महाराष्ट्र कांग्रेस का 28 सितंबर को राज्यव्यापी प्रदर्शन, CEC ज्ञानेश कुमार की बर्खास्तगी और गिरफ्तारी की माँग
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी (एमपीसीसी) ने 26 सितंबर 2026 को भारतीय चुनाव आयोग (ECI) के विरुद्ध अपना आक्रामक रुख और तेज़ करते हुए 28 सितंबर को पूरे महाराष्ट्र में राज्यव्यापी आंदोलन की घोषणा की। पार्टी ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को तत्काल बर्खास्त करने और उनकी गिरफ्तारी की माँग रखी है।
आंदोलन की पृष्ठभूमि
यह घोषणा लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा 'वोट चोरी' के व्यापक आरोपों के बाद बढ़ते राजनीतिक तनाव के बीच आई है। कांग्रेस का आरोप है कि CEC ज्ञानेश कुमार ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) को लाभ पहुँचाने के लिए पक्षपातपूर्ण ढंग से कार्य किया और लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमज़ोर किया। पार्टी के अनुसार, ये आरोप चुनाव आयोग के भीतर से उभरी आंतरिक असहमति की रिपोर्टों से और पुख्ता होते हैं।
विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया पर विवाद
कांग्रेस के हमले का केंद्र बिंदु विवादास्पद विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया है। एमपीसीसी का आरोप है कि इस प्रक्रिया के अंतर्गत महाराष्ट्र की मतदाता सूची से 3 करोड़ से अधिक पात्र मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं। देशभर का आँकड़ा देखें तो पार्टी का दावा है कि 13 करोड़ मतदाता अपने मताधिकार से वंचित किए गए हैं।
कांग्रेस ने यह भी रेखांकित किया कि महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2024 से पूर्व मतदाताओं की संख्या में 47 लाख की वृद्धि दर्ज की गई थी, परंतु आयोग ने इन नए मतदाताओं की वर्तमान स्थिति का कोई सत्यापन नहीं किया। पश्चिम बंगाल और बिहार सहित अन्य गैर-BJP शासित राज्यों में भी वैध मतदाताओं के नाम हटाए जाने का आरोप लगाया गया है।
आयोग के भीतर असहमति की रिपोर्ट
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने SIR के क्रियान्वयन के दौरान लिए गए निर्णयों पर पिछले 10 महीनों में कम-से-कम 14 मौकों पर औपचारिक रूप से असहमति दर्ज कराई। कांग्रेस ने इन रिपोर्टों को अपने आरोपों की पुष्टि के रूप में प्रस्तुत किया है, हालाँकि चुनाव आयोग की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी तक सामने नहीं आई है।
एमपीसीसी अध्यक्ष का बयान
एमपीसीसी अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने आधिकारिक बयान में कहा, 'वैध और योग्य मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाना संविधान पर सीधा हमला है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का निरंकुश आचरण भारतीय लोकतंत्र पर सीधा प्रहार है।' यह बयान राज्यव्यापी आंदोलन की घोषणा के साथ जारी किया गया।
आगे क्या होगा
गौरतलब है कि 28 सितंबर का प्रदर्शन महाराष्ट्र में कांग्रेस के लिए एक बड़ी संगठनात्मक परीक्षा भी है — यह देखना होगा कि जमीनी गोलबंदी कितनी व्यापक होती है। यह आंदोलन ऐसे समय में आया है जब राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी दल मतदाता सूची की विश्वसनीयता को लेकर एकजुट होते दिख रहे हैं। चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया और सरकार का रुख इस विवाद की अगली दिशा तय करेगा।