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बंगाल शहरी निकाय चुनाव: सीपीआई-एम ने उम्मीदवार चयन जिला समितियों को सौंपा, TMC और कांग्रेस से गठबंधन नामंजूर

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बंगाल शहरी निकाय चुनाव: सीपीआई-एम ने उम्मीदवार चयन जिला समितियों को सौंपा, TMC और कांग्रेस से गठबंधन नामंजूर

सारांश

सीपीआई-एम ने बंगाल के शहरी निकाय चुनावों के लिए उम्मीदवार चयन जिला समितियों को सौंपा और TMC के तीनों गुटों व कांग्रेस से गठबंधन से साफ इनकार किया। पार्टी का लक्ष्य: अकेले लड़कर मुख्य विपक्षी दल का दर्जा फिर से हासिल करना।

मुख्य बातें

सीपीआई-एम ने बंगाल के आगामी शहरी निकाय चुनावों में उम्मीदवार चयन और सीट-शेयरिंग की जिम्मेदारी जिला समितियों को सौंपी।
लेफ्ट फ्रंट से बाहर किसी दल से गठबंधन के लिए राज्य समिति की सहमति अनिवार्य होगी।
तृणमूल कांग्रेस के तीनों गुटों — ममता बनर्जी, रिताब्रता बनर्जी और एनसीपीआई में शामिल 20 सांसदों — से किसी भी समझौते पर पूर्ण प्रतिबंध।
2026 विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस द्वारा एकतरफा गठबंधन तोड़े जाने के बाद उसके साथ पुनर्गठबंधन की संभावना नगण्य।
पार्टी का लक्ष्य लेफ्ट फ्रंट के रूप में अकेले चुनाव लड़कर पश्चिम बंगाल में मुख्य विपक्षी दल का दर्जा पुनः प्राप्त करना।

पश्चिम बंगाल में लेफ्ट फ्रंट की प्रमुख पार्टी भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) — सीपीआई-एम — ने राज्य में आगामी शहरी निकाय चुनावों के लिए उम्मीदवार चयन और सीट-शेयरिंग की जिम्मेदारी राज्य समिति से हटाकर जिला समितियों को सौंपने का निर्णय लिया है। ये चुनाव म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन और म्युनिसिपैलिटी समेत विभिन्न शहरी निकायों के लिए 2026 के अंत में प्रस्तावित हैं। पार्टी ने स्पष्ट कर दिया है कि तृणमूल कांग्रेस (TMC) के किसी भी गुट या कांग्रेस के साथ कोई चुनावी समझौता स्वीकार्य नहीं होगा।

नई रणनीति: विकेंद्रीकृत उम्मीदवार चयन

सीपीआई-एम के राज्य नेतृत्व ने तय किया है कि लेफ्ट फ्रंट के मौजूदा घटक दलों के बीच सीट-शेयरिंग का फॉर्मूला अब जिला समितियाँ तय करेंगी। स्थानीय निकाय चुनावों में उम्मीदवारों के चयन का अधिकार भी इन्हीं समितियों को दिया गया है — राज्य नेतृत्व इसमें सीधा हस्तक्षेप नहीं करेगा।

हालाँकि, सीपीआई-एम की केंद्रीय समिति के एक सदस्य ने स्पष्ट किया कि यदि कोई जिला समिति लेफ्ट फ्रंट से बाहर के किसी राजनीतिक दल के साथ गठबंधन आवश्यक समझे, तो ऐसा निर्णय राज्य समिति की पूर्व सहमति से ही लिया जा सकेगा। यह प्रावधान विकेंद्रीकरण और केंद्रीय अनुशासन के बीच संतुलन बनाए रखने की कोशिश है।

TMC के तीनों गुटों से दूरी

केंद्रीय समिति के नेता ने दो-टूक कहा कि पार्टी का केंद्रीय और राज्य नेतृत्व किसी भी जिला समिति को तृणमूल कांग्रेस के तीन मौजूदा गुटों में से किसी के साथ भी समझौते की अनुमति नहीं देगा।

ये तीन गुट हैं — पहला, पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाला मूल TMC गुट; दूसरा, TMC से निष्कासित विधायक रिताब्रता बनर्जी का गुट; और तीसरा, TMC के वे 20 लोकसभा सदस्य जो लगभग समाप्त हो चुकी एनसीपीआई में शामिल हो गए हैं।

केंद्रीय समिति के सदस्य ने कहा, "हमें पहले ही इनमें से कुछ गुटों से जिला स्तर पर सीट-शेयरिंग के संकेत मिल रहे हैं। लेकिन हमारा जवाब साफ तौर पर 'नहीं' है। हमारा मौजूदा लक्ष्य पश्चिम बंगाल में मुख्य विपक्षी पार्टी का दर्जा फिर से हासिल करना है और आने वाले शहरी निकाय चुनाव इस दिशा में शुरुआत करने का सबसे अच्छा मौका हैं।"

