5 अक्टूबर 2026
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नितेश राणे का तीखा पलटवार: 'उद्धव ठाकरे और दिमाग का कोई रिश्ता नहीं', आदित्य के पासपोर्ट जब्ती की माँग

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नितेश राणे का तीखा पलटवार: 'उद्धव ठाकरे और दिमाग का कोई रिश्ता नहीं', आदित्य के पासपोर्ट जब्ती की माँग

सारांश

मुंबई में उद्धव और राज ठाकरे की संयुक्त रैली के जवाब में BJP मंत्री नितेश राणे ने एक से बढ़कर एक आरोपों की झड़ी लगा दी — आदित्य ठाकरे पर देश छोड़ने की तैयारी का दावा, पासपोर्ट जब्ती की माँग, और कांग्रेस को जिहादियों का हमराह बताया। महाराष्ट्र की राजनीति में यह टकराव अब और गहरा होता दिख रहा है।

मुख्य बातें

उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे ने 5 अक्टूबर 2026 को मुंबई में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और एसआईआर के विरोध में संयुक्त रैली निकाली।
BJP मंत्री नितेश राणे ने रैली आयोजकों पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी और उद्धव पर तीखी टिप्पणी की।
राणे ने दावा किया कि आदित्य ठाकरे देश छोड़ने की तैयारी में हैं; उनके पासपोर्ट जब्ती और लुकआउट नोटिस की माँग की — ये आरोप अभी सत्यापित नहीं हैं।
राणे के अनुसार आदित्य ठाकरे का नाम एक कथित हत्या और सामूहिक बलात्कार मामले में 13 बार एफआईआर में दर्ज है।
राणे ने कांग्रेस पर भी हमला बोला और एसआईआर-विरोध को कथित 'वोट जिहाद' का एजेंडा करार दिया।

मुंबई में 5 अक्टूबर 2026 को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग और विशेष सारांश पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के विरोध में शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) प्रमुख उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे द्वारा निकाली गई संयुक्त रैली पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता एवं महाराष्ट्र मंत्री नितेश राणे ने तीखा पलटवार किया। राणे ने यहाँ तक कह दिया कि 'उद्धव ठाकरे और दिमाग का कभी कोई संबंध नहीं रहा।'

रैली पर राणे की कानूनी चेतावनी

नितेश राणे ने स्पष्ट कहा कि भारत डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के संविधान द्वारा शासित देश है, जहाँ कानून सबके लिए एकसमान है। उन्होंने कहा कि हर मोर्चे या रैली के लिए पूर्व अनुमति आवश्यक होती है और बिना अनुमति के प्रदर्शन करने पर मुकदमा दर्ज किया जाएगा। राणे ने आरोप लगाया कि ठाकरे परिवार को केस झेलने की आदत नहीं रही, परंतु इस रैली के आयोजकों को कानूनी परिणाम भुगतने होंगे।

एसआईआर पर विरोध को 'वोट जिहाद का एजेंडा' बताया

राणे ने एसआईआर-विरोधी रुख पर कड़ा सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि अगर राज ठाकरे को एसआईआर प्रक्रिया में गड़बड़ी लगती है तो उन्हें चुनाव का ही बहिष्कार करना चाहिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि लोकसभा चुनाव के बाद जब उद्धव ठाकरे के सांसद जीते थे, तब इन्हीं लोगों ने एसआईआर या चुनाव को रद्द करने की माँग नहीं की थी। राणे ने दावा किया कि चुनाव आयोग अगर मतदाता सूची को वास्तविक भारतीय नागरिकों तक सीमित कर रहा है, तो इसका विरोध नहीं, अभिनंदन होना चाहिए। उन्होंने इस पूरे आंदोलन को कथित तौर पर 'वोट जिहाद' का एजेंडा करार दिया।

उद्धव के बयान पर तीखी टिप्पणी

उद्धव ठाकरे के इस सवाल पर कि राष्ट्रपति चुनाव की तरह चुनाव आयुक्त के लिए भी चुनाव क्यों नहीं होता — राणे ने पलटवार करते हुए कहा, 'उद्धव ठाकरे और दिमाग का कभी कोई संबंध नहीं रहा।' राणे ने उद्धव से यह भी पूछा कि रैली के मंच पर उनके पुत्र आदित्य ठाकरे क्यों नज़र नहीं आए।

