केसी वेणुगोपाल ने जितेंद्र सिंह के खिलाफ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव पेश किया, संसद में 'झूठ बोलने' का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने शुक्रवार, 31 जुलाई 2026 को लोकसभा में केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव पेश किया। वेणुगोपाल का आरोप है कि 20 जुलाई को हुए 'संसद चलो' मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की कथित ज्यादतियों से जुड़े सवालों का जवाब देते हुए जितेंद्र सिंह ने सदन को गुमराह किया।
विशेषाधिकार प्रस्ताव की पृष्ठभूमि
यह विवाद लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पर निचले सदन में हुई बहस के दौरान उभरा। विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से 'संसद चलो' मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर सवाल किए थे। उन सवालों के जवाब में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने कथित तौर पर कहा कि प्रदर्शन के दौरान कोई गोलीबारी नहीं हुई।
वेणुगोपाल के आरोप और साक्ष्य
वेणुगोपाल ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, 'मैंने राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह के खिलाफ विशेषाधिकार प्रस्ताव पेश किया है। उन्होंने संसद में खुलेआम झूठ बोला और दावा किया कि हमारे छात्रों के शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के जवाब में कोई फायरिंग नहीं हुई।'
संसद भवन के बाहर मीडिया से बात करते हुए वेणुगोपाल ने कहा, 'विशेषाधिकार प्रस्ताव बिल्कुल साफ है। लोकसभा में जवाब देते हुए राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा था कि कोई गोलीबारी नहीं हुई, जबकि सोशल मीडिया पर तस्वीरें मौजूद थीं।' उन्होंने यह भी कहा कि 'हमारे नेता प्रतिपक्ष पहले ही एक लड़के को पैलेट गन से लगी चोटों के साफ सबूत पेश कर चुके हैं। कोई मंत्री सदन को इस तरह गुमराह कैसे कर सकता है?'
कांग्रेस नेता ने राहुल गांधी की उस प्रेस कॉन्फ्रेंस का भी हवाला दिया जिसमें लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने मीडिया के सामने पैलेट गन से घायल एक व्यक्ति से मुलाकात की थी। वेणुगोपाल के अनुसार, ऐसी फायरिंग के शिकार लोगों के अस्पताल के रिकॉर्ड भी सामने आए हैं।
राजनीतिक प्रतिक्रिया और पलटवार
वेणुगोपाल का यह कदम भारतीय जनता पार्टी (BJP) सांसद अनुराग ठाकुर द्वारा लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को राहुल गांधी के खिलाफ नोटिस सौंपने के ठीक एक दिन बाद आया है। ठाकुर का यह नोटिस 'पेपर लीक विरोधी बिल' पर बहस के दौरान राहुल गांधी की टिप्पणियों को लेकर था, जिसे लोकसभा की कार्यप्रणाली के नियम 222 और नियम 223 के तहत दाखिल किया गया था।
यह ऐसे समय में आया है जब संसद का मानसून सत्र विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच तीखी नोकझोंक का गवाह बन रहा है। गौरतलब है कि 'संसद चलो' मार्च के दौरान पुलिस कार्रवाई का मुद्दा पहले से ही संसद के भीतर और बाहर विवाद का केंद्र रहा है।
आगे क्या होगा
विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव को स्वीकार करने या अस्वीकार करने का अधिकार लोकसभा अध्यक्ष के पास है। यदि यह प्रस्ताव स्वीकार होता है, तो मामला विशेषाधिकार समिति के पास भेजा जा सकता है। दोनों पक्षों की ओर से संसदीय मोर्चे पर टकराव और तेज होने की संभावना है।