8 नवंबर 2026
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आडवाणी के जन्मदिन पर PM मोदी का लेख: '1991 में गांधीनगर से चुनाव लड़ना घर वापसी जैसा था'

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आडवाणी के जन्मदिन पर PM मोदी का लेख: '1991 में गांधीनगर से चुनाव लड़ना घर वापसी जैसा था'

सारांश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत रत्न लालकृष्ण आडवाणी के जन्मदिन पर एक भावपूर्ण लेख लिखकर 1991 के गांधीनगर चुनाव की यादें ताज़ा कीं — जब वे खुद BJP संगठनकर्ता के रूप में आडवाणी जी का नामांकन भरते थे और बाद में उन्हें वोट भी देते थे।

मुख्य बातें

PM नरेंद्र मोदी ने 8 नवंबर 2026 को पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी के जन्मदिन पर विशेष लेख लिखा।
मोदी ने 1991 के लोकसभा चुनाव में गांधीनगर से आडवाणी जी के नामांकन और पूरे चुनाव अभियान में साथ काम करने की याद साझा की।
आडवाणी जी का गुजरात से पुराना नाता — विभाजन के बाद पिताजी कच्छ में बसे; 1976 में गुजरात से राज्यसभा सांसद बने।
मोदी ने आडवाणी जी की पुस्तक 'ए प्रिजनर्स स्क्रैप बुक' और उसके अध्याय 'ए टेल ऑफ टू इमरजेंसीज' का उल्लेख किया, जिसमें 1975 के भारतीय आपातकाल और 1933 के हिटलर-शासन की समानताएँ वर्णित हैं।
प्रधानमंत्री ने गांधीनगर मतदाता के रूप में स्वयं आडवाणी जी को अनेक बार वोट देने को 'सौभाग्य' बताया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 नवंबर 2026 को पूर्व उप प्रधानमंत्री एवं 'भारत रत्न' लालकृष्ण आडवाणी के जन्मदिन पर उन्हें शुभकामनाएँ देते हुए एक विशेष लेख लिखा, जिसमें उन्होंने 1991 के लोकसभा चुनाव और गांधीनगर से जुड़ी व्यक्तिगत स्मृतियाँ साझा कीं। इस लेख का शीर्षक है — 'आडवाणी जी: एक शताब्दी की ओर बढ़ती प्रेरणादायी यात्रा'।

गांधीनगर और आडवाणी जी का पुराना रिश्ता

मोदी ने अपने लेख में लिखा, '1991 के लोकसभा चुनाव की स्मृतियाँ आज भी मेरे मन में ताज़ा हैं। उस समय तय हुआ था कि आडवाणी जी दो लोकसभा सीटों से चुनाव लड़ेंगे, जिनमें से एक सीट गांधीनगर की थी।' उन्होंने बताया कि आडवाणी जी का गुजरात से गहरा नाता रहा है — विभाजन के बाद उनके पिताजी कच्छ में आकर बसे थे। इसके अलावा, 1976 में जब देश में आपातकाल अपने चरम पर था, तब आडवाणी जी गुजरात से राज्यसभा सांसद भी बने थे। इन सब कारणों से मोदी ने लिखा कि 1991 में गांधीनगर से चुनाव लड़ना आडवाणी जी के लिए 'एक तरह से घर वापसी जैसा था।'

नामांकन से लेकर चुनाव प्रचार तक मोदी की भूमिका

प्रधानमंत्री ने बताया कि उस समय वे भारतीय जनता पार्टी (BJP) के संगठन में कार्यरत थे और उन्हें आडवाणी जी के नामांकन पत्र तैयार करने से लेकर पूरे चुनाव अभियान में उनके साथ काम करने का अवसर मिला। मोदी ने लिखा कि गांधीनगर की जनता ने बार-बार बड़े बहुमत से आडवाणी जी को संसद भेजा। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि गांधीनगर लोकसभा क्षेत्र का मतदाता होने के नाते उन्हें स्वयं अनेक बार आडवाणी जी को वोट देने का अवसर मिला, जिसे उन्होंने 'सौभाग्य' बताया।

आपातकाल में आडवाणी की भूमिका

लेख में मोदी ने आपातकाल (1975-77) के दौर को आडवाणी जी के जीवन का 'महत्वपूर्ण मोड़' बताया। उन्होंने लिखा कि उस कठिन दौर में आडवाणी जी 'लोकतंत्र को बचाने और संविधान की रक्षा के संघर्ष में अग्रिम पंक्ति में खड़े रहे।' मोदी ने उनकी पुस्तक 'ए प्रिजनर्स स्क्रैप बुक' का उल्लेख करते हुए कहा कि आपातकाल के दौरान आडवाणी जी ने जो देखा और अनुभव किया, उसकी झलक इस पुस्तक में मिलती है।

