23 अक्टूबर 2026
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महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल का मांग — CEC ज्ञानेश कुमार पर लगे राष्ट्रद्रोह का मुकदमा

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महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल का मांग — CEC ज्ञानेश कुमार पर लगे राष्ट्रद्रोह का मुकदमा

सारांश

महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने CEC ज्ञानेश कुमार पर वोटर डेटा निजी कंपनी को सौंपने और विदेशियों तक पहुँचाने का आरोप लगाते हुए न सिर्फ इस्तीफे की मांग की, बल्कि राष्ट्रद्रोह का मुकदमा चलाने की भी माँग उठाई — चुनाव से ठीक पहले यह सियासी तापमान कई डिग्री बढ़ा देता है।

मुख्य बातें

हर्षवर्धन सपकाल ने 23 अक्टूबर 2026 को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग की।
सपकाल ने आरोप लगाया कि एक निजी कंपनी को वोटर लिस्ट का पूरा डेटा एक्सेस दिया गया, जो कथित तौर पर विदेशियों तक पहुँचा।
उन्होंने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ राष्ट्रद्रोह जैसे गंभीर आरोपों के तहत मुकदमा चलाने की माँग की।
महाराष्ट्र में MVA और BJP के बीच सीधे मुकाबले का दावा करते हुए कांग्रेस ने जीत का भरोसा जताया।
PM मोदी के बयान पर पलटवार करते हुए सपकाल ने 12 साल पुराने वादों का हिसाब माँगा।

महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने 23 अक्टूबर 2026 को मुंबई में प्रेस से बात करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाए और उनके तत्काल इस्तीफे की मांग की। सपकाल ने कहा कि वोटर लिस्ट में अनियमितता और नियमों में मनमाने बदलाव के लिए ज्ञानेश कुमार के विरुद्ध राष्ट्रद्रोह जैसे गंभीर आरोपों के तहत मुकदमा चलाया जाना चाहिए।

चुनाव आयोग पर मुख्य आरोप

सपकाल ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने एक निजी कंपनी को मतदाता सूची का पूरा डेटा एक्सेस दे दिया, जिससे देश के नागरिकों की संवेदनशील जानकारी कथित तौर पर विदेशी हाथों तक पहुँचने का खतरा पैदा हुआ। उन्होंने कहा, 'नियम क्यों बदले गए? इसको लेकर भी स्पष्टता करनी चाहिए।' उनके अनुसार यह डेटा-साझाकरण राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरनाक है और इसीलिए राष्ट्रद्रोह जैसे कठोर कानूनी प्रावधान लागू होने चाहिए।

गौरतलब है कि विशेष सारांश पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दलों में पहले से ही असंतोष था और इस मुद्दे पर जनआंदोलन भी हो चुका है। सपकाल ने कहा कि 'ऑफ द पीपल, बाय द पीपल, फॉर द पीपल' और 'वन मैन, वन वोट, वन वैल्यू' की यह लड़ाई जारी रहेगी।

महाराष्ट्र चुनावी राजनीति पर बयान

सपकाल ने दावा किया कि पूरे महाराष्ट्र में महाविकास आघाड़ी (MVA) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच सीधा मुकाबला है। उन्होंने कहा कि इंडिया गठबंधन की बैठकें सरकार को घेरने के लिए निरंतर जारी हैं और MVA को बड़ी संख्या में सीटें जीतने का भरोसा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्तापक्ष 'पैसा फेंको, तमाशा देखो' की नीति पर चल रहा है, लेकिन इसका करारा जवाब मतदाता देंगे।

प्रधानमंत्री मोदी पर पलटवार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'भारत को मिट्टी में मिलाने की कोशिश' वाले बयान का जवाब देते हुए सपकाल ने कहा कि पीएम मोदी को पहले उन वादों का हिसाब देना चाहिए जो उन्होंने 12 साल पहले किए थे। उन्होंने सरकार पर 'दमनकारी रवैया' अपनाने और विरोध की आवाज़ दबाने का आरोप लगाया। सपकाल ने यह भी कहा कि भले ही सरकार अभी ₹1 लाख रुपए देने और संपूर्ण ऋणमाफी का ऐलान कर दे, तब भी जनता सब समझती है।

