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महाराष्ट्र में 7.9 लाख मतदाताओं का अंतर: आदित्य ठाकरे का चुनाव आयोग पर बड़ा हमला, CEC के इस्तीफे की माँग

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महाराष्ट्र में 7.9 लाख मतदाताओं का अंतर: आदित्य ठाकरे का चुनाव आयोग पर बड़ा हमला, CEC के इस्तीफे की माँग

सारांश

शिवसेना (यूबीटी) नेता आदित्य ठाकरे ने महाराष्ट्र की मतदाता सूचियों में 7.9 लाख मतदाताओं के अंतर का आरोप लगाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग की। भिवंडी और माहीम में कथित गड़बड़ियाँ गिनाईं। यह विवाद देशव्यापी विपक्षी प्रदर्शनों के बीच उभरा है।

मुख्य बातें

आदित्य ठाकरे ने 9 अक्टूबर 2026 को दावा किया कि महाराष्ट्र की मतदाता सूचियों में 7.9 लाख मतदाताओं का अंतर है।
उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग के मई और अगस्त के आँकड़ों में भारी असमानता है, जिससे 5 लाख मतदाता कथित रूप से 'गायब' हुए।
भिवंडी और माहीम विधानसभा क्षेत्रों में SIR प्रक्रिया से जुड़ी अनियमितताओं के विशेष आरोप लगाए गए।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग की गई; चुनाव आयोग की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं।
नई दिल्ली में विपक्षी प्रदर्शनों के बीच अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात; गोवा और राजस्थान से आ रहे प्रदर्शनकारियों को कथित तौर पर हिरासत में लिया गया।
पुणे में MPSC उम्मीदवारों ने अलग प्रदर्शन किया; ठाकरे ने पेपर लीक मामलों में कार्रवाई न होने पर महाराष्ट्र सरकार पर सवाल उठाए।

शिवसेना (यूबीटी) नेता आदित्य ठाकरे ने शुक्रवार, 9 अक्टूबर 2026 को मुंबई में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में चुनाव आयोग (ECI) पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि महाराष्ट्र में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूचियों में 7.9 लाख मतदाताओं का अंतर सामने आया है। ठाकरे ने इसे 'हेराफेरी' करार देते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के तत्काल इस्तीफे की माँग दोहराई।

मुख्य आरोप: आँकड़ों में विसंगति

ठाकरे ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने मई में एक मतदाता आँकड़ा जारी किया और अगस्त में उससे बिल्कुल भिन्न आँकड़ा प्रकाशित कर दिया। उनके अनुसार, इस अंतर के कारण महाराष्ट्र में 5 लाख मतदाता कथित तौर पर अचानक 'गायब' हो गए। उन्होंने कहा, 'मुख्य चुनाव आयुक्त को बताना चाहिए कि ये मतदाता कहाँ गए और राज्य में अचानक पाँच लाख मतदाताओं के गायब होने पर जवाब देना चाहिए।'

यह ऐसे समय में सामने आया है जब देशभर में विपक्षी दलों ने SIR प्रक्रिया को लेकर नई दिल्ली में समन्वित प्रदर्शन किया। ठाकरे ने स्पष्ट किया कि वे इस आंदोलन में विपक्ष के साथ हैं।

विशेष विधानसभा क्षेत्रों में कथित अनियमितताएँ

ठाकरे ने भिवंडी विधानसभा क्षेत्र का विशेष उल्लेख करते हुए दावा किया कि वहाँ मतदाता रिकॉर्ड SIR प्रक्रिया से जुड़े आँकड़ों से मेल नहीं खाते। माहीम विधानसभा क्षेत्र के संदर्भ में उन्होंने कहा कि वर्ष 2002 से लगातार मतदान करने वाले नागरिकों को भी नोटिस भेजे जा रहे हैं, जिनके नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची में दर्ज हैं।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ क्षेत्रों में बूथ लेवल अधिकारी (BLO) घर-घर जाकर सत्यापन नहीं कर रहे, बल्कि लोगों को फोन पर दस्तावेज पूरे करने के निर्देश दे रहे हैं — जो निर्धारित प्रक्रिया का उल्लंघन बताया जा रहा है।

दिल्ली में प्रदर्शन और सुरक्षा व्यवस्था

इन आरोपों के बीच नई दिल्ली में कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की माँग को लेकर प्रदर्शन किया। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए राजधानी में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए और कई स्थानों पर निषेधाज्ञा लागू की गई। ठाकरे ने आरोप लगाया कि गोवा और राजस्थान से प्रदर्शन में शामिल होने आ रहे युवाओं को रास्ते में हिरासत में लिया गया।

