5 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

बंगाल शहरी निकाय चुनाव: सीपीआई-एम ने उम्मीदवार चयन जिला समितियों को सौंपा, TMC के किसी भी गुट से गठबंधन नामंज़ूर

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
बंगाल शहरी निकाय चुनाव: सीपीआई-एम ने उम्मीदवार चयन जिला समितियों को सौंपा, TMC के किसी भी गुट से गठबंधन नामंज़ूर

सारांश

सीपीआई-एम ने बंगाल के आगामी शहरी निकाय चुनावों के लिए रणनीति बदली — उम्मीदवार चयन जिला समितियों को सौंपा, TMC के तीनों गुटों और कांग्रेस से गठबंधन से साफ़ इनकार। पार्टी का लक्ष्य अकेले चुनाव लड़कर मुख्य विपक्षी दल का दर्जा फिर हासिल करना है।

मुख्य बातें

सीपीआई-एम ने पश्चिम बंगाल के आगामी म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन और म्युनिसिपैलिटी चुनावों के लिए उम्मीदवार चयन और सीट-शेयरिंग की ज़िम्मेदारी जिला समितियों को सौंपी।
लेफ्ट फ्रंट से बाहर किसी भी दल से गठबंधन के लिए राज्य समिति की पूर्व सहमति अनिवार्य होगी।
पार्टी ने TMC के तीनों गुटों — ममता बनर्जी गुट, रिताब्रता बनर्जी गुट, और एनसीपीआई में शामिल 20 लोकसभा सदस्यों के समूह — से किसी भी समझौते से इनकार किया।
कांग्रेस के साथ पुराने गठबंधन की बहाली की संभावना नहीं; 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस ने एकतरफा गठबंधन तोड़ा था।
पार्टी का लक्ष्य शहरी निकाय चुनावों में अकेले उतरकर मुख्य विपक्षी दल का दर्जा पुनः प्राप्त करना है।

पश्चिम बंगाल में लेफ्ट फ्रंट की प्रमुख पार्टी भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) [सीपीआई-एम] ने राज्य के आगामी शहरी निकाय चुनावों — जिनमें म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन और म्युनिसिपैलिटी शामिल हैं — के लिए उम्मीदवार चयन की एक नई विकेंद्रीकृत रणनीति अपनाई है। ये चुनाव 2026 के अंत में होने की संभावना है। पार्टी ने स्पष्ट कर दिया है कि तृणमूल कांग्रेस (TMC) के किसी भी गुट के साथ किसी भी स्तर पर कोई समझौता स्वीकार्य नहीं होगा।

उम्मीदवार चयन की नई रणनीति

पार्टी के राज्य नेतृत्व ने तय किया है कि लेफ्ट फ्रंट के मौजूदा घटक दलों के बीच सीट-शेयरिंग का फॉर्मूला तय करने और उम्मीदवारों के चयन की ज़िम्मेदारी अब राज्य समिति के बजाय जिला समितियों को सौंपी जाएगी। यह बदलाव स्थानीय राजनीतिक परिस्थितियों के अनुसार अधिक लचीले और ज़मीनी निर्णय लेने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

हालाँकि, सीपीआई-एम की केंद्रीय समिति के एक सदस्य ने स्पष्ट किया कि यदि कोई जिला समिति लेफ्ट फ्रंट से बाहर के किसी राजनीतिक दल के साथ गठबंधन पर विचार करना चाहे, तो ऐसा केवल राज्य समिति की पूर्व सहमति से ही किया जा सकेगा।

TMC के तीनों गुटों से दूरी का ऐलान

केंद्रीय समिति के नेता ने दो-टूक कहा कि पार्टी का केंद्रीय और राज्य नेतृत्व तृणमूल कांग्रेस के तीनों मौजूदा गुटों में से किसी के साथ भी किसी भी प्रकार का चुनावी समझौता करने की अनुमति नहीं देगा। ये तीन गुट हैं — पहला, पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाला मूल TMC गुट; दूसरा, TMC से निष्कासित विधायक रिताब्रता बनर्जी का गुट; और तीसरा, TMC के वे 20 लोकसभा सदस्य जो लगभग निष्क्रिय हो चुकी एनसीपीआई में शामिल हो गए हैं।

केंद्रीय समिति के सदस्य ने कहा, "हमें पहले ही इनमें से कुछ गुटों से जिला स्तर पर सीट-शेयरिंग के संकेत मिल रहे हैं। लेकिन हमारा जवाब साफ़ तौर पर 'नहीं' है। हमारा मौजूदा लक्ष्य पश्चिम बंगाल में मुख्य विपक्षी पार्टी का दर्जा फिर से हासिल करना है और आने वाले शहरी निकाय चुनाव इस दिशा में शुरुआत करने का सबसे अच्छा मौका हैं। साथ ही, हम किसी ऐसी ताकत के साथ कोई समझौता स्वीकार नहीं करेंगे जिसे राज्य की जनता ने पूरी तरह नकार दिया हो और जो आपसी गुटबाजी के कारण अपनी विश्वसनीयता खो चुकी हो।"

