महाराष्ट्र एसआईआर: एमवीए ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी को सौंपा 36 सूत्री ज्ञापन, पारदर्शिता की मांग

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महाराष्ट्र एसआईआर: एमवीए ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी को सौंपा 36 सूत्री ज्ञापन, पारदर्शिता की मांग

सारांश

एमवीए का 36 सूत्री ज्ञापन महज औपचारिकता नहीं — यह मतदाता सूची की विश्वसनीयता पर सीधा सवाल है। 3.5 करोड़ की वृद्धि वाले महाराष्ट्र में एसआईआर की जल्दबाजी पर विपक्ष की चेतावनी: बिना पारदर्शिता के लोकतंत्र की नींव कमज़ोर होगी।

मुख्य बातें

एमवीए के प्रतिनिधिमंडल ने 20 मई 2025 को महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी एस.
चोकलिंगम से मुलाकात की।
विपक्षी गठबंधन ने 36 बिंदुओं का ज्ञापन सौंपकर एसआईआर में पारदर्शिता की माँग की।
माँग: नाम हटाने से कम से कम 7 दिन पहले औपचारिक सूचना दी जाए।
पिछले 25 वर्षों में महाराष्ट्र में मतदाताओं की संख्या में 3.5 करोड़ की वृद्धि हुई है।
एमवीए ने सुझाया कि एसआईआर प्रक्रिया डेढ़ से दो वर्षों में पूरी की जाए, क्योंकि अगले 2-3 वर्षों में कोई बड़ा चुनाव नहीं है।
आँकड़े सॉफ्ट कॉपी, OCR और हार्ड कॉपी में साझा करने और 5 वर्षों तक संरक्षित रखने की माँग।

महा विकास अघाड़ी (एमवीए) के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार, 20 मई 2026 को मुंबई में महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी एस. चोकलिंगम से मुलाकात की और राज्य में प्रस्तावित विशेष गहन मतदाता सूची संशोधन (एसआईआर) की प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करने की माँग की। विपक्षी गठबंधन ने 36 बिंदुओं का एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा, जिसमें यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया कि किसी भी वास्तविक मतदाता को उनके मताधिकार से वंचित न किया जाए।

प्रतिनिधिमंडल में कौन-कौन शामिल थे

एमवीए के इस शिष्टमंडल में राज्य कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल, कांग्रेस विधायक दल के नेता विजय वडेट्टीवार, शिवसेना (यूबीटी) के नेता आदित्य ठाकरे और अंबदास दानवे, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) के राज्य अध्यक्ष शशिकांत शिंदे तथा पूर्व विधायक सुनील भुसारा शामिल थे। यह प्रतिनिधिमंडल एमवीए की साझा चिंताओं को लेकर निर्वाचन अधिकारी के समक्ष उपस्थित हुआ।

ज्ञापन की मुख्य माँगें

विपक्षी गठबंधन ने माँग की कि बूथ स्तर पर चलाए जा रहे इस अभियान को पूरी तरह निष्पक्ष और भेदभाव-रहित तरीके से संचालित किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी मतदाता का नाम सूची से हटाने से कम से कम सात दिन पहले औपचारिक सूचना दी जाए, ताकि संबंधित व्यक्ति को अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर मिल सके।

प्रतिनिधिमंडल ने यह भी अनुरोध किया कि एसआईआर के संपूर्ण आँकड़े राजनीतिक दलों के साथ सॉफ्ट कॉपी, ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकग्निशन (OCR) और हार्ड कॉपी — तीनों प्रारूपों में साझा किए जाएँ। साथ ही, इन आँकड़ों को कम से कम पाँच वर्षों तक मतदाता पंजीकरण अधिकारी और जिला निर्वाचन अधिकारी स्तर पर संरक्षित रखा जाए।