आदित्य ठाकरे पर गंभीर आरोप, पासपोर्ट जब्ती की माँग

राणे ने दावा किया कि उनके अनुमान के अनुसार आदित्य ठाकरे देश छोड़ने की तैयारी में हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि दिशा सालियान केस और दिनो मोरिया की गिरफ्तारी के कारण आदित्य को जेल का डर सता रहा है। राणे ने यह भी दावा किया कि आदित्य ठाकरे का नाम एक कथित हत्या और सामूहिक बलात्कार के मामले में 13 बार एफआईआर में दर्ज हो चुका है। गौरतलब है कि ये आरोप राणे के अपने बयान हैं और इनकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। राणे ने माँग की कि आदित्य ठाकरे का पासपोर्ट तत्काल जब्त किया जाए और उनके खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया जाए।

कांग्रेस पर हमला

राणे ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) पर भी निशाना साधा और कहा कि कांग्रेस और मुस्लिम लीग में अब ज्यादा अंतर नहीं रह गया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेताओं की भाषा और जिहादी संगठनों की भाषा एक जैसी है। उनका कहना था कि कांग्रेस का एकमात्र उद्देश्य चुनाव आयोग को बदनाम करना है ताकि कथित 'वोट जिहाद' करने वालों को खुला मैदान मिल सके। यह ऐसे समय में आया है जब एसआईआर को लेकर विपक्षी दलों और सत्तारूढ़ गठबंधन के बीच तनाव चरम पर है। आने वाले दिनों में इस राजनीतिक विवाद के और तीखा होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

व्यक्तिगत हमलों से दिया जाता है। आदित्य ठाकरे पर लगाए गए आरोप गंभीर हैं, लेकिन बिना न्यायिक या जाँच एजेंसी की पुष्टि के इन्हें राजनीतिक बयानबाजी से अलग करना मुश्किल है। एसआईआर पर विपक्ष की चिंताओं को 'वोट जिहाद' की संज्ञा देना एक ऐसी फ्रेमिंग है जो वैध प्रशासनिक सवालों को सांप्रदायिक रंग देती है — जो लोकतांत्रिक विमर्श के लिए चिंताजनक प्रवृत्ति है।
RashtraPress
5 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे की संयुक्त रैली किस मुद्दे पर थी?
यह रैली मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग और विशेष सारांश पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के विरोध में 5 अक्टूबर 2026 को मुंबई में आयोजित की गई। दोनों ठाकरे गुटों ने पहली बार इस मुद्दे पर साझा मंच साझा किया।
नितेश राणे ने आदित्य ठाकरे पर क्या आरोप लगाए?
BJP मंत्री नितेश राणे ने दावा किया कि आदित्य ठाकरे देश छोड़ने की तैयारी में हैं और दिशा सालियान केस व दिनो मोरिया की गिरफ्तारी के कारण उन्हें जेल का डर है। राणे ने यह भी दावा किया कि आदित्य का नाम एक कथित हत्या और सामूहिक बलात्कार मामले में 13 बार एफआईआर में दर्ज है — ये आरोप अभी स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हैं।
नितेश राणे ने चुनाव आयोग पर उद्धव के सवाल का क्या जवाब दिया?
उद्धव ठाकरे ने पूछा था कि राष्ट्रपति चुनाव की तरह चुनाव आयुक्त का चुनाव क्यों नहीं होता, जिस पर राणे ने कहा कि 'उद्धव ठाकरे और दिमाग का कभी कोई संबंध नहीं रहा।' उन्होंने उद्धव को चुनाव आयोग पर सवाल उठाने के बजाय रैली से आदित्य की अनुपस्थिति का जवाब देने को कहा।
एसआईआर (SIR) क्या है और इसका विरोध क्यों हो रहा है?
एसआईआर यानी विशेष सारांश पुनरीक्षण वह प्रक्रिया है जिसके तहत चुनाव आयोग मतदाता सूचियों को अद्यतन करता है। विपक्षी दलों का आरोप है कि इस प्रक्रिया में वास्तविक मतदाताओं के नाम काटे जा रहे हैं, जबकि भाजपा का तर्क है कि यह अवैध मतदाताओं को सूची से बाहर करने के लिए जरूरी कदम है।
क्या रैली आयोजकों पर वाकई मुकदमा दर्ज होगा?
नितेश राणे ने चेतावनी दी है कि अगर रैली बिना अनुमति के निकाली गई तो आयोजकों पर केस दर्ज होगा। हालाँकि, अब तक किसी एफआईआर की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और यह देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है।
राष्ट्र प्रेस
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