संजय राउत का बड़ा दावा: मार्च अप्रैल 2027 तक गिर जाएगी मोदी सरकार, दिल्ली नाकाबंदी पर हमला
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के सांसद संजय राउत ने 10 अक्टूबर 2026 को पुणे में पत्रकारों से बातचीत करते हुए दावा किया कि केंद्र सरकार अगले साल मार्च अप्रैल तक गिर जाएगी। यह बयान ऐसे समय में आया है जब मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के विरोध में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रदर्शनकारियों को दिल्ली पहुँचने से रोके जाने को लेकर देशभर में राजनीतिक तनाव बढ़ा हुआ है।
राउत का केंद्र पर सीधा हमला
राउत ने चल रहे प्रदर्शनों को 'जन विद्रोह' करार देते हुए आरोप लगाया कि केंद्र सरकार युवा नागरिकों और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों से भयभीत है। उन्होंने कहा, "यह सरकार टिक नहीं पाएगी। मार्च और अप्रैल के बीच मोदी सरकार का अंत हो जाएगा और एक नई सरकार बनेगी।"
उन्होंने दिवंगत अभिनेता नाना पाटेकर के एक मशहूर कथन का हवाला देते हुए व्यंग्यात्मक शब्दों में कहा कि एक 'तिलचट्टा' भी सरकार को शक्तिहीन बना सकता है। राउत ने आरोप लगाया कि मौजूदा सत्ता में बैठे लोग मजबूत राजनेता नहीं, बल्कि केवल व्यापारी हैं — और व्यापारी जल्दी घबरा जाते हैं।
दिल्ली नाकाबंदी पर गंभीर आरोप
राउत ने दावा किया कि केंद्र सरकार ने दिल्ली को प्रभावी रूप से 'जम्मू कश्मीर' जैसी स्थिति में बदल दिया है, जहाँ लगभग 15,000 वाहन शहर के बाहर फँसे हुए हैं और प्रदर्शनकारियों को राजधानी पहुँचने से रोकने के लिए ट्रेनें भी रोकी गई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यह ब्रिटिशकालीन दमनकारी रणनीतियों की याद दिलाता है।
उन्होंने सवाल किया, "ब्रिटिश शासनकाल में भी इतने बड़े पैमाने पर नाकाबंदी नहीं देखी गई थी। हज़ारों वाहन चारों ओर फँसे हुए हैं। आप किस कानून के तहत प्रदर्शनकारी युवाओं को देशद्रोही और राष्ट्रविरोधी करार दे रहे हैं?"
सीजेपी प्रमुख की हिरासत
सीजेपी प्रमुख अभिजीत दिपके 10 अक्टूबर को दिल्ली हवाई अड्डे पहुँचे, जहाँ पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। यह घटना प्रदर्शन से जुड़े व्यापक राजनीतिक तनाव को और गहरा करती है। राउत ने इस हिरासत को लोकतांत्रिक मूल्यों पर हमला बताया।
दिल्ली पुलिस से अपील
राउत ने दिल्ली पुलिस से आग्रह किया कि वह केंद्र सरकार द्वारा जारी 'अवैध आदेशों' का पालन न करे। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार मतदाता हेरफेर और राज्य मशीनरी के दुरुपयोग पर निर्भर है। गौरतलब है कि यह पहला मौका नहीं है जब विपक्षी नेताओं ने प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा बलों की तैनाती पर सवाल उठाए हों।
राजनीतिक संदर्भ
राउत के इस बयान को व्यापक विपक्षी रणनीति के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है, जो मोदी सरकार को चुनाव आयोग विवाद के बहाने घेरने की कोशिश कर रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब शिवसेना (यूबीटी) और अन्य विपक्षी दल संयुक्त रूप से केंद्र पर संस्थागत दुरुपयोग के आरोप लगा रहे हैं। आने वाले दिनों में यह विवाद और तूल पकड़ सकता है।