दीपावली 2026: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने देशवासियों को दीं हार्दिक शुभकामनाएं
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने 8 नवंबर 2026 को दीपावली के पावन अवसर पर भारत और विश्व भर में बसे सभी देशवासियों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दीं। दोनों संवैधानिक पदाधिकारियों ने इस पर्व के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व को रेखांकित करते हुए एकता, समृद्धि और पर्यावरण संरक्षण की कामना की।
राष्ट्रपति मुर्मु का संदेश
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी पोस्ट में लिखा, 'दीपावली के शुभ अवसर पर मैं भारत और विदेश में रह रहे सभी भारतीयों को बधाई और शुभकामनाएं देती हूं।' उन्होंने इस पर्व की सांस्कृतिक और भक्तिपूर्ण जड़ों को स्पष्ट करते हुए कहा कि रावण पर विजय के उपरांत प्रभु श्रीराम के अयोध्या लौटने पर जो आनंदोत्सव मनाया गया और उनके द्वारा दीपमाला का सहर्ष अवलोकन किया गया, वही इस त्योहार का सांस्कृतिक आधार है।
राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि दीपावली रामराज्य के शुभारंभ का प्रतीक है — बुरी प्रवृत्तियों पर अच्छे संस्कारों की विजय का संदेश देने वाला यह पर्व, हर प्रकार के कष्टों के समाप्त होने और सुखमय जीवन के आरंभ होने का उत्सव है। उन्होंने कहा, 'मैं कामना करती हूं कि देश के प्रत्येक नागरिक के जीवन में स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि व्याप्त हो, पर्यावरण संरक्षित रहे, समरसता और बंधुता के आदर्श और अधिक मजबूत हों।'
राष्ट्रपति ने युवा पीढ़ी को संबोधित करते हुए यह भी व्यक्त किया कि देशप्रेम की भावना से प्रेरित युवा, आदर्श भारतीय मूल्यों के अनुरूप विकसित भारत के निर्माण में उत्साहपूर्वक योगदान दें।
उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन का संदेश
उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने सोशल मीडिया पर अपने संदेश में कहा, 'दिवाली के इस शुभ अवसर पर मैं अपने सभी देशवासियों और दुनिया भर के लोगों को दिल से बधाई और शुभकामनाएं देता हूं।' उन्होंने दीपावली को अंधेरे पर रोशनी, बुराई पर अच्छाई और झूठ पर सच्चाई की जीत के प्रतीक के रूप में वर्णित किया।
राधाकृष्णन ने 'सत्यमेव जयते' के शाश्वत आदर्श का उल्लेख करते हुए कहा कि यह दिवाली हर घर में खुशी, शांति और खुशहाली लाए तथा एकता और मेलजोल के बंधन को और मजबूत करे।
पर्व का सांस्कृतिक और सामाजिक महत्व
दीपावली भारत के सबसे बड़े और व्यापक रूप से मनाए जाने वाले त्योहारों में से एक है, जो न केवल हिंदू परंपरा में बल्कि जैन, सिख और बौद्ध समुदायों के लिए भी विशेष महत्व रखती है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब देश भर में पर्यावरण संरक्षण और पटाखों को लेकर सामाजिक बहस जारी है — राष्ट्रपति मुर्मु का पर्यावरण संरक्षण का उल्लेख इसी संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
आम जनता के लिए संदेश का असर
राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति जैसे संवैधानिक पदों से आने वाले ऐसे संदेश राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक विरासत के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं। विकसित भारत के निर्माण में युवाओं की भूमिका पर जोर देते हुए राष्ट्रपति मुर्मु का संदेश एक व्यापक राष्ट्रीय दृष्टिकोण को प्रतिबिंबित करता है। आने वाले दिनों में देश भर में दीपावली उत्सव अपने चरम पर रहेगा।