23 सितंबर 2026
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उद्धव ठाकरे की मांग: सीईसी ज्ञानेश कुमार को तुरंत जेल भेजो, महाराष्ट्र-तमिलनाडु-बंगाल में फिर से चुनाव हो

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उद्धव ठाकरे की मांग: सीईसी ज्ञानेश कुमार को तुरंत जेल भेजो, महाराष्ट्र-तमिलनाडु-बंगाल में फिर से चुनाव हो

सारांश

शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने सीईसी ज्ञानेश कुमार की तत्काल गिरफ्तारी माँगी और महाराष्ट्र सहित तीन राज्यों में नए चुनाव की माँग की। यह माँग तब आई जब चुनाव आयोग के भीतर दो आयुक्तों ने ही सीईसी के एकतरफा फैसलों के खिलाफ आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई।

मुख्य बातें

उद्धव ठाकरे ने 23 सितंबर 2026 को मुंबई में सीईसी ज्ञानेश कुमार की तत्काल गिरफ्तारी और महाराष्ट्र, तमिलनाडु व पश्चिम बंगाल में दोबारा चुनाव की माँग की।
चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने कैबिनेट सचिव टीवी सोमनाथन को शिकायत दी कि सीईसी एकतरफा फैसले ले रहे थे।
ठाकरे ने महाराष्ट्र चुनावों में मतदाता सूची में 45 लाख से अधिक नाम अवैध रूप से जोड़ने और बाद में 40 लाख नामों को हटाने का आरोप लगाया।
उन्होंने भाजपा के वरिष्ठ नेता एलके आडवाणी का नाम मतदाता सूची से गायब होने का भी उल्लेख किया।
चुनाव आयोग पर केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देश पर काम करने का आरोप; गृह मंत्री अमित शाह की संलिप्तता की निष्पक्ष जाँच की माँग।
नए चुनाव ईवीएम की जगह पूरी तरह बैलेट पेपर से कराने की माँग।

शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने 23 सितंबर 2026 को मुंबई में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार की तत्काल गिरफ्तारी की माँग की और महाराष्ट्र, तमिलनाडु तथा पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों को रद्द कर नए सिरे से मतदान कराने का आह्वान किया। यह तीखी प्रतिक्रिया उस मीडिया रिपोर्ट के बाद आई जिसमें तीन सदस्यीय चुनाव पैनल के भीतर गहरी अंदरूनी कलह का खुलासा हुआ था।

अंदरूनी कलह का पर्दाफाश

रिपोर्टों के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने कैबिनेट सचिव टीवी सोमनाथन को औपचारिक शिकायत सौंपी। इस शिकायत में आरोप लगाया गया कि सीईसी ज्ञानेश कुमार मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) और इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) से जुड़े फैसले दोनों आयुक्तों से परामर्श किए बिना एकतरफा तरीके से ले रहे थे।

ठाकरे ने इस घटनाक्रम को अपने आरोपों की पुष्टि बताते हुए कहा कि विवेक जोशी और सुखबीर सिंह संधू द्वारा अंदरूनी तौर पर मामला उजागर करने से स्पष्ट होता है कि यह प्रशासन कितना मनमाना था। उन्होंने हिम्मत दिखाने के लिए दोनों आयुक्तों की सराहना की।

ठाकरे के मुख्य आरोप

महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री ने राज्य में मतदाता सूची के साथ बड़े पैमाने पर हेरफेर का दावा किया। उनके अनुसार, महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों के दौरान मतदाता सूची में 45 लाख से अधिक नाम मनमाने ढंग से जोड़े गए, जबकि बाद की एसआईआर प्रक्रिया में 40 लाख नामों को संदिग्ध बताया गया या हटाने के लिए चिह्नित किया गया।

उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता एलके आडवाणी का नाम तक मतदाता सूची से गायब कर दिया गया — और सवाल उठाया कि क्या उस शख्स के साथ भी ऐसा ही व्यवहार किया जाता है जिसने खुद उन्हें सत्ता में लाया।

पार्टियों को निशाना बनाने का पैटर्न

ठाकरे ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने सबसे पहले उनकी पार्टी को निशाना बनाया — एक अहम उपचुनाव के दौरान पार्टी का असली नाम और चुनाव चिह्न फ्रीज कर दिया गया और फिर कथित तौर पर बागी गुट को सौंप दिया गया। उन्होंने कहा कि इसके बाद शरद पवार की नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (NCP) के साथ भी यही प्रक्रिया दोहराई गई और अब पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के खिलाफ भी यही रणनीति अपनाई जा रही है।

