3 अक्टूबर 2026
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संजय राउत का बड़ा ऐलान: 'लाठी-गोली से नहीं रुकेंगे', जनवरी-फरवरी में देश बदलेगा

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संजय राउत का बड़ा ऐलान: 'लाठी-गोली से नहीं रुकेंगे', जनवरी-फरवरी में देश बदलेगा

सारांश

संजय राउत का तीखा बयान — 'लाठी, गोली या बंदूक, हमें कोई नहीं रोक सकता।' शिवाजी पार्क प्रदर्शन के बाद मुंबई में बोले राउत ने जनवरी-फरवरी तक बड़े राजनीतिक बदलाव का दावा किया और प्रधानमंत्री-गृह मंत्री के जाने की भविष्यवाणी की।

मुख्य बातें

संजय राउत ने 3 अक्टूबर 2026 को मुंबई में कहा कि लाठी-गोली से विरोध प्रदर्शन नहीं रोका जा सकता।
राउत ने दावा किया कि जनवरी-फरवरी 2027 तक देश में बड़े राजनीतिक बदलाव होंगे और प्रधानमंत्री-गृह मंत्री को पद छोड़ना होगा।
2 अक्टूबर को मुंबई के शिवाजी पार्क में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग को लेकर प्रदर्शन हुआ था।
मुंबई पुलिस ने सुरक्षा और साइलेंस जोन का हवाला देते हुए प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी थी, फिर भी भारी भीड़ जुटी।
राउत ने कैप्टन स्मित मच्छार की 35,000 फीट की ऊँचाई पर आतंकवादी से मुकाबले की बहादुरी की सराहना की।

शिवसेना (यूबीटी) के राज्यसभा सदस्य संजय राउत ने 3 अक्टूबर 2026 को मुंबई में मीडिया से बातचीत के दौरान सरकार को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि विपक्षी आंदोलन को किसी भी बल प्रयोग से नहीं दबाया जा सकता। उन्होंने दावा किया कि जनवरी-फरवरी 2027 तक देश में बड़े राजनीतिक बदलाव होंगे और प्रधानमंत्री व गृह मंत्री को पद छोड़ना होगा।

राउत के तीखे बोल

राउत ने कहा, 'चाहे लाठी हो, गोली हो या बंदूक, आप हमें रोक नहीं सकते। आपने कल जंतर मंतर पर जो हुआ देखा और मुंबई में स्थिति देखी। इतनी तानाशाही थी, फिर भी युवा एकजुट हुए। लोगों ने गिरफ्तारियाँ दी और जेल गए। लाठी क्या कर सकती है? आगे बढ़ो और गोलियाँ चलाओ। आपने गोलियाँ चलाई हैं और पैलेट गन का भी इस्तेमाल किया है, लेकिन लोग नहीं रुकते।' उन्होंने यह भी कहा कि 'अब प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को जाना होगा।'

यह ऐसे समय में आया है जब विपक्षी दलों और नागरिक संगठनों की ओर से चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने वाले प्रदर्शनों की संख्या बढ़ रही है। गौरतलब है कि राउत के ये बयान 2 अक्टूबर 2026 को मुंबई के शिवाजी पार्क में हुए विरोध प्रदर्शन के अगले दिन आए हैं।

शिवाजी पार्क प्रदर्शन का संदर्भ

2 अक्टूबर 2026 को मुंबई के शिवाजी पार्क में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दिपके की अगुवाई में प्रदर्शन हुआ था। इस प्रदर्शन की मुख्य माँग मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली — विशेषकर मतदाता सूची के पुनरीक्षण और पारदर्शिता — पर सवाल उठाना था।

मुंबई पुलिस ने सुरक्षा, ट्रैफिक और साइलेंस जोन का हवाला देते हुए इस प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार कर दिया था। बावजूद इसके, भारी संख्या में समर्थक वहाँ एकत्र हुए। इसी आधार पर राउत ने सरकार पर तानाशाही का आरोप लगाया है।

सरकार पर तानाशाही का आरोप

राउत ने आरोप लगाया कि अनुमति न देकर और पुलिस बल का प्रयोग कर सरकार ने लोकतांत्रिक आवाज़ों को दबाने की कोशिश की। आलोचकों का कहना है कि विपक्षी प्रदर्शनों पर इस तरह की पाबंदियाँ नागरिक अधिकारों पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। यह पहली बार नहीं है जब राउत ने केंद्र सरकार पर इस तरह के आरोप लगाए हों — वे लगातार विपक्षी एकता के सूत्रधार के रूप में सक्रिय रहे हैं।

