महाराष्ट्र कांग्रेस की माँग: CEC ज्ञानेश कुमार और MPSC अध्यक्ष विवेक भीमनवार तुरंत दें इस्तीफा
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी (MPCC) के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने 2 अक्टूबर 2026 को गांधी जयंती के अवसर पर मुंबई के ऐतिहासिक मणि भवन में पत्रकारों से बातचीत में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) के अध्यक्ष विवेक भीमनवार के तत्काल इस्तीफे की माँग की। सपकाल ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने देश की चुनावी व्यवस्था पर कब्जा कर लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमज़ोर किया है। इस दौरान महाराष्ट्र कांग्रेस प्रभारी सिरीवेल्ला प्रसाद भी उनके साथ मौजूद रहे।
CEC पर लगाए गंभीर आरोप
सपकाल ने CEC ज्ञानेश कुमार पर सीधा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि वह 'BJP के एजेंट' की तरह काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा उठाए गए सवालों के बाद निर्वाचन आयोग को फॉर्म-6 में किए गए कथित मनमाने बदलाव वापस लेने पड़े। यह आरोप महाराष्ट्र कांग्रेस के उस रुख को आगे बढ़ाता है जिसके तहत वह चुनावी सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर निर्वाचन आयोग पर पहले भी सवाल उठाती रही है।
सपकाल ने सवाल किया कि जनता को यह बताया जाना चाहिए कि चुनाव संबंधी निर्णय लेने की शक्तियाँ किसी निजी संस्था को सौंपने की अनुमति किसने दी। गौरतलब है कि निर्वाचन आयोग ने इन आरोपों पर अभी तक कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।
MPSC और छात्र आंदोलन पर कांग्रेस का रुख
MPSC के कामकाज को 'बेहद खराब' बताते हुए सपकाल ने MPSC अध्यक्ष विवेक भीमनवार के तत्काल इस्तीफे की माँग दोहराई। उन्होंने कहा कि आयोग के खिलाफ जारी छात्र विरोध प्रदर्शन को कांग्रेस का पूर्ण समर्थन प्राप्त है और पार्टी आंदोलनरत युवाओं के साथ मज़बूती से खड़ी है। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता को लेकर छात्रों की नाराज़गी लगातार बढ़ रही है।
गांधी जयंती का संदर्भ और संवैधानिक मूल्य
मणि भवन का दौरा करने के बाद सपकाल ने कहा कि महात्मा गांधी ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान यहाँ काफी समय बिताया था। उन्होंने कहा कि गांधी को सच्ची श्रद्धांजलि का अर्थ संवैधानिक मूल्यों की रक्षा करना भी है। उन्होंने गांधी की विचारधारा को छत्रपति शिवाजी महाराज, शाहू महाराज, महात्मा फुले, डॉ. बी.आर. आंबेडकर और महाराष्ट्र की संत परंपरा की विरासत से जोड़ा।
आरएसएस की विचारधारा पर टिप्पणी करते हुए सपकाल ने आरोप लगाया कि वह भेदभाव को बढ़ावा देती है। उन्होंने संगठन से अपने कार्यालयों में भारत का संविधान स्थापित करने और संगठन को भंग करने की माँग की।
महंगाई पर UPA-NDA की तुलना
महंगाई के मुद्दे पर सपकाल ने मौजूदा सरकार की तुलना पूर्ववर्ती यूपीए (UPA) सरकार से की। उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री दिवंगत मनमोहन सिंह के कार्यकाल में वैश्विक स्तर पर ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद पेट्रोल की कीमत करीब ₹70 प्रति लीटर और एलपीजी सिलेंडर की कीमत ₹450 रखी गई थी।
सपकाल ने आरोप लगाया कि मौजूदा मोदी सरकार कुछ चुनिंदा उद्योगपतियों को लाभ पहुँचाने पर ध्यान दे रही है, जबकि आम नागरिक लगातार बढ़ती महंगाई का बोझ उठा रहे हैं। BJP और सरकार की ओर से इन आरोपों पर अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आने वाले दिनों में यह राजनीतिक बहस और तेज़ होने की संभावना है।