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चुनाव आयोग के दो आयुक्तों की लिखित असहमति उजागर करें: कांग्रेस नेता भाई जगताप की माँग

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चुनाव आयोग के दो आयुक्तों की लिखित असहमति उजागर करें: कांग्रेस नेता भाई जगताप की माँग

सारांश

कांग्रेस एमएलसी भाई जगताप ने आरोप लगाया है कि चुनाव आयोग के दो आयुक्तों ने बार-बार लिखित असहमति दर्ज कराई, जिसका रिकॉर्ड सार्वजनिक होना चाहिए। महाराष्ट्र में 75 लाख मतदाताओं की पहचान पर सवाल और SIR की राष्ट्रव्यापी समीक्षा की माँग ने चुनाव आयोग की स्वायत्तता पर नई बहस छेड़ दी है।

मुख्य बातें

कांग्रेस एमएलसी भाई जगताप ने 24 सितंबर 2026 को मुंबई में चुनाव आयोग के दो आयुक्तों द्वारा लिखित असहमति दर्ज कराने का आरोप लगाया।
महाराष्ट्र में करीब 75 लाख मतदाताओं की पहचान को लेकर सवाल, मुख्य निर्वाचन अधिकारी एस.
चोक्कलिंगम से भी मुलाकात हो चुकी है।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ फास्ट ट्रैक जाँच और छह महीने में कार्रवाई की माँग।
बिहार , पश्चिम बंगाल सहित सभी SIR-लागू राज्यों में चुनावी प्रक्रिया की समीक्षा की माँग।
2023 में चुनाव आयुक्तों को दिए गए कानूनी संरक्षण पर सवाल — जगताप ने कहा यह कानून 141 विपक्षी सांसदों के निलंबन के दौरान पारित हुआ।

कांग्रेस नेता और महाराष्ट्र विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) भाई जगताप ने 24 सितंबर 2026 को मुंबई में मीडिया से बात करते हुए चुनाव आयोग (ECI), विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया और केंद्र सरकार पर गंभीर सवाल उठाए। उनका आरोप है कि चुनाव आयोग के दो आयुक्तों ने कई अवसरों पर लिखित रूप से अपनी असहमति दर्ज कराई है, और इस पूरे घटनाक्रम का रिकॉर्ड सार्वजनिक किया जाना चाहिए।

चुनाव आयोग पर आरोप और पारदर्शिता की माँग

जगताप ने कहा कि 2023 में केंद्र की भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार एक ऐसा कानून लेकर आई जिसके तहत चुनाव आयुक्तों को विशेष कानूनी संरक्षण दिया गया। उनका सवाल है कि यह कानून उस समय क्यों पारित कराया गया, जब विपक्ष के 141 सांसदों को संसद से निलंबित किया हुआ था।

उन्होंने कहा, 'संविधान देश में सर्वोच्च है और कोई भी व्यक्ति — चाहे वह चुनाव आयुक्त हो, न्यायाधीश हो या प्रधानमंत्री — संविधान से ऊपर नहीं हो सकता।' उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जाँच की माँग भी की और कहा कि यह जाँच फास्ट ट्रैक आधार पर हो और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ छह महीने के भीतर कार्रवाई की जाए।

महाराष्ट्र SIR और मतदाता सूची विवाद

महाराष्ट्र में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर जगताप ने बताया कि कांग्रेस नेताओं ने राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी एस. चोक्कलिंगम से मुलाकात कर मतदाता सूची तथा फॉर्म-6, फॉर्म-7 और फॉर्म-8 से जुड़ी विसंगतियों पर विस्तृत चर्चा की थी।

उन्होंने दावा किया कि करीब 75 लाख मतदाताओं की पहचान को लेकर गंभीर सवाल हैं और इस संबंध में चुनाव आयोग को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। जगताप ने यह भी कहा कि SIR केवल महाराष्ट्र का मुद्दा नहीं है — उन्होंने बिहार, पश्चिम बंगाल और अन्य सभी राज्यों में हुई चुनावी प्रक्रिया की समीक्षा की माँग की जहाँ SIR लागू किया गया है।

कानूनी कार्रवाई और संवैधानिक प्रक्रिया की बात

जगताप ने स्पष्ट किया कि यदि चुनावी प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएँ साबित होती हैं, तो संबंधित चुनावों को लेकर उचित कानूनी और संवैधानिक प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए। यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब विपक्षी दल कई राज्यों में मतदाता सूची की विश्वसनीयता पर सवाल उठा रहे हैं।

