सीईसी ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें या महाभियोग झेलें: कांग्रेस नेता राशिद अल्वी की माँग
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने 25 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग करते हुए कहा कि यदि वह स्वेच्छा से इस्तीफा नहीं देते, तो संसद को उनके विरुद्ध महाभियोग की प्रक्रिया तत्काल शुरू करनी चाहिए। अल्वी ने ज्ञानेश कुमार के कथित कार्यों को लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा बताया।
अल्वी के प्रमुख आरोप
अल्वी ने अपने बयान में कहा, 'ज्ञानेश कुमार ने जो किया है, वह लोकतंत्र की हत्या है। यह किसी एक व्यक्ति की हत्या का मामला नहीं है, बल्कि भारत की उस आज़ादी और लोकतांत्रिक व्यवस्था की हत्या की कोशिश है, जिसे हासिल करने के लिए लाखों लोगों ने अपना खून बहाया और जान दी।'
उन्होंने यह भी दावा किया कि दो चुनाव आयुक्तों ने कथित तौर पर यह कहा है कि सीईसी ने उनकी सहमति के बिना कई बार अकेले निर्णय लिए — जिसे अल्वी ने चुनावी प्रक्रिया में अनियमितता का गंभीर संकेत बताया।
चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल
कांग्रेस नेता ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) और चुनाव आयोग के बीच कथित मिलीभगत का आरोप लगाया। उनका कहना है कि जब भी चुनाव आयोग की कार्यशैली पर प्रश्न उठते हैं, BJP के नेता उसके बचाव में आ जाते हैं, जो आलोचकों के नज़रिए से संदेह की जड़ है।
अल्वी ने यह भी तर्क दिया कि कुछ राज्यों में विपक्षी दलों की जीत को जानबूझकर इस्तेमाल किया जाता है, ताकि ईवीएम में हेरफेर के आरोपों का खंडन किया जा सके। गौरतलब है कि अल्वी पिछले करीब 10 वर्षों से इस तरह के सवाल उठाते रहे हैं।
लोकसभा व विधानसभा चुनावों पर आरोप
अल्वी ने लोकसभा चुनाव में कथित हेरफेर का आरोप दोहराते हुए कहा कि बावजूद इसके BJP को बहुमत नहीं मिल सका। उन्होंने महाराष्ट्र, हरियाणा और पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनावों में भी कथित अनियमितताओं की बात की और कहा कि ऐसी अनियमितताएं चुनाव आयोग की जानकारी या सहमति के बिना संभव नहीं हो सकतीं।
उन्होंने आरोप लगाया कि देश के कई राज्यों में BJP की सरकारें हैं और इसे भी उनके व्यापक आरोपों के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
BJP और चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया
फिलहाल इन आरोपों पर BJP या चुनाव आयोग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह ऐसे समय में आया है जब विपक्षी दलों और चुनाव आयोग के बीच संवाद की खाई लगातार गहरी हो रही है।
आगे क्या होगा
अल्वी की यह माँग संसद में विपक्ष की रणनीति का हिस्सा बन सकती है। महाभियोग की प्रक्रिया संवैधानिक रूप से जटिल है और इसके लिए संसद के दोनों सदनों में विशेष बहुमत की आवश्यकता होती है — जो फिलहाल विपक्ष के पास नहीं है। फिर भी, यह बयान सीईसी की भूमिका पर राजनीतिक बहस को और तेज़ करने वाला है।