ठाकरे ने इस स्थिति को 'अघोषित आपातकाल' करार देते हुए कहा कि लोगों को हिरासत में लिया जा रहा है और नोटिस भेजे जा रहे हैं। उन्होंने शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत के इस आंदोलन में भाग लेने की भी पुष्टि की।

महाराष्ट्र में MPSC परीक्षार्थियों का प्रदर्शन

पुणे में महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) के उम्मीदवारों ने अलग से प्रदर्शन किया। ठाकरे ने इस संदर्भ में महाराष्ट्र सरकार की आलोचना करते हुए पेपर लीक मामलों में कुछ अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई न होने पर सवाल उठाए। गौरतलब है कि MPSC परीक्षा विवाद पिछले कई महीनों से महाराष्ट्र में राजनीतिक तनाव का केंद्र बना हुआ है।

आगे का रुख और कानूनी लड़ाई

ठाकरे ने 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले मौजूदा सरकार को कई चुनौतियों का सामना करने की भविष्यवाणी करते हुए कहा कि मतदाता सूची का मुद्दा सार्वजनिक मंच पर और अधिक उठाया जाएगा। उन्होंने शिवसेना के नाम और चुनाव चिह्न से जुड़े चल रहे कानूनी विवाद का भी उल्लेख किया और उम्मीद जताई कि इस मामले में न्यायपालिका से निष्पक्ष निर्णय आएगा। फिलहाल चुनाव आयोग की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसे केवल आदित्य ठाकरे की प्रेस कॉन्फ्रेंस के आधार पर तथ्य मानना जल्दबाजी होगी — चुनाव आयोग ने अभी खंडन या स्पष्टीकरण नहीं दिया है। असली मुद्दा यह है कि SIR जैसी तकनीकी प्रक्रिया, जो मतदाता सूची को साफ करने के लिए बनाई गई है, अगर वाकई दो अलग-अलग आँकड़े जारी करती है तो पारदर्शिता की माँग जायज है। यह पहली बार नहीं है जब मतदाता सूची को लेकर विपक्ष और सत्तापक्ष आमने-सामने आए हों — लेकिन इस बार विरोध की राष्ट्रव्यापी समन्वित प्रकृति और दिल्ली में सुरक्षा तैनाती यह दर्शाती है कि दाँव पहले से ऊँचे हैं।
RashtraPress
10 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आदित्य ठाकरे का 7.9 लाख मतदाताओं का अंतर वाला दावा क्या है?
शिवसेना (यूबीटी) नेता आदित्य ठाकरे ने आरोप लगाया है कि चुनाव आयोग द्वारा मई और अगस्त में जारी महाराष्ट्र के मतदाता आँकड़ों में 7.9 लाख का अंतर है, जिससे कथित तौर पर 5 लाख मतदाता 'गायब' हो गए। उन्होंने इसे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया में बड़ी हेराफेरी बताया है।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग क्यों हो रही है?
आदित्य ठाकरे समेत कई विपक्षी नेताओं का आरोप है कि SIR प्रक्रिया में गड़बड़ियाँ मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की देखरेख में हुई हैं। उनका कहना है कि मतदाता सूचियों में बड़े पैमाने पर विसंगतियों के लिए शीर्ष अधिकारी को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।
भिवंडी और माहीम में क्या कथित अनियमितताएँ बताई गई हैं?
ठाकरे के अनुसार, भिवंडी विधानसभा क्षेत्र में मतदाता रिकॉर्ड SIR के आँकड़ों से मेल नहीं खाते। माहीम में वर्ष 2002 से लगातार वोट देने वाले नागरिकों को भी मतदाता सूची में नाम होने के बावजूद नोटिस भेजे जा रहे हैं।
दिल्ली में विपक्षी प्रदर्शन और सुरक्षा तैनाती का क्या मामला है?
9 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की माँग को लेकर प्रदर्शन किया। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त सुरक्षाबल तैनात किए गए और कुछ स्थानों पर प्रतिबंध लगाए गए। ठाकरे ने आरोप लगाया कि गोवा और राजस्थान से आ रहे प्रदर्शनकारी युवाओं को रास्ते में हिरासत में लिया गया।
SIR (विशेष गहन पुनरीक्षण) प्रक्रिया क्या होती है?
विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूचियों को अद्यतन और शुद्ध करने की एक प्रक्रिया है, जिसमें बूथ लेवल अधिकारी (BLO) घर-घर जाकर सत्यापन करते हैं। विपक्ष का आरोप है कि इस बार यह प्रक्रिया ठीक से नहीं की गई और कुछ BLO घर जाने की बजाय फोन पर ही काम चला रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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