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ग्रेटर नोएडा में अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी मॉड्यूल का भंडाफोड़, दो विदेशी नागरिक गिरफ्तार

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ग्रेटर नोएडा में अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी मॉड्यूल का भंडाफोड़, दो विदेशी नागरिक गिरफ्तार

सारांश

ग्रेटर नोएडा में साइबर क्राइम टीम ने एक अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी के मॉड्यूल का पर्दाफाश किया है। दो विदेशी नागरिक गिरफ्तार हुए हैं, जो 'सोलर स्पाइडर' से जुड़े हैं। जानें, कैसे पुलिस ने इस गिरोह को पकड़ा।

मुख्य बातें

साइबर ठगी का बढ़ता खतरा गौतमबुद्ध नगर पुलिस की तत्परता सहकारी बैंकों की सुरक्षा प्रणाली में कमजोरियों की पहचान आरोपियों की अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन साइबर सुरक्षा को मजबूत करने की आवश्यकता

ग्रेटर नोएडा, 12 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। गौतमबुद्ध नगर पुलिस कमिश्नरेट की साइबर अपराध टीम, थाना नॉलेज पार्क पुलिस और मेरठ जोन की साइबर कमांडो टीम ने मिलकर एक बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी के मॉड्यूल का खुलासा किया है। इस कार्रवाई के दौरान पुलिस ने दो विदेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया है, जो अंतरराष्ट्रीय साइबर खतरनाक अभिनेता "सोलर स्पाइडर" से जुड़े बताए जा रहे हैं।

पुलिस के अनुसार, गोपनीय इंटेलिजेंस इनपुट के आधार पर जानकारी मिली थी कि यह साइबर गिरोह पिछले सप्ताह से सक्रिय हो गया है और कुछ सहकारी बैंकों की सुरक्षा प्रणाली में मौजूद कमजोरियों का फायदा उठाकर बड़े पैमाने पर साइबर ठगी करने की योजना बना रहा था। इसके बाद पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए इस मॉड्यूल को ध्वस्त कर दिया।

जांच में पाया गया कि आरोपियों की योजना लक्षित सहकारी बैंकों से लगभग 60 से 80 करोड़ रुपये की राशि अवैध तरीके से म्यूल खातों में ट्रांसफर करने की थी। इसके बाद इस धनराशि को क्रिप्टो करेंसी के माध्यम से विदेश भेजने की तैयारी की जा रही थी। पुलिस की समय पर की गई कार्रवाई से इस बड़े साइबर धोखाधड़ी को रोक दिया गया।

पूछताछ के दौरान यह भी सामने आया कि आरोपियों ने 7 से 8 मार्च के बीच गुजरात के भावनगर स्थित एक सहकारी बैंक के सर्वर में सेंध लगाकर लगभग 7 करोड़ रुपये की ठगी की थी। आरोपी जानबूझकर सप्ताह के अंत में लेनदेन करते थे, ताकि बैंक बंद रहने के कारण धोखाधड़ी का पता देर से चल सके और पैसे आसानी से विदेश भेजे जा सकें।

पुलिस जांच में यह भी पता चला है कि दोनों आरोपी लगभग एक वर्ष पहले भारत आए थे और दो दिन पहले ही ग्रेटर नोएडा में किराए पर एक कमरा लिया था, जहां से वे साइबर ठगी के नेटवर्क का संचालन करने की योजना बना रहे थे।

इस पूरे मामले की जानकारी तुरंत गृह मंत्रालय की इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (आई4सी) को दी गई, साथ ही संबंधित बैंकों को भी अलर्ट किया गया ताकि भविष्य में होने वाले किसी भी संदिग्ध लेनदेन को रोका जा सके।

प्रारंभिक जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि इस साइबर गिरोह के तार अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़े हो सकते हैं और इसका संबंध नाइजीरिया और दक्षिण अफ्रीका में सक्रिय साइबर अपराधियों से हो सकता है। पुलिस अब उन लोगों की भी तलाश कर रही है, जो म्यूल अकाउंट उपलब्ध कराते हैं या भारत में बैठकर इस नेटवर्क की मदद कर रहे हैं।

घटना को देखते हुए पुलिस ने सभी सहकारी बैंकों के लिए एडवाइजरी जारी करते हुए साइबर सुरक्षा प्रणाली को और मजबूत करने, सर्वर की सुरक्षा बढ़ाने और संभावित कमजोरियों की नियमित समीक्षा करने की सलाह दी है। फिलहाल गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है और पुलिस इस अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुटी हुई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह भी आवश्यक है कि बैंकों और अन्य संस्थाएं अपनी सुरक्षा प्रणाली को मजबूत करें।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस साइबर ठगी में कितनी राशि शामिल थी?
आरोपियों की योजना लक्षित सहकारी बैंकों से लगभग 60 से 80 करोड़ रुपये की राशि अवैध तरीके से म्यूल खातों में ट्रांसफर करने की थी।
कौन से विदेशी नागरिक गिरफ्तार हुए हैं?
पुलिस ने दो विदेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया है, जो अंतरराष्ट्रीय साइबर थ्रेट एक्टर 'सोलर स्पाइडर' से जुड़े बताए जा रहे हैं।
पुलिस ने इस गिरोह को कैसे पकड़ा?
पुलिस ने गोपनीय इंटेलिजेंस इनपुट के आधार पर इस गिरोह की गतिविधियों का पता लगाया और तत्काल कार्रवाई की।
साइबर ठगी की योजना क्या थी?
आरोपियों ने सहकारी बैंकों से धनराशि का अवैध ट्रांसफर करने की योजना बनाई थी, जिसे क्रिप्टो करेंसी के माध्यम से विदेश भेजने की तैयारी थी।
क्या यह गिरोह अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़ा है?
प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि इस गिरोह के तार अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़े हो सकते हैं, विशेषकर नाइजीरिया और दक्षिण अफ्रीका में।
राष्ट्र प्रेस
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