कैप्टन स्मित मच्छार की सराहना

इसी प्रेस वार्ता में राउत ने कैप्टन स्मित मच्छार की बहादुरी की भी खुलकर तारीफ की। उन्होंने कहा, 'कैप्टन स्मित मच्छार ने बहुत अच्छा काम किया है। ज़मीन से करीब 35,000 फीट ऊपर ऐसा फैसला लेना और आतंकवादी से लड़ना बहुत बड़ी बात है। वह एक भारतीय हैं, किसी खास राज्य से ताल्लुक रखने वाले नहीं हैं।' राउत ने कहा कि यह साहस पूरे देश के लिए गर्व की बात है।

आगे क्या होगा

राउत के बयान से स्पष्ट है कि विपक्षी खेमा आने वाले महीनों में आंदोलन की तीव्रता बढ़ाने की योजना में है। जनवरी-फरवरी 2027 का उल्लेख राजनीतिक रूप से महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि यह अवधि कई राज्यों में संभावित राजनीतिक गतिविधियों के लिहाज़ से संवेदनशील मानी जा रही है। देखना होगा कि सत्तापक्ष इस चुनौती का किस तरह जवाब देता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

ठोस रोडमैप नहीं — लेकिन इसे खारिज करना भी जल्दबाज़ी होगी। विपक्ष की इस आक्रामकता के पीछे चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर बढ़ता असंतोष है, जो सिर्फ एक पार्टी का नहीं, बल्कि व्यापक नागरिक चिंता का विषय बन चुका है। शिवाजी पार्क प्रदर्शन को अनुमति न देना और फिर भी भीड़ का उमड़ना सरकार के लिए एक संकेत है कि दमन से आंदोलन कमज़ोर नहीं, बल्कि और मुखर होता है। मुख्यधारा की कवरेज जो चूक जाती है वह यह है कि राउत का असली निशाना चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता है — और यह मुद्दा दलगत राजनीति से परे जनतंत्र की जड़ों को छूता है।
RashtraPress
3 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

संजय राउत ने लाठी-गोली वाला बयान किस संदर्भ में दिया?
यह बयान 3 अक्टूबर 2026 को मुंबई में मीडिया से बातचीत के दौरान आया, जो एक दिन पहले शिवाजी पार्क में हुए विरोध प्रदर्शन की पृष्ठभूमि में था। राउत ने कहा कि पुलिस बल प्रयोग के बावजूद युवा एकजुट रहे और आंदोलन जारी रहेगा।
शिवाजी पार्क प्रदर्शन क्यों हुआ और इसकी मुख्य माँग क्या थी?
2 अक्टूबर 2026 को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दिपके की अगुवाई में यह प्रदर्शन हुआ। इसकी मुख्य माँग मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता थी।
मुंबई पुलिस ने शिवाजी पार्क प्रदर्शन की अनुमति क्यों नहीं दी?
मुंबई पुलिस ने सुरक्षा, ट्रैफिक और इलाके के साइलेंस जोन होने का हवाला देते हुए अनुमति देने से इनकार किया था। अनुमति न मिलने के बावजूद भारी संख्या में समर्थक एकत्र हुए, जिसे राउत ने जनशक्ति का प्रमाण बताया।
राउत ने जनवरी-फरवरी में बड़े बदलाव का दावा क्यों किया?
राउत ने कहा कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को जाना होगा और जनवरी-फरवरी 2027 तक देश में बड़े राजनीतिक बदलाव होंगे। यह दावा उन्होंने बढ़ते विपक्षी आंदोलन और युवाओं की एकजुटता के संदर्भ में किया, हालाँकि इसका कोई ठोस विवरण नहीं दिया।
संजय राउत ने कैप्टन स्मित मच्छार की तारीफ क्यों की?
राउत ने कहा कि कैप्टन स्मित मच्छार ने ज़मीन से करीब 35,000 फीट ऊपर आतंकवादी से लड़कर बहादुरी का अनुकरणीय उदाहरण पेश किया। उन्होंने कहा कि यह साहस पूरे देश के लिए गर्व की बात है और कैप्टन मच्छार किसी एक राज्य के नहीं, पूरे भारत के हीरो हैं।
राष्ट्र प्रेस
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