अन्य राज्यों का हवाला और ऐतिहासिक संदर्भ

एमवीए ने अन्य राज्यों में अतीत में हुई उन घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त की, जहाँ कथित तौर पर विशिष्ट समुदायों के मतदाताओं को मतदान प्रक्रिया से बाहर रखा गया था। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में मतदाता सूची की सटीकता को लेकर बहस तेज हो रही है। गठबंधन ने यह भी रेखांकित किया कि पिछले 25 वर्षों में महाराष्ट्र में मतदाताओं की संख्या में 3.5 करोड़ की वृद्धि हुई है, इसलिए इस संशोधन प्रक्रिया में जल्दबाजी उचित नहीं होगी।

समयसीमा पर सुझाव

चूँकि अगले दो से तीन वर्षों तक राज्य में कोई बड़ा चुनाव निर्धारित नहीं है, एमवीए ने सुझाव दिया कि एसआईआर की पूरी प्रक्रिया को डेढ़ से दो वर्षों में सुरक्षित और सुव्यवस्थित तरीके से पूरा किया जा सकता है। उनका तर्क था कि समय की उपलब्धता का लाभ उठाकर प्रक्रिया को अधिक विश्वसनीय बनाया जाना चाहिए।

आगे क्या होगा

मुख्य निर्वाचन अधिकारी एस. चोकलिंगम ने प्रतिनिधिमंडल का ज्ञापन स्वीकार किया। अब देखना यह होगा कि निर्वाचन आयोग एमवीए की इन माँगों पर क्या रुख अपनाता है और एसआईआर की प्रक्रिया में किस हद तक पारदर्शिता सुनिश्चित की जाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसमें लोकतांत्रिक जवाबदेही की असली चिंता भी निहित है। 3.5 करोड़ नए मतदाताओं वाले राज्य में जल्दबाजी में की गई सूची-सफाई के परिणाम गंभीर हो सकते हैं। निर्वाचन आयोग के लिए यह अवसर है कि वह पारदर्शी प्रक्रिया अपनाकर संस्थागत विश्वसनीयता को मजबूत करे।
RashtraPress
21 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विशेष गहन मतदाता सूची संशोधन (एसआईआर) क्या है?
एसआईआर एक चुनाव आयोग की प्रक्रिया है जिसमें बूथ स्तर पर जाकर मतदाता सूची की जाँच और अद्यतन किया जाता है — नए नाम जोड़े जाते हैं और अपात्र या मृत मतदाताओं के नाम हटाए जाते हैं। महाराष्ट्र में इस प्रक्रिया को लेकर एमवीए ने पारदर्शिता की माँग उठाई है।
एमवीए ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी से क्या माँगें रखीं?
एमवीए ने 36 बिंदुओं के ज्ञापन में माँग की कि नाम हटाने से कम से कम 7 दिन पहले सूचना दी जाए, आँकड़े सॉफ्ट कॉपी और हार्ड कॉपी में साझा किए जाएँ, और पूरी प्रक्रिया बिना किसी भेदभाव के संचालित हो।
एमवीए ने एसआईआर की समयसीमा पर क्या सुझाव दिया?
एमवीए ने कहा कि चूँकि अगले 2-3 वर्षों में राज्य में कोई बड़ा चुनाव नहीं है, इसलिए एसआईआर को डेढ़ से दो वर्षों में सुव्यवस्थित तरीके से पूरा किया जाए ताकि किसी वास्तविक मतदाता का नाम गलती से न हटे।
महाराष्ट्र में मतदाताओं की संख्या कितनी बढ़ी है?
एमवीए के अनुसार, पिछले 25 वर्षों में महाराष्ट्र में मतदाताओं की संख्या में 3.5 करोड़ की वृद्धि हुई है। इस बड़े आधार को देखते हुए गठबंधन ने एसआईआर में सावधानी और पर्याप्त समय देने की अपील की।
एमवीए के प्रतिनिधिमंडल में कौन-कौन से नेता शामिल थे?
प्रतिनिधिमंडल में राज्य कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल, कांग्रेस विधायक दल के नेता विजय वडेट्टीवार, शिवसेना (यूबीटी) के आदित्य ठाकरे और अंबदास दानवे, एनसीपी (एसपी) के राज्य अध्यक्ष शशिकांत शिंदे तथा पूर्व विधायक सुनील भुसारा शामिल थे।
राष्ट्र प्रेस
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