उद्धव ठाकरे 'पाकिस्तानी एजेंटों' जैसी भाषा बोलते हैं: मंत्री नितेश राणे का तीखा हमला
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र सरकार में मंत्री और भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता नितेश राणे ने 3 जुलाई 2026 को मुंबई में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे पर तीखे आरोप लगाए। राणे ने दावा किया कि ठाकरे की राजनीतिक भाषा पाकिस्तान समर्थक तत्वों जैसी हो गई है और उन्हें 'उद्धव उल्ला हक' तथा 'उद्धव अल हक' जैसे नामों से संबोधित किया।
मुख्य आरोप और बयान
राणे ने कहा, 'जैसे पाकिस्तान में लोग भारत के खिलाफ बोलते हैं, उसी तरह उद्धव ठाकरे भी बोलते हैं। वह सिर्फ पाकिस्तान में बैठे अपने 'अब्बा' को खुश करने के लिए ऐसे बयान दे रहे हैं।' उन्होंने यह भी दावा किया कि राम मंदिर के मुद्दे पर ठाकरे की भाषा ओसामा बिन लादेन जैसी लगती है। BJP के अनुसार, राम मंदिर को कभी चुनावी हथियार के रूप में नहीं देखा गया।
राम रक्षा आंदोलन की पृष्ठभूमि
यह विवाद तब उभरा जब उद्धव ठाकरे ने राम मंदिर में दान राशि के कथित गबन के विरोध में 5 जुलाई को दादर स्थित हनुमान मंदिर के पास 'राम रक्षा' आंदोलन का ऐलान किया था। राणे ने इस घोषणा को ठाकरे की 'राजनीतिक अस्तित्व बचाने की कोशिश' करार दिया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ठाकरे के मुख्यमंत्री कार्यकाल में हिंदू मंदिरों को बंद रखा गया था।
मंदिर शुद्धिकरण की विवादास्पद टिप्पणी
राणे ने एक और विवादास्पद बयान देते हुए कहा, 'उद्धव ठाकरे जिस भी मंदिर में जाएं, उसके बाद वहां गंगाजल या गोमूत्र से शुद्धिकरण किया जाना चाहिए। उनका भगवान राम से कोई संबंध नहीं है।' राणे ने यह भी कहा कि चाहे ठाकरे कितनी भी महाआरती करें, उनका 'राजनीतिक धर्मांतरण' हो चुका है।
BJP प्रवक्ता की प्रतिक्रिया
महाराष्ट्र BJP के प्रवक्ता राम कुलकर्णी ने भी ठाकरे के हिंदुत्व पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, 'उद्धव ठाकरे को हनुमान चालीसा या राम रक्षा स्तोत्र पढ़ने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। उनकी सरकार ने केवल हनुमान चालीसा और राम रक्षा स्तोत्र का पाठ करने वाले रामभक्तों को जेल भेजा था।' कुलकर्णी ने राम मंदिर में हुई हालिया चोरी की घटना को एक अलग प्रकरण बताते हुए कहा कि पुलिस जांच जारी है और दोषियों को सख्त सजा मिलेगी।
आगे क्या होगा
गौरतलब है कि यह विवाद महाराष्ट्र की राजनीति में हिंदुत्व की विचारधारा पर बढ़ते वर्चस्व की लड़ाई का हिस्सा है। 5 जुलाई को प्रस्तावित 'राम रक्षा' आंदोलन और उस पर BJP की प्रतिक्रिया यह तय करेगी कि यह टकराव किस दिशा में जाता है। शिवसेना (यूबीटी) की ओर से अभी तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।