कांग्रेस के साथ गठबंधन की संभावना नहीं

राज्य सचिवालय के एक सदस्य ने संकेत दिया कि कांग्रेस के साथ पुराने चुनावी गठबंधन को बहाल करने की संभावना भी लगभग नहीं के बराबर है। उन्होंने कहा, "2026 के विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस नेतृत्व ने ही एकतरफा तौर पर लेफ्ट फ्रंट के साथ पुराने चुनावी गठबंधन को तोड़ने की घोषणा की थी। इसलिए, आने वाले शहरी निकाय चुनावों में उस गठबंधन को फिर से बहाल करने की कोई संभावना नहीं है। बेहतर यही है कि हम लेफ्ट फ्रंट के तौर पर अकेले चुनाव लड़ें, ताकि हमें पता चल सके कि हमारी वास्तविक स्थिति क्या है।"

आगे की राह

यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में वाम दलों की राजनीतिक उपस्थिति पिछले कुछ वर्षों में काफी कमज़ोर हुई है और पार्टी शहरी निकाय चुनावों को अपनी पुनर्वापसी की परीक्षा के रूप में देख रही है। गौरतलब है कि 2026 के विधानसभा चुनावों में भी लेफ्ट फ्रंट का प्रदर्शन अपेक्षाओं से कमतर रहा था। अब पार्टी स्वतंत्र रूप से चुनाव मैदान में उतरकर अपनी ज़मीनी ताकत को परखना चाहती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

रणनीतिक मजबूरी अधिक लगता है — TMC के विघटित गुटों से दूरी बनाना आसान है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या जिला समितियों को दी गई स्वायत्तता ज़मीनी स्तर पर अनुशासन बनाए रख सकेगी। कांग्रेस से गठबंधन टूटने की ज़िम्मेदारी दूसरे पर डालना राजनीतिक रूप से सुविधाजनक है, पर मतदाता इससे प्रभावित होंगे या नहीं, यह शहरी निकाय चुनावों के नतीजे ही बताएंगे। वाम दलों की बंगाल में लगातार कमज़ोर होती पकड़ को देखते हुए, अकेले चुनाव लड़ने का दांव साहसी भी है और जोखिम भरा भी।
RashtraPress
5 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीपीआई-एम ने बंगाल शहरी निकाय चुनावों के लिए कौन-सी नई रणनीति अपनाई है?
सीपीआई-एम ने उम्मीदवार चयन और सीट-शेयरिंग की ज़िम्मेदारी राज्य समिति से हटाकर जिला समितियों को सौंपी है। हालाँकि, लेफ्ट फ्रंट से बाहर किसी दल के साथ गठबंधन के लिए राज्य समिति की पूर्व मंज़ूरी ज़रूरी होगी।
क्या सीपीआई-एम TMC के किसी गुट के साथ गठबंधन करेगी?
नहीं। पार्टी के केंद्रीय और राज्य नेतृत्व ने TMC के तीनों गुटों — ममता बनर्जी गुट, रिताब्रता बनर्जी गुट, और एनसीपीआई में शामिल 20 लोकसभा सदस्यों के समूह — से किसी भी स्तर पर समझौते से साफ़ इनकार किया है।
क्या लेफ्ट फ्रंट और कांग्रेस का गठबंधन बंगाल निकाय चुनावों में बहाल होगा?
राज्य सचिवालय के सदस्य के अनुसार यह संभावना लगभग नहीं है। 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस नेतृत्व ने एकतरफा तौर पर लेफ्ट फ्रंट के साथ गठबंधन तोड़ा था, इसलिए पार्टी अकेले चुनाव लड़ने को प्राथमिकता दे रही है।
बंगाल शहरी निकाय चुनाव कब होने की संभावना है?
ये चुनाव 2026 के अंत में होने की संभावना है। इनमें राज्य की म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन और म्युनिसिपैलिटी समेत विभिन्न शहरी निकाय शामिल हैं।
सीपीआई-एम इन चुनावों को क्यों महत्वपूर्ण मान रही है?
पार्टी इन चुनावों को पश्चिम बंगाल में मुख्य विपक्षी दल का दर्जा पुनः हासिल करने की दिशा में पहला कदम मान रही है। अकेले चुनाव लड़कर पार्टी अपनी वास्तविक ज़मीनी ताकत को परखना चाहती है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 घंटे पहले
  2. 2 महीने पहले
  3. 4 महीने पहले
  4. 4 महीने पहले
  5. 5 महीने पहले
  6. 5 महीने पहले
  7. 7 महीने पहले
  8. 7 महीने पहले