क्या उद्धव ठाकरे मुस्लिम तुष्टिकरण कर रहे हैं, जबकि बालासाहेब ने इसका विरोध किया था? : सीएम देवेंद्र फडणवीस
सारांश
Key Takeaways
- उद्धव ठाकरे पर हिंदुत्व छोड़ने का आरोप।
- राज-उद्धव ठाकरे के लिए पार्टी की जमीन बचाना मुश्किल।
- मराठी वोटर्स की सोच व्यापक है।
- सीएम ने उठाए गंभीर सवाल।
- राज ठाकरे की स्थिति कमजोर।
मुंबई, 14 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे पर तीखा हमला किया है। उन्होंने कहा कि उद्धव ठाकरे ने हिंदुत्व को छोड़ दिया है और वे वही कर रहे हैं, जिसका बालासाहेब ठाकरे ने जीवन भर विरोध किया।
सीएम देवेंद्र फडणवीस ने राष्ट्र प्रेस से एक विशेष बातचीत में कहा कि 25 वर्षों तक मुंबई में सत्ता में रहने के बाद उनके पास कोई काम बताने के लिए नहीं है। मैंने उनके एक काम को गिनाने के लिए एक हजार रुपए का इनाम रखा था, लेकिन कोई नहीं आया। मैंने राशि को बढ़ाकर सात हजार रुपए कर दिया, फिर भी कोई सामने नहीं आया।
उन्होंने कहा कि राज-उद्धव ठाकरे के लिए पार्टियों की जमीन बचाना मुश्किल हो गया है। दोनों पार्टियाँ जमीन खो रही हैं। उन्हें लगा कि साथ आना जरूरी है, लेकिन मराठी वोटर व्यापक सोच वाला होता है, संकुचित नहीं।
उन्होंने कहा कि हमने उनके खिलाफ दो चुनाव लड़े और मुंबई में सबसे बड़ी पार्टी बने। मराठी वोटरों ने हमें समर्थन दिया, लेकिन दोनों भाइयों का मानना था कि साथ आने से उनकी खोई हुई जमीन वापस मिलेगी, लेकिन ऐसा नहीं होगा। वे बार-बार कहते हैं कि यह मराठीजनों के अस्तित्व की लड़ाई है, जबकि यह केवल इन दोनों भाइयों के अस्तित्व की लड़ाई है।
उन्होंने राज ठाकरे के बारे में कहा कि वह सबसे बड़े ‘लूजर’ बनने जा रहे हैं। गठबंधन में राज ठाकरे का लाभ उद्धव ठाकरे को होगा, लेकिन उद्धव का लाभ राज ठाकरे को नहीं होगा।
सीएम ने उद्धव ठाकरे पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि उनकी रैली में पाकिस्तान के झंडे लहराए जाते हैं। बम विस्फोट के आरोपी वोट मांगते हैं। छत्रपति संभाजीनगर में रशीद मामू को टिकट दिया जाता है। अब उनके लोग मस्जिदों में जाकर कह रहे हैं कि अगर उद्धव ठाकरे जीतते हैं तो मस्जिदों के लाउडस्पीकर फिर से लगवाएंगे। ये सारी बातें क्या इशारा करती हैं?
उन्होंने कहा कि हम हिंदुत्ववादी हैं, लेकिन हमारा हिंदुत्व संकुचित नहीं है। हम हमेशा कहते हैं कि जो भारत की संस्कृति को अपनी संस्कृति मानता है, हम उसे हिंदू मानते हैं, लेकिन उद्धव ठाकरे द्वारा शुरू किया गया मुस्लिम तुष्टिकरण हमें मंजूर नहीं है। बालासाहेब ने जिसका विरोध किया, अब वही करने की कोशिश हो रही है। इसलिए मुझे लगता है कि उन्होंने हिंदुत्व छोड़ दिया है।