ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग: शिवाजी पार्क में आदित्य-अमित ठाकरे एक मंच पर, दूसरे दिन भी प्रदर्शन जारी
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना (यूबीटी) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) ने सोमवार, 13 अक्टूबर 2026 को लगातार दूसरे दिन मुंबई के शिवाजी पार्क में संयुक्त प्रदर्शन किया, जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के तत्काल इस्तीफे की माँग दोहराई गई। दोनों दलों का आरोप है कि चुनाव प्रक्रिया में अनियमितताएँ हुई हैं और मतदाता सूचियों से मनमाने ढंग से नाम हटाए गए हैं। ठाकरे परिवार के दोनों चचेरे भाइयों — आदित्य ठाकरे और अमित ठाकरे — के एक मंच पर दिखना इस आंदोलन का सबसे बड़ा राजनीतिक संकेत माना जा रहा है।
मुख्य घटनाक्रम
शिवसेना (यूबीटी) के कार्यकर्ता और युवा नेता काले रंग की पट्टियाँ मुंह पर बाँधकर और तिरंगा हाथ में लेकर प्रदर्शन स्थल पर पहुँचे — यह रविवार को हुई पुलिस कार्रवाई के विरुद्ध मौन लेकिन सशक्त विरोध था। वहीं मनसे ने दादर स्टेशन और शिवाजी पार्क के पास राज्यव्यापी हस्ताक्षर अभियान की शुरुआत की। मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने सबसे पहले हस्ताक्षर कर अभियान का शुभारंभ किया; इसके बाद उनकी पत्नी शर्मिला ठाकरे, बेटी उर्वशी ठाकरे और बेटे अमित ठाकरे ने भी हस्ताक्षर किए। शाम के समय मीनाताई ठाकरे की प्रतिमा के आसपास का क्षेत्र राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र बना रहा।
नेताओं की उपस्थिति और एकजुटता का संदेश
प्रदर्शन में दोनों दलों के वरिष्ठ नेताओं की भागीदारी उल्लेखनीय रही। शिवसेना (यूबीटी) की ओर से आदित्य ठाकरे, तेजस ठाकरे, विधान परिषद सदस्य अनिल परब, महेश सावंत, विलास पोटनिस और नितिन देशमुख मौजूद रहे। मनसे की ओर से राज ठाकरे, शर्मिला ठाकरे, अमित ठाकरे, उर्वशी ठाकरे और अन्य वरिष्ठ नेता शामिल हुए। गौरतलब है कि आदित्य ठाकरे और अमित ठाकरे का एक साथ नज़र आना — दो दलों के, जो अन्यथा प्रतिद्वंद्वी माने जाते हैं — इस मुद्दे पर असाधारण एकता का प्रतीक बना।
आदित्य ठाकरे का तीखा हमला
आदित्य ठाकरे ने चुनाव आयोग और सरकार पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा, 'हम लोकतंत्र की रक्षा के लिए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ लड़ रहे हैं। मौजूदा सरकार उन्हें बचाने की कोशिश कर रही है, क्योंकि यह सरकार भी वोट चोरी और चुनावी हेरफेर के ज़रिए बनी है। यह देश के नागरिकों की लड़ाई है और न्याय मिलने तक यह आंदोलन जारी रहेगा।' यह बयान आंदोलन की केंद्रीय माँग को स्पष्ट करता है — मतदाता सूची की पारदर्शिता और चुनाव आयोग की जवाबदेही।
रविवार की पुलिस कार्रवाई और आंदोलन की पृष्ठभूमि
यह संयुक्त आंदोलन रविवार को शिवाजी पार्क में हुए प्रदर्शन के बाद और मज़बूत हुआ। उस दिन पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और राजनीतिक कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया था। यह ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र में विपक्षी दल मतदाता सूची की विश्वसनीयता पर लगातार सवाल उठाते आ रहे हैं और आने वाले चुनावों से पहले चुनाव आयोग पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
आगे क्या होगा
मनसे ने रेलवे स्टेशनों और राज्य के अन्य प्रमुख स्थानों पर हस्ताक्षर अभियान का विस्तार शुरू कर दिया है। इससे संकेत मिलते हैं कि यह आंदोलन आने वाले दिनों में और तेज़ हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ठाकरे परिवार की यह एकजुटता महाराष्ट्र की राजनीतिक गणित को नए सिरे से परिभाषित कर सकती है।