मणिपुर-नागालैंड अशांति के लिए कांग्रेस जिम्मेदार, झारखंड में जेपीएससी पर सीबीआई जांच की मांग: निशिकांत दुबे
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद निशिकांत दुबे ने 10 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में मीडिया से बातचीत करते हुए मणिपुर और नागालैंड में जारी अशांति के लिए कांग्रेस पार्टी को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया। साथ ही उन्होंने झारखंड में जेपीएससी परीक्षा अनियमितताओं को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन पर सीबीआई जांच की मांग दोहराई।
मणिपुर-नागालैंड अशांति: ऐतिहासिक संदर्भ
दुबे ने कहा कि 11 अगस्त 1958 को तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने 'आर्म्ड फोर्सेस स्पेशल पावर्स एक्ट' (AFSPA) लागू किया था, जिससे हालात कुछ हद तक नियंत्रण में आए। उनके अनुसार, 10 अगस्त 1954 को नागा नेता फिजो ने नागा आर्मी का गठन किया था, जिसकी जड़ में नेहरू द्वारा बर्मा के यूएनयू के साथ किया गया सीमा समझौता था — जिसके कारण नागा भूमि विभाजित हो गई।
दुबे ने आगे कहा कि 1987 में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने बर्मा के साथ एक और सीमा समझौता किया, जिसके दूरगामी परिणाम आज मणिपुर और नागालैंड में अशांति के रूप में सामने हैं। मिजोरम की स्थिति पर भी उन्होंने सवाल उठाए। उनके मुताबिक, इन सभी समस्याओं की जड़ में नेहरू, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी की नीतियाँ हैं।
झारखंड जेपीएससी विवाद: सीबीआई जांच की मांग
झारखंड में जेपीएससी परीक्षा अनियमितताओं को लेकर छात्रों के विरोध-प्रदर्शन पर दुबे ने कहा कि भाजपा इस आंदोलन का पूर्ण समर्थन करती है। उन्होंने कहा कि जेपीएससी के सदस्य झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) से जुड़े हैं और कांग्रेस कार्यकर्ता हैं। उनके अनुसार, भाजपा के आरोपों के बाद कुछ पदाधिकारियों को इस्तीफा देना पड़ा, जो स्वयं में इस बात का प्रमाण है कि गड़बड़ी हुई।
दुबे ने सवाल उठाया, 'यदि भाजपा के आरोप निराधार थे, तो इस्तीफा क्यों हुआ?' उन्होंने कांग्रेस, जेएमएम और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) पर झारखंड के छात्रों के साथ अन्याय करने का आरोप लगाया।
झारखंड सरकार के मंत्रियों ने छात्र आंदोलन के पीछे भाजपा का हाथ होने का आरोप लगाया है। इस पर दुबे ने पलटवार करते हुए कहा कि जब जंतर-मंतर पर विरोध-प्रदर्शन हुआ था, तब भाजपा ने उसके पीछे कांग्रेस या आम आदमी पार्टी (AAP) को जिम्मेदार नहीं ठहराया था।
संसद में गतिरोध पर भाजपा सांसदों की प्रतिक्रिया
संसद में जारी गतिरोध को लेकर भाजपा सांसद जगदंबिका पाल ने विपक्ष पर जानबूझकर सदन की कार्यवाही बाधित करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पूरा देश देख रहा है कि विपक्ष किस तरह हंगामा कर रहा है। पाल ने कहा कि राहुल गांधी और अखिलेश यादव झारखंड के छात्रों के पास नहीं जा रहे, जबकि यहाँ सदन को चलने नहीं दिया जा रहा।
उन्होंने एफसीआरए, परिसीमन और महिला आरक्षण जैसे मुद्दों पर सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई और पूरे मानसून सत्र के बाधित होने के लिए राहुल गांधी को जिम्मेदार ठहराया। भाजपा सांसद दर्शन सिंह चौधरी ने भी विपक्ष के रवैये को अलोकतांत्रिक बताते हुए कहा कि जब गृह मंत्री अमित शाह जवाब देने के लिए तैयार हों, तो विपक्ष को उन्हें सुनने की इच्छाशक्ति दिखानी चाहिए।
आगे क्या
भाजपा ने जेपीएससी मामले में सीबीआई जांच की माँग पर अड़े रहने के संकेत दिए हैं। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब संसद का मानसून सत्र लगातार व्यवधान का शिकार हो रहा है। झारखंड में छात्र आंदोलन की दिशा और सरकार की प्रतिक्रिया आने वाले दिनों में राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण रहेगी।