'तामिल इरशाद' नाम का एक कार्यक्रम नियमित रूप से सुनती थीं। उसी कार्यक्रम के नाम से प्रेरित होकर उन्होंने अपने बेटे का नाम 'इरशाद' रखा।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 2 महीने पहले
  3. 4 महीने पहले
  4. 6 महीने पहले
  5. 7 महीने पहले
  6. 9 महीने पहले
  7. 11 महीने पहले
  8. 1 साल पहले