25 सितंबर 2026
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सीईसी ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें या महाभियोग हो: कांग्रेस नेता राशिद अल्वी की माँग

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सीईसी ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें या महाभियोग हो: कांग्रेस नेता राशिद अल्वी की माँग

सारांश

कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर लोकतंत्र की हत्या का आरोप लगाते हुए इस्तीफे या महाभियोग की माँग की। उन्होंने BJP और चुनाव आयोग के बीच कथित मिलीभगत का दावा किया तथा लोकसभा से लेकर महाराष्ट्र, हरियाणा और पश्चिम बंगाल चुनावों तक में अनियमितताओं का आरोप लगाया।

मुख्य बातें

कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने 25 सितंबर 2026 को सीईसी ज्ञानेश कुमार से इस्तीफे की माँग की।
अल्वी ने कहा — इस्तीफा नहीं दिया तो संसद में महाभियोग की प्रक्रिया शुरू होनी चाहिए।
दो चुनाव आयुक्तों के कथित असहमति वाले बयान का हवाला देते हुए सीईसी पर अकेले फैसले लेने का आरोप।
भाजपा और चुनाव आयोग के बीच कथित मिलीभगत का दावा, जिसे अल्वी पिछले 10 वर्षों से उठाते रहे हैं।
महाराष्ट्र , हरियाणा और पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनावों में कथित अनियमितताओं का आरोप।

कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने 25 सितंबर 2026 को मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाते हुए माँग की कि वे या तो तत्काल इस्तीफा दें, अन्यथा संसद के माध्यम से उनके खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया शुरू की जाए। अल्वी ने कहा कि सीईसी की कार्यप्रणाली भारतीय लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा है।

मुख्य आरोप और माँग

अल्वी ने कहा, "ज्ञानेश कुमार ने जो किया है, वह लोकतंत्र की हत्या है। यह किसी एक व्यक्ति की हत्या का मामला नहीं है, बल्कि भारत की उस आजादी और लोकतांत्रिक व्यवस्था की हत्या की कोशिश है, जिसे हासिल करने के लिए लाखों लोगों ने अपना खून बहाया और जान दी।" कांग्रेस नेता ने स्पष्ट कहा कि बेहतर होगा कि ज्ञानेश कुमार स्वयं इस्तीफा दे दें और यदि वे ऐसा नहीं करते, तो संसद को महाभियोग की प्रक्रिया आरंभ करनी चाहिए।

चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल

अल्वी ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) और चुनाव आयोग के बीच कथित मिलीभगत का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जब भी चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठते हैं, तो BJP के नेता उसके समर्थन में क्यों सामने आते हैं। उनके अनुसार, "भाजपा और चुनाव आयोग पर्दे के पीछे मिलकर काम कर रहे हैं।" अल्वी ने यह भी कहा कि वे पिछले करीब 10 वर्षों से इस तरह के सवाल उठाते रहे हैं।

दो चुनाव आयुक्तों के असहमति के दावे

अल्वी ने दावा किया कि यदि दो चुनाव आयुक्तों ने यह कहा है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने उनकी सहमति के बिना कई बार अकेले फैसले लिए, तो यह अत्यंत गंभीर मामला है। उन्होंने इसे चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का संकेत करार दिया। गौरतलब है कि यह आरोप चुनाव आयोग की आंतरिक कार्यप्रणाली पर सीधा सवाल खड़ा करते हैं।

लोकसभा और विधानसभा चुनावों पर आरोप

कांग्रेस नेता ने लोकसभा चुनाव में कथित हेरफेर का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके बावजूद BJP को बहुमत नहीं मिला। उन्होंने महाराष्ट्र, हरियाणा और पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनावों में भी अनियमितताओं का आरोप लगाया और कहा कि कथित अनियमितताएँ चुनाव आयोग की जानकारी या सहमति के बिना संभव नहीं हो सकतीं। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ राज्यों में विपक्षी दलों की जीत को जानबूझकर रणनीति का हिस्सा बनाया जाता है ताकि आरोपों का खंडन किया जा सके।

आगे क्या होगा

कांग्रेस की यह माँग ऐसे समय में आई है जब चुनाव आयोग की स्वायत्तता और निष्पक्षता को लेकर विपक्षी दलों का असंतोष लगातार बढ़ रहा है। ज्ञानेश कुमार या चुनाव आयोग की ओर से अब तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। यह देखना अहम होगा कि विपक्षी एकजुटता इस माँग को संसद तक ले जाने में सक्षम हो पाती है या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन हर बार ठोस साक्ष्य की कमी के कारण ये आरोप राजनीतिक बयानबाजी तक सिमट गए। इस बार दो चुनाव आयुक्तों के कथित असहमति वाले बयान का संदर्भ आरोपों को थोड़ा अधिक ठोस आधार देता है — हालाँकि इसकी स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है। महाभियोग की माँग संवैधानिक दृष्टि से कठिन है, क्योंकि इसके लिए संसद में व्यापक समर्थन चाहिए, जो विपक्ष के पास फिलहाल नहीं है। असली सवाल यह है कि क्या विपक्ष इस माँग को एक ठोस संसदीय प्रस्ताव में बदल सकता है, या यह केवल प्रेस वार्ता तक ही सीमित रहेगी।
RashtraPress
25 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राशिद अल्वी ने सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ क्या माँग की है?
कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से तत्काल इस्तीफे की माँग की है। उन्होंने कहा कि यदि वे इस्तीफा नहीं देते तो संसद को उनके खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए।
अल्वी ने चुनाव आयोग पर क्या आरोप लगाए?
अल्वी ने आरोप लगाया कि भाजपा और चुनाव आयोग पर्दे के पीछे मिलकर काम कर रहे हैं और चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करते हैं। उन्होंने महाराष्ट्र, हरियाणा और पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनावों तथा लोकसभा चुनाव में भी कथित अनियमितताओं का आरोप लगाया।
दो चुनाव आयुक्तों की असहमति का क्या मामला है?
अल्वी ने दावा किया कि दो चुनाव आयुक्तों ने यह बात सामने रखी है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने उनकी सहमति के बिना कई बार अकेले फैसले लिए। उन्होंने इसे चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का संकेत बताया।
क्या मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग संभव है?
संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार मुख्य चुनाव आयुक्त को महाभियोग के जरिए हटाया जा सकता है, लेकिन इसके लिए संसद के दोनों सदनों में विशेष बहुमत आवश्यक है। फिलहाल विपक्ष के पास इतना संसदीय समर्थन नहीं है, इसलिए यह माँग व्यावहारिक रूप से कठिन मानी जा रही है।
ज्ञानेश कुमार या चुनाव आयोग ने इन आरोपों पर क्या कहा?
रिपोर्टों के अनुसार, सीईसी ज्ञानेश कुमार या चुनाव आयोग की ओर से अल्वी के इन आरोपों पर अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
राष्ट्र प्रेस
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