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क्या पश्चिम बंगाल में कांग्रेस के जिला नेता अकेले विधानसभा चुनाव लड़ने की योजना बना रहे हैं?

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क्या पश्चिम बंगाल में कांग्रेस के जिला नेता अकेले विधानसभा चुनाव लड़ने की योजना बना रहे हैं?

सारांश

पश्चिम बंगाल में कांग्रेस के जिला नेता 2026 के विधानसभा चुनाव में किसी भी पार्टी के साथ सीट बंटवारे के खिलाफ हैं। क्या वे अकेले लड़ने का मन बना चुके हैं? जानें इस महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम के बारे में।

मुख्य बातें

कांग्रेस के जिला नेता 2026 के चुनाव में अकेले लड़ने का समर्थन कर रहे हैं।
किसी भी पार्टी के साथ गठबंधन को नकारा गया है।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कांग्रेस के साथ कोई समझौता नहीं किया।
सीट बंटवारे का अंतिम निर्णय कांग्रेस की उच्च कमान पर है।
पार्टी में एकता की चुनौतियाँ बढ़ रही हैं।

कोलकाता, 14 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। पश्चिम बंगाल में कांग्रेस के अधिकांश जिला स्तर के नेता 2026 के विधानसभा चुनाव में किसी भी पार्टी के साथ सीट बंटवारे की योजना के खिलाफ हैं। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों ने बुधवार को यह जानकारी दी।

सूत्रों के अनुसार, पश्चिम बंगाल प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने हाल ही में जिला नेताओं से गठबंधन और सीट बंटवारे पर राय मांगी थी। अधिकांश नेताओं ने कहा कि पार्टी को कुछ सीटें जीतने के लिए सहयोगियों पर निर्भर रहने की बजाय, चुनाव अकेले ही लड़ना चाहिए।

जिला नेताओं से विशेष रूप से सीपीआई (एम) नेतृत्व वाले वाम मोर्चा, तृणमूल कांग्रेस, एआईएसएफ और निलंबित तृणमूल कांग्रेस विधायक हुमायूं कबीर की जनता उन्नयन पार्टी के साथ गठबंधन और सीट शेयरिंग पर राय मांगी गई थी।

सूत्रों ने कहा कि केवल दो जिलों के नेता ही वाम मोर्चा के साथ गठबंधन को जारी रखने के पक्ष में थे। किसी भी जिला नेता ने तृणमूल कांग्रेस के साथ किसी समझौते का समर्थन नहीं किया।

हालांकि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तृणमूल महासचिव अभिषेक बनर्जी पहले ही कांग्रेस के साथ किसी समझौते से इनकार कर चुके हैं। वहीं वाम मोर्चा के कुछ घटक दलों की आपत्तियों के बावजूद, सीपीआई (एम) नेतृत्व ने कांग्रेस के साथ सीट बंटवारे का विकल्प खुला रखा है।

महिला एवं बाल विकास समिति के एक अंदरूनी सूत्र ने बताया कि सीट बंटवारे पर अंतिम फैसला पार्टी की उच्च कमान या अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी करेगी। राज्य नेतृत्व ने केवल जिला स्तर पर प्रतिक्रिया एकत्र की है और अब इसे अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी को भेजा जाएगा।

राजनीतिक विश्लेषक कहते हैं कि 2026 के विधानसभा चुनाव में सुचारू सीट बंटवारे की योजना शुरू से ही कठिन लग रही थी। 2016 से वाम मोर्चा-कांग्रेस के समझौते के पीछे मुख्य नेता स्व. सीताराम येचुरी और अधीर रंजन चौधरी थे। येचुरी के निधन के बाद और अधीर रंजन की भूमिका सीमित होने के कारण अब गठबंधन की बातचीत अधर में लटक सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह स्पष्ट है कि कांग्रेस के जिला नेताओं की यह स्थिति पार्टी के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण है। एकतरफा चुनाव लड़ने की योजना से पार्टी की एकता और चुनावी रणनीति पर गहरा प्रभाव पड़ सकता है।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या कांग्रेस ने सीट बंटवारे की योजना बनाई है?
नहीं, अधिकांश जिला नेता सीट बंटवारे के खिलाफ हैं और अकेले लड़ने की इच्छा रखते हैं।
क्या तृणमूल कांग्रेस के साथ कोई समझौता हो रहा है?
नहीं, कांग्रेस के जिला नेताओं ने तृणमूल कांग्रेस के साथ किसी समझौते का समर्थन नहीं किया।
राष्ट्र प्रेस
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