अन्य मुद्दे: IIT बॉम्बे, राहुल गांधी और बिहार

IIT बॉम्बे में एक छात्र की मौत के मामले पर जगताप ने कहा कि घटना के सभी तथ्यों की निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए। उन्होंने संस्थानों में छात्रों के साथ कथित भेदभाव की भी जाँच की माँग की।

जगताप ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा का उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने करीब 6,000 किलोमीटर की यात्रा कर पेपर लीक, छात्र, महिला और आम नागरिकों से जुड़े मुद्दे उठाए थे। बिहार में नाबालिग लड़कियों से छेड़छाड़ की घटनाओं पर उन्होंने वहाँ के मुख्यमंत्री और मंत्रियों के बयानों पर आपत्ति जताई और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग की।

आगे क्या होगा

जगताप के इन आरोपों के बाद चुनाव आयोग की ओर से अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह देखना होगा कि क्या विपक्ष की यह माँग संसद या न्यायालय में औपचारिक रूप ले पाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन 'लिखित असहमति' का दावा इस बार विशिष्ट और सत्यापन-योग्य है — यदि ऐसे दस्तावेज़ वास्तव में मौजूद हैं, तो उनका सार्वजनिक होना चुनाव आयोग की आंतरिक कार्यप्रणाली पर दशकों में सबसे बड़ी पारदर्शिता की कसौटी बनेगा। 75 लाख मतदाताओं की पहचान पर सवाल और SIR की राष्ट्रव्यापी समीक्षा की माँग यह दर्शाती है कि विपक्ष अब राज्य-स्तरीय विवाद को राष्ट्रीय संस्थागत संकट की भाषा में फ्रेम कर रहा है। मुख्यधारा की कवरेज इन आरोपों को बयानबाज़ी की तरह रिपोर्ट करती है, जबकि असली परीक्षा यह है कि क्या चुनाव आयोग इन दस्तावेज़ों को रिकॉर्ड पर लाएगा या चुप्पी को ही जवाब बनाए रखेगा।
RashtraPress
25 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भाई जगताप का चुनाव आयोग पर क्या आरोप है?
कांग्रेस एमएलसी भाई जगताप का आरोप है कि चुनाव आयोग के दो आयुक्तों ने कई बार लिखित रूप में अपनी असहमति दर्ज कराई है। उनकी माँग है कि इस पूरे घटनाक्रम का रिकॉर्ड सार्वजनिक किया जाए ताकि आयोग की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।
महाराष्ट्र में SIR और 75 लाख मतदाताओं का मुद्दा क्या है?
कांग्रेस नेताओं ने राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी एस. चोक्कलिंगम से मुलाकात कर मतदाता सूची और फॉर्म-6, फॉर्म-7, फॉर्म-8 में विसंगतियाँ उठाई थीं। भाई जगताप के अनुसार करीब 75 लाख मतदाताओं की पहचान संदिग्ध है और चुनाव आयोग को इस पर सफाई देनी चाहिए।
ज्ञानेश कुमार के खिलाफ क्या माँग की गई है?
भाई जगताप ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ फास्ट ट्रैक जाँच की माँग की है। उनका कहना है कि दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ छह महीने के भीतर कार्रवाई होनी चाहिए।
2023 का चुनाव आयुक्त संरक्षण कानून विवादास्पद क्यों है?
जगताप का कहना है कि यह कानून उस समय पारित कराया गया जब विपक्ष के 141 सांसद निलंबित थे, जिससे इसकी लोकतांत्रिक वैधता पर सवाल उठता है। उनका तर्क है कि संविधान सर्वोच्च है और कोई भी संवैधानिक पदाधिकारी उसके दायरे से बाहर नहीं जा सकता।
क्या SIR केवल महाराष्ट्र तक सीमित है?
नहीं। भाई जगताप ने बिहार, पश्चिम बंगाल और उन सभी राज्यों में SIR प्रक्रिया की समीक्षा की माँग की है जहाँ यह लागू किया गया। उनका कहना है कि यह राष्ट्रीय स्तर पर चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता का सवाल है।
राष्ट्र प्रेस
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