सोनिया गांधी की पुस्तक पर टिप्पणी

सोनिया गांधी की आत्मकथा को लेकर पूछे गए सवाल पर सपकाल ने कहा कि उन पर बार-बार जो निराधार आरोप लगाए गए, उनके बावजूद उन्होंने भारत की बहू और राजीव गांधी की विधवा के रूप में देश के विकास के लिए अहम भूमिका निभाई। उन्होंने याद दिलाया कि 2004 में कांग्रेस को बहुमत मिलने के बाद सोनिया गांधी ने अपनी अंतरात्मा की आवाज़ सुनकर प्रधानमंत्री पद ठुकरा दिया था। सपकाल ने इस पुस्तक को इंदिरा गांधी की किताबों की परंपरा में एक प्रेरणादायक दस्तावेज़ बताया।

आगे क्या

सपकाल के इन बयानों के बाद महाराष्ट्र की चुनावी राजनीति और अधिक गर्म होने के आसार हैं। विपक्ष के ये आरोप चुनाव आयोग और सत्तारूढ़ गठबंधन दोनों के लिए दबाव बढ़ाते हैं। अब देखना होगा कि चुनाव आयोग इन आरोपों पर औपचारिक प्रतिक्रिया देता है या नहीं, और क्या MVA इन मुद्दों को चुनावी अभियान का केंद्र बनाएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह विपक्ष की उस रणनीति का हिस्सा है जो चुनाव से पहले संस्थाओं की विश्वसनीयता को सवालों के घेरे में लाना चाहती है। हालाँकि सपकाल ने वोटर डेटा के निजी कंपनी और विदेशियों तक पहुँचने का आरोप लगाया, लेकिन इस दावे का कोई सत्यापित साक्ष्य सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है। यह ऐसे समय में आया है जब SIR को लेकर विपक्ष पहले से ही सड़क पर है और महाराष्ट्र की चुनावी जंग अपने चरम पर है। असली सवाल यह है कि क्या चुनाव आयोग इन आरोपों का पारदर्शी खंडन करेगा — क्योंकि चुप्पी से संदेह और गहरा होगा।
RashtraPress
23 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हर्षवर्धन सपकाल ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ क्या माँग की है?
महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से तत्काल इस्तीफे की माँग की है और उनके खिलाफ राष्ट्रद्रोह जैसे गंभीर कानूनी प्रावधानों के तहत मुकदमा चलाने की माँग भी उठाई है। उनका आरोप है कि वोटर लिस्ट में अनियमितता की गई और डेटा को निजी कंपनी व विदेशियों तक पहुँचाया गया।
वोटर लिस्ट और निजी कंपनी का विवाद क्या है?
सपकाल ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने एक निजी कंपनी को मतदाता सूची का पूरा एक्सेस दे दिया और यह संवेदनशील डेटा कथित तौर पर विदेशी हाथों तक पहुँचा। उनके अनुसार यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है, हालाँकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
SIR यानी विशेष सारांश पुनरीक्षण क्या है और इस पर विवाद क्यों है?
SIR (Special Intensive Revision) वोटर लिस्ट की समीक्षा की एक प्रक्रिया है जिसके तहत मतदाता सूची में नाम जोड़े या हटाए जाते हैं। विपक्षी दलों का आरोप है कि इस प्रक्रिया में अनियमितताएँ हुई हैं, नियम मनमाने ढंग से बदले गए, और इससे कुछ मतदाताओं के नाम गलत तरीके से काटे गए हैं।
महाराष्ट्र में MVA और BJP के बीच चुनावी स्थिति क्या है?
कांग्रेस अध्यक्ष सपकाल के अनुसार पूरे महाराष्ट्र में महाविकास आघाड़ी (MVA) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच सीधा मुकाबला है। उन्होंने MVA के अच्छे प्रदर्शन और बड़ी संख्या में सीटें जीतने का दावा किया है।
सोनिया गांधी की पुस्तक पर सपकाल ने क्या कहा?
सपकाल ने कहा कि सोनिया गांधी पर बार-बार निराधार आरोप लगाए गए, लेकिन उन्होंने भारत की बहू और राजीव गांधी की विधवा के रूप में देश के विकास के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 2004 में बहुमत मिलने के बावजूद उन्होंने प्रधानमंत्री पद ठुकराया — यह उनकी पुस्तक को इंदिरा गांधी की किताबों की परंपरा में एक प्रेरणादायक दस्तावेज़ बनाता है।
राष्ट्र प्रेस
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