कांग्रेस के साथ पुनर्गठबंधन की संभावना नहीं

राज्य सचिवालय के एक सदस्य ने बताया कि कांग्रेस के साथ किसी भी प्रकार के समझौते की संभावना लगभग शून्य है। उन्होंने याद दिलाया कि 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस नेतृत्व ने एकतरफा तौर पर लेफ्ट फ्रंट के साथ पुराने चुनावी गठबंधन को तोड़ने की घोषणा की थी।

सचिवालय सदस्य ने कहा, "बेहतर यही है कि हम लेफ्ट फ्रंट के तौर पर अकेले चुनाव लड़ें, ताकि हमें पता चल सके कि हमारी वास्तविक स्थिति क्या है।" यह बयान पार्टी के आत्मनिर्भर चुनावी दृष्टिकोण को रेखांकित करता है।

आगे की राह

गौरतलब है कि बंगाल में सीपीआई-एम एक लंबे वनवास के बाद अपनी ज़मीन वापस पाने की कोशिश में है। 2011 में सत्ता गँवाने के बाद से पार्टी राज्य में लगातार कमज़ोर होती रही है। यह ऐसे समय में आया है जब TMC और BJP दोनों के खिलाफ जनता में असंतोष के कुछ संकेत दिखे हैं। शहरी निकाय चुनाव लेफ्ट फ्रंट के लिए अपनी सांगठनिक क्षमता परखने और जनाधार को फिर से मापने का अवसर होंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसमें जोखिम भी है — जिला समितियाँ ज़मीनी दबाव में वही समझौते कर सकती हैं जिन्हें राज्य नेतृत्व नाकारना चाहता है। TMC के तीनों गुटों से एक साथ दूरी बनाना पार्टी की वैचारिक शुद्धता दर्शाता है, पर यह उसे चुनावी अंकगणित में अलग-थलग भी कर सकता है। कांग्रेस के साथ गठबंधन टूटने की जिम्मेदारी का सार्वजनिक आरोपण — जो सचिवालय ने खुलकर किया — बताता है कि पार्टी भविष्य के लिए कथा-निर्माण भी कर रही है। असली परीक्षा यह होगी कि 2011 के बाद से सिकुड़ा जनाधार क्या शहरी निकाय स्तर पर भी लेफ्ट फ्रंट को जीत दिला सकता है।
RashtraPress
4 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीपीआई-एम ने बंगाल शहरी निकाय चुनावों के लिए क्या नई रणनीति अपनाई है?
सीपीआई-एम ने उम्मीदवार चयन और सीट-शेयरिंग की जिम्मेदारी राज्य समिति से हटाकर जिला समितियों को सौंपी है। हालाँकि, लेफ्ट फ्रंट से बाहर किसी दल से गठबंधन के लिए राज्य समिति की पूर्व सहमति अनिवार्य होगी।
क्या सीपीआई-एम तृणमूल कांग्रेस के किसी गुट के साथ गठबंधन करेगी?
नहीं। पार्टी के केंद्रीय और राज्य नेतृत्व ने स्पष्ट किया है कि TMC के तीनों गुटों — ममता बनर्जी का गुट, रिताब्रता बनर्जी का गुट और एनसीपीआई में शामिल 20 सांसदों का समूह — में से किसी के साथ भी कोई समझौता स्वीकार्य नहीं होगा।
कांग्रेस के साथ लेफ्ट फ्रंट का गठबंधन क्यों टूटा और क्या यह फिर बन सकता है?
2026 के विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस नेतृत्व ने एकतरफा तौर पर लेफ्ट फ्रंट के साथ पुराने चुनावी गठबंधन को तोड़ने की घोषणा की थी। सीपीआई-एम के राज्य सचिवालय सदस्य के अनुसार, आगामी शहरी निकाय चुनावों में उस गठबंधन को फिर से बहाल करने की संभावना लगभग नहीं है।
बंगाल में शहरी निकाय चुनाव कब होने हैं?
म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन और म्युनिसिपैलिटी समेत शहरी निकायों के ये चुनाव 2026 के अंत में होने प्रस्तावित हैं। सीपीआई-एम इन्हें मुख्य विपक्षी दल का दर्जा पुनः हासिल करने की दिशा में पहला बड़ा अवसर मान रही है।
सीपीआई-एम का बंगाल में शहरी निकाय चुनाव लड़ने का मुख्य उद्देश्य क्या है?
पार्टी का लक्ष्य पश्चिम बंगाल में मुख्य विपक्षी दल का दर्जा फिर से हासिल करना है। केंद्रीय समिति के सदस्य के अनुसार, पार्टी लेफ्ट फ्रंट के रूप में अकेले चुनाव लड़कर अपनी वास्तविक सांगठनिक स्थिति को परखना चाहती है।
राष्ट्र प्रेस
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