महाराष्ट्र एसआईआर: एमवीए ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी को सौंपा 36 सूत्री ज्ञापन, पारदर्शिता की मांग
सारांश
मुख्य बातें
महा विकास अघाड़ी (एमवीए) के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार, 20 मई 2026 को मुंबई में महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी एस. चोकलिंगम से मुलाकात की और राज्य में प्रस्तावित विशेष गहन मतदाता सूची संशोधन (एसआईआर) की प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करने की माँग की। विपक्षी गठबंधन ने 36 बिंदुओं का एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा, जिसमें यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया कि किसी भी वास्तविक मतदाता को उनके मताधिकार से वंचित न किया जाए।
प्रतिनिधिमंडल में कौन-कौन शामिल थे
एमवीए के इस शिष्टमंडल में राज्य कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल, कांग्रेस विधायक दल के नेता विजय वडेट्टीवार, शिवसेना (यूबीटी) के नेता आदित्य ठाकरे और अंबदास दानवे, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) के राज्य अध्यक्ष शशिकांत शिंदे तथा पूर्व विधायक सुनील भुसारा शामिल थे। यह प्रतिनिधिमंडल एमवीए की साझा चिंताओं को लेकर निर्वाचन अधिकारी के समक्ष उपस्थित हुआ।
ज्ञापन की मुख्य माँगें
विपक्षी गठबंधन ने माँग की कि बूथ स्तर पर चलाए जा रहे इस अभियान को पूरी तरह निष्पक्ष और भेदभाव-रहित तरीके से संचालित किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी मतदाता का नाम सूची से हटाने से कम से कम सात दिन पहले औपचारिक सूचना दी जाए, ताकि संबंधित व्यक्ति को अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर मिल सके।
प्रतिनिधिमंडल ने यह भी अनुरोध किया कि एसआईआर के संपूर्ण आँकड़े राजनीतिक दलों के साथ सॉफ्ट कॉपी, ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकग्निशन (OCR) और हार्ड कॉपी — तीनों प्रारूपों में साझा किए जाएँ। साथ ही, इन आँकड़ों को कम से कम पाँच वर्षों तक मतदाता पंजीकरण अधिकारी और जिला निर्वाचन अधिकारी स्तर पर संरक्षित रखा जाए।
अन्य राज्यों का हवाला और ऐतिहासिक संदर्भ
एमवीए ने अन्य राज्यों में अतीत में हुई उन घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त की, जहाँ कथित तौर पर विशिष्ट समुदायों के मतदाताओं को मतदान प्रक्रिया से बाहर रखा गया था। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में मतदाता सूची की सटीकता को लेकर बहस तेज हो रही है। गठबंधन ने यह भी रेखांकित किया कि पिछले 25 वर्षों में महाराष्ट्र में मतदाताओं की संख्या में 3.5 करोड़ की वृद्धि हुई है, इसलिए इस संशोधन प्रक्रिया में जल्दबाजी उचित नहीं होगी।
समयसीमा पर सुझाव
चूँकि अगले दो से तीन वर्षों तक राज्य में कोई बड़ा चुनाव निर्धारित नहीं है, एमवीए ने सुझाव दिया कि एसआईआर की पूरी प्रक्रिया को डेढ़ से दो वर्षों में सुरक्षित और सुव्यवस्थित तरीके से पूरा किया जा सकता है। उनका तर्क था कि समय की उपलब्धता का लाभ उठाकर प्रक्रिया को अधिक विश्वसनीय बनाया जाना चाहिए।
आगे क्या होगा
मुख्य निर्वाचन अधिकारी एस. चोकलिंगम ने प्रतिनिधिमंडल का ज्ञापन स्वीकार किया। अब देखना यह होगा कि निर्वाचन आयोग एमवीए की इन माँगों पर क्या रुख अपनाता है और एसआईआर की प्रक्रिया में किस हद तक पारदर्शिता सुनिश्चित की जाती है।