यह ऐसे समय में आया है जब विपक्षी दल ईवीएम की विश्वसनीयता और चुनाव आयोग की स्वायत्तता को लेकर पहले से ही सवाल उठाते रहे हैं। गौरतलब है कि यह कोई पहला मौका नहीं है जब चुनाव आयोग के कामकाज पर इस तरह के संगठित राजनीतिक हमले हुए हों, लेकिन आयोग के भीतर से ही शिकायत का सार्वजनिक होना इस विवाद को एक नई गंभीरता देता है।

गृह मंत्रालय पर सवाल और चेतावनी

उद्धव ठाकरे ने माँग की कि एक निष्पक्ष जाँच हो जिसमें यह पता लगाया जाए कि क्या चुनाव आयोग केंद्रीय गृह मंत्रालय से सीधे आदेश ले रहा था। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा है तो देश को यह जानने का हक है कि क्या केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह खुद इन गतिविधियों को निर्देशित कर रहे हैं।

उन्होंने चेतावनी दी कि अगर लोकतांत्रिक संस्थाओं के साथ इसी तरह समझौता होता रहा तो नागरिकों को विरोध में सड़कों पर उतरना पड़ेगा। साथ ही उन्होंने माँग की कि नए चुनाव ईवीएम के बजाय पूरी तरह भौतिक बैलेट पेपर के माध्यम से कराए जाएँ।

आगे क्या होगा

चुनाव आयोग की ओर से अब तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने भी इस विशेष प्रेस कॉन्फ्रेंस पर तत्काल प्रतिक्रिया नहीं दी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम संसदीय सत्र में और संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता पर बहस को नई धार देने वाला है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इस बार उनके पास आंतरिक साक्ष्य का हवाला देने का अवसर है जो उनकी माँगों को राजनीतिक एजेंडे से परे संवैधानिक चिंता का रूप देता है। असली प्रश्न यह है कि क्या इन शिकायतों की कोई स्वतंत्र न्यायिक या संसदीय जाँच होगी — या यह भी उन विवादों की सूची में जुड़ जाएगा जो शोर मचाकर दब जाते हैं। संस्थागत विश्वसनीयता की यह लड़ाई केवल उद्धव ठाकरे की नहीं, पूरे चुनावी लोकतंत्र की है।
RashtraPress
23 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उद्धव ठाकरे ने सीईसी ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी की माँग क्यों की?
उद्धव ठाकरे ने सीईसी ज्ञानेश कुमार पर केंद्र सरकार के इशारे पर लोकतंत्र को कमजोर करने, राजनीतिक दलों में फूट डालने और एकतरफा फैसले लेने का आरोप लगाया। यह माँग उस रिपोर्ट के बाद आई जिसमें दो चुनाव आयुक्तों ने सीईसी के कामकाज को लेकर आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई थी।
चुनाव आयोग के भीतर अंदरूनी कलह का मामला क्या है?
रिपोर्टों के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने कैबिनेट सचिव टीवी सोमनाथन को शिकायत दी कि सीईसी ज्ञानेश कुमार एसआईआर और ईवीएम से जुड़े निर्णय उनसे परामर्श किए बिना एकतरफा ले रहे थे। यह तीन सदस्यीय पैनल में बहुमत के विरोध की असामान्य स्थिति है।
ठाकरे ने महाराष्ट्र मतदाता सूची को लेकर क्या आरोप लगाए?
ठाकरे ने दावा किया कि महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों के दौरान मतदाता सूची में 45 लाख से अधिक नाम मनमाने ढंग से जोड़े गए, जबकि बाद की एसआईआर प्रक्रिया में 40 लाख नामों पर सवाल उठाए गए या उन्हें हटाने के लिए चिह्नित किया गया। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया के साथ खिलवाड़ बताया।
ठाकरे ने किन राज्यों में दोबारा चुनाव की माँग की और क्यों?
उद्धव ठाकरे ने महाराष्ट्र, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव रद्द कर नए सिरे से मतदान की माँग की। उनका तर्क है कि चुनाव आयोग के पक्षपातपूर्ण कामकाज ने इन चुनावों की निष्पक्षता को संदिग्ध बना दिया है।
क्या चुनाव आयोग या भाजपा ने इन आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया दी?
इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद चुनाव आयोग की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने भी इन विशेष आरोपों पर तत्काल कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी।
राष्ट्र प्रेस
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