हिटलर के शासन से तुलना — 'ए टेल ऑफ टू इमरजेंसीज'

प्रधानमंत्री ने पुस्तक के एक विशेष अध्याय 'ए टेल ऑफ टू इमरजेंसीज' का जिक्र किया, जिसमें आडवाणी जी ने जून 1975 में भारत में शुरू हुई आपातकाल की घटनाओं और 1933 में हिटलर के शासन के दौरान जर्मनी में हुई घटनाओं के बीच समानताओं का वर्णन किया है। मोदी ने इस तुलना को 'आश्चर्यजनक समानताओं का बहुत प्रभावी ढंग से किया गया वर्णन' कहा।

संसदीय क्षेत्र के प्रति समर्पण — एक सीख

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने लेख के अंत में कहा कि अपने संसदीय क्षेत्र और वहाँ के लोगों के प्रति आडवाणी जी का लगाव, उनकी चिंता और ज़रूरतों का ध्यान रखने का उनका भाव, 'हम सभी के लिए सीखने योग्य है।' यह लेख न केवल व्यक्तिगत स्मृतियों का संकलन है, बल्कि यह भारतीय लोकतंत्र के एक दिग्गज नेता की राजनीतिक विरासत को भी रेखांकित करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी प्रधानमंत्री ने उन्हें 'प्रेरणादायी' और 'सीखने योग्य' बताया — जो पार्टी के भीतर पुरानी पीढ़ी को दिए जाने वाले सम्मान की निरंतरता दर्शाता है। आपातकाल की तुलना हिटलर के जर्मनी से करने वाले अध्याय का उल्लेख विशेष रूप से उल्लेखनीय है, जो आडवाणी जी को लोकतंत्र के रक्षक के रूप में स्थापित करता है — एक ऐसा कथ्य जो BJP की दीर्घकालिक राजनीतिक पहचान का हिस्सा है।
RashtraPress
8 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

PM मोदी ने आडवाणी जी के जन्मदिन पर क्या लिखा?
PM मोदी ने 'आडवाणी जी: एक शताब्दी की ओर बढ़ती प्रेरणादायी यात्रा' शीर्षक से एक विशेष लेख लिखा, जिसमें 1991 के गांधीनगर लोकसभा चुनाव की यादें, आपातकाल में आडवाणी जी की भूमिका और उनकी पुस्तक 'ए प्रिजनर्स स्क्रैप बुक' का उल्लेख किया।
1991 में गांधीनगर से चुनाव लड़ना आडवाणी जी के लिए 'घर वापसी' क्यों था?
विभाजन के बाद आडवाणी जी के पिताजी कच्छ (गुजरात) में आकर बसे थे और 1976 में वे गुजरात से राज्यसभा सांसद भी रह चुके थे। इसलिए मोदी ने लिखा कि 1991 में गांधीनगर से चुनाव लड़ना उनके लिए एक तरह से घर वापसी जैसा था।
1991 के चुनाव में मोदी ने क्या भूमिका निभाई थी?
उस समय मोदी BJP के संगठन में कार्यरत थे और उन्होंने आडवाणी जी का नामांकन पत्र तैयार करने से लेकर पूरे चुनाव अभियान में उनके साथ काम किया। मोदी ने यह भी बताया कि गांधीनगर के मतदाता होने के नाते उन्होंने अनेक बार आडवाणी जी को अपना वोट दिया।
आडवाणी जी की पुस्तक 'ए प्रिजनर्स स्क्रैप बुक' किस विषय पर है?
यह पुस्तक आपातकाल (1975-77) के दौरान आडवाणी जी के अनुभवों पर आधारित है। इसमें 'ए टेल ऑफ टू इमरजेंसीज' नामक अध्याय है, जिसमें जून 1975 के भारतीय आपातकाल और 1933 में हिटलर के जर्मनी की घटनाओं के बीच समानताओं का वर्णन किया गया है।
मोदी ने आडवाणी जी से क्या सीख बताई?
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि अपने संसदीय क्षेत्र और वहाँ के लोगों के प्रति आडवाणी जी का लगाव, उनकी चिंता और उनकी ज़रूरतों का ध्यान रखने का भाव 'हम सभी के लिए सीखने योग्य है।'
राष्ट्र प्रेस
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