मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कांग्रेस का राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन, इस्तीफे और गिरफ्तारी की मांग
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस / INC) ने 25 सितंबर 2026 को देशभर में एक साथ विरोध प्रदर्शन आयोजित किए और कथित 'वोट चोरी' के आरोपों को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के तत्काल इस्तीफे एवं गिरफ्तारी की मांग की। पार्टी ने स्पष्ट किया कि ज्ञानेश कुमार के खिलाफ ठोस कार्रवाई होने तक यह आंदोलन निर्बाध जारी रहेगा। नई दिल्ली, चंडीगढ़, पटना, भुवनेश्वर, देहरादून, शिमला और गुवाहाटी सहित कई शहरों में प्रदर्शनकारियों पर वाटर कैनन का प्रयोग किया गया और दर्जनों नेताओं-कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया।
विवाद की पृष्ठभूमि
यह विरोध प्रदर्शन ऐसे समय में और तेज हुआ जब मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR — Special Intensive Revision) को लेकर चुनाव आयोग के भीतर मतभेद होने का दावा करने वाली एक मीडिया रिपोर्ट सामने आई। गौरतलब है कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी कथित 'वोट चोरी' का मुद्दा कई महीनों से उठाते रहे हैं। 14 दिसंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में 'वोट चोर गद्दी छोड़ो' रैली भी आयोजित की गई थी। SIR प्रक्रिया के तहत मतदाता सूचियों की व्यापक समीक्षा की जाती है, जिसे कांग्रेस मतदाताओं को सूची से बाहर करने का हथियार बता रही है।
प्रमुख नेताओं की हिरासत और प्रतिक्रिया
प्रदर्शन के दौरान असम कांग्रेस अध्यक्ष एवं सांसद गौरव गोगोई और पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग समेत अनेक नेताओं और कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया। चंडीगढ़ और पटना में वाटर कैनन का इस्तेमाल किया गया और पटना में प्रदर्शनकारियों की पुलिस से धक्का-मुक्की भी हुई। एक प्रदर्शनकारी ने पुलिस पर 'लाठीचार्ज' का आरोप लगाया।
दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने कहा, 'हमारी मांग साफ है कि ज्ञानेश कुमार को गिरफ्तार किया जाना चाहिए, क्योंकि उन्होंने लोकतंत्र की हत्या की है। जब वोट चोरी होते हैं तो लोकतंत्र का मूल आधार ही खत्म हो जाता है।' उन्होंने यह भी मांग की कि पिछले एक वर्ष में हुए चुनावों की समीक्षा की जाए।
राज्यों में प्रदर्शन का ब्यौरा
नई दिल्ली में युवा कांग्रेस ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर मार्च निकाला। महिला कांग्रेस अध्यक्ष अलका लांबा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मांग की कि वे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से इस्तीफा लें और उनके कथित गैरकानूनी फैसलों को वापस लिया जाए।
चंडीगढ़ में कांग्रेस नेताओं ने चुनाव आयोग कार्यालय का घेराव करने की कोशिश की। हिरासत के दौरान अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने दावा किया कि पंजाब में 20 लाख वोट SIR प्रक्रिया के तहत हटाए गए हैं और इसे रद्द करने की मांग की। चंडीगढ़ कांग्रेस अध्यक्ष एच.एस. लक्की ने कहा कि पुलिस की रुकावट के बावजूद आंदोलन नहीं रुकेगा।
पटना में बिहार कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम के नेतृत्व में चुनाव आयोग कार्यालय की ओर मार्च निकाला गया, लेकिन पुलिस ने सचिवालय के पास बैरिकेडिंग कर दी। पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव भी इस प्रदर्शन में शामिल हुए और आरोप लगाया कि बंगाल, बिहार और असम में 13 करोड़ लोगों के साथ अन्याय किया गया है। भुवनेश्वर में ओडिशा कांग्रेस अध्यक्ष भक्त चरण दास ने विरोध मार्च का नेतृत्व किया। देहरादून में उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत प्रदर्शन में शामिल हुए। शिमला में हिमाचल प्रदेश कांग्रेस प्रभारी रजनी पाटिल ने कहा कि अब पार्टी को चुनावों में गड़बड़ियों का पूरा विश्वास हो गया है।
आरोपों का दायरा और कांग्रेस की माँगें
कांग्रेस की प्रदेश प्रभारी कुमारी सैलजा ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त को लेकर सामने आई जानकारियों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। पार्टी की सामूहिक माँगों में ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा, उनकी गिरफ्तारी, SIR प्रक्रिया को रद्द करना, और पिछले एक साल के चुनावों की स्वतंत्र समीक्षा शामिल हैं। उल्लेखनीय है कि इन आरोपों पर चुनाव आयोग या सरकार की ओर से अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
आगे क्या होगा
कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई होने तक यह राष्ट्रव्यापी आंदोलन जारी रहेगा। यह ऐसे समय में आया है जब देश के कई राज्यों में आगामी चुनावों की तैयारी चल रही है और चुनाव आयोग की विश्वसनीयता का सवाल राष्ट्रीय बहस के केंद्र में आ गया है। विपक्ष की यह मुहिम संसद सत्र से पहले और तेज हो सकती है।