दिल्ली पुलिस ज्यादती पर कांग्रेस का पलटवार: 'झारखंड का मुद्दा उठाकर 20 जुलाई की बर्बरता नहीं छुपा सकती सरकार'
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने मंगलवार, 11 अगस्त को नई दिल्ली में स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार झारखंड में छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई का मुद्दा उठाकर 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों पर हुई कथित पुलिस ज्यादती से जनता का ध्यान नहीं भटका सकती। यह बयान उस समय आया जब संसद भवन के मकर द्वार के बाहर एनडीए और विपक्षी सांसद एक-दूसरे के विरुद्ध आमने-सामने प्रदर्शन कर रहे थे।
मुख्य घटनाक्रम
संसद भवन के बाहर पत्रकारों से बात करते हुए केसी वेणुगोपाल ने कहा, 'जब भी दिल्ली में छात्रों पर हुए अत्याचार का गंभीर सवाल उठाया जाता है, तो वे यही जवाब देते हैं। छात्रों पर जहां भी हमला होता है, हम उसकी निंदा करते हैं। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी यही कहा था — लेकिन झारखंड का मुद्दा उठाकर आप दिल्ली में हुई ज्यादती से ध्यान नहीं भटका सकते।'
विपक्ष की मुख्य माँग थी कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सदन में उपस्थित होकर प्रदर्शनकारी छात्रों के विरुद्ध पुलिस कार्रवाई — विशेषकर पैलेट गन के इस्तेमाल — पर जवाब दें। वहीं, एनडीए ने विपक्ष पर संसद की कार्यवाही बाधित करने का आरोप लगाया।
राहुल गांधी की एक्स पोस्ट और उसका संदर्भ
वेणुगोपाल का यह बयान राहुल गांधी की सोमवार को सोशल मीडिया मंच एक्स पर की गई उस पोस्ट के परिप्रेक्ष्य में आया, जिसमें उन्होंने झारखंड में परीक्षा संबंधी कथित अनियमितताओं के विरुद्ध प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस बल प्रयोग को गलत ठहराया था। राहुल गांधी ने लिखा था, 'झारखंड में प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ बल प्रयोग गलत है। छात्रों को शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार है और केवल संवाद से ही समाधान निकल सकता है। झारखंड सरकार को छात्रों की बात सुननी चाहिए और उनकी समस्याओं का तुरंत समाधान करना चाहिए।'
अन्य विपक्षी नेताओं की प्रतिक्रिया
कांग्रेस सांसद अमर सिंह ने कहा, 'जहां भी लाठीचार्ज होगा, हम उसका विरोध और निंदा करेंगे। हमने इसकी निंदा की है, भले ही वहां हमारी सहयोगी सरकार हो। हम बल प्रयोग के पक्ष में नहीं हैं। बातचीत के जरिए समस्या का समाधान किया जाना चाहिए।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि यह भारतीय जनता पार्टी (BJP) नीत सरकारों जैसा नहीं है, जहाँ कथित तौर पर बिहार में गोली चलाई गई थी।
कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने भी स्पष्ट किया, 'जंतर-मंतर हो या झारखंड, छात्रों के खिलाफ किसी भी तरह के बल प्रयोग की हम निंदा करते हैं।'
सपा का रुख: समर्थन के साथ चेतावनी
समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद पुष्पेंद्र सरोज ने झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) नीत हेमंत सोरेन सरकार का समर्थन किया, लेकिन साथ ही आगाह किया कि 'जंतर-मंतर जैसी स्थिति नहीं बननी चाहिए।' उन्होंने कहा, 'वहां तीन इस्तीफे हो चुके हैं और अधिकारियों के साथ बातचीत का पहला दौर भी हो चुका है। झारखंड की कांग्रेस-झामुमो सरकार लगातार छात्रों के संपर्क में है।'
सरोज ने यह भी रेखांकित किया कि झारखंड में कथित परीक्षा अनियमितताओं की सीबीआई जाँच की छात्रों की माँग केवल केंद्र सरकार ही पूरी कर सकती है — जो इस विवाद को सीधे केंद्र की जवाबदेही से जोड़ता है।
आगे क्या होगा
गौरतलब है कि यह टकराव ऐसे समय में उभरा है जब संसद का मानसून सत्र पहले से ही हंगामेदार चल रहा है। विपक्ष की माँग है कि गृह मंत्री अमित शाह सदन में आकर 20 जुलाई की घटना पर जवाब दें। यदि यह माँग नहीं मानी गई, तो विपक्षी दलों द्वारा सदन की कार्यवाही को और बाधित करने की संभावना बनी हुई है।