क्या ग्रेटर नोएडा में फर्जी आईएसओ सर्टिफिकेट गिरोह का भंडाफोड़ हुआ?

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क्या ग्रेटर नोएडा में फर्जी आईएसओ सर्टिफिकेट गिरोह का भंडाफोड़ हुआ?

सारांश

ग्रेटर नोएडा में फर्जी आईएसओ सर्टिफिकेट गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है। पुलिस ने 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया और उनके पास से कई फर्जी दस्तावेज बरामद किए। जानिए कैसे यह गिरोह कंपनियों को धोखा देकर करोड़ों की ठगी कर रहा था।

मुख्य बातें

फर्जी आईएसओ सर्टिफिकेट का उपयोग कर धोखाधड़ी।
सोशल मीडिया का दुरुपयोग।
पुलिस की सक्रियता से गिरोह का भंडाफोड़।
धोखाधड़ी की बढ़ती घटनाएं।
कंपनियों को सतर्क रहने की आवश्यकता।

ग्रेटर नोएडा, 10 जुलाई (राष्ट्र प्रेस)। ग्रेटर नोएडा के थाना बिसरख की पुलिस ने एक संगठित साइबर ठग गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जो कंपनियों को ब्रांडिंग और डिजिटल मार्केटिंग के नाम पर धोखा देकर फर्जी आईएसओ सर्टिफिकेट तैयार कर रहा था। पुलिस ने इस गिरोह के 6 सदस्यों को गिरफ्तार किया है। इनके पास से 9 लैपटॉप, एक टैबलेट, 8 मोबाइल फोन, एक स्वाइप मशीन और लगभग 60 फर्जी दस्तावेज बरामद हुए हैं।

जानकारी के अनुसार, यह गिरोह अब तक 68 लाख रुपए की ठगी कर चुका है। इस गिरोह का फर्जीवाड़ा तब उजागर हुआ, जब इंडिको रिटेल प्राइवेट लिमिटेड के संचालक ने थाना बिसरख में शिकायत दर्ज कराई कि उसने अपने उत्पादों की ब्रांडिंग के लिए 'ब्रांडौलाजी मार्केटिंग प्राइवेट लिमिटेड' से संपर्क किया था। आरोपियों ने कंपनी को डिजिटल प्रचार, आईएसओ सर्टिफिकेशन और बिक्री बढ़ाने का झांसा देकर 3.28 लाख रुपए ठग लिए, लेकिन न तो कोई ब्रांडिंग की गई और न ही वैध प्रमाण पत्र प्रदान किया गया।

पुलिस का कहना है कि आरोपी सोशल मीडिया पर आकर्षक विज्ञापन चलाकर कंपनियों को अपने जाल में फंसाते थे। आईएसओ सर्टिफिकेट, वेबसाइट डिजाइनिंग, बारकोड, प्रमोशनल वीडियो और डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क का झांसा देकर वे पैसे वसूलते थे। बाद में फर्जी आईएसओ सर्टिफिकेट इंटरनेट से डाउनलोड कर एडिटिंग करके एक दिन में तैयार कर देते थे। जब ग्राहक बार-बार पूछते थे, तो उन्हें गुणवत्ता खराब बताकर आईएसओ प्रमाण पत्र न मिलने का धोखा दिया जाता था।

इस गिरोह का सरगना मयंक तिवारी है, जो कंपनी का डायरेक्टर भी है। यह फर्जी दस्तावेज तैयार करने और योजना बनाने में मुख्य भूमिका निभाता था। विकास शर्मा, जो कंपनी में सेल्स एग्जीक्यूटिव है, लैपटॉप और मोबाइल से सर्टिफिकेट तैयार करता था। प्रदीप कुमार यादव भी तीन वर्षों से गिरोह से जुड़ा हुआ है। अविनाश गिरी एक वेबसाइट डेवलपर है, जो कंपनी की फर्जी वेबसाइट पर गुमराह करने वाला डेटा डालता था।

गैंग का प्रदीप यादव विज्ञापन संभालता था और केशव कस्टमर रिलेशन मैनेजर था, जो फर्जी आईएसओ प्रमाणपत्र बनाकर सत्यता दिखाने के लिए नकली वेबसाइट तैयार करता था। यह गिरोह पहले सेक्टर-63 में 'भारत का डिस्ट्रीब्यूटर' नाम से सक्रिय था। जब वहां शिकायत दर्ज हुई, तो उन्होंने ग्रेटर नोएडा के एनएक्स वन टॉवर में 'ब्रांडौलाजी मार्केटिंग प्राइवेट लिमिटेड' के नाम से नया कार्यालय खोल लिया।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

फर्जी आईएसओ सर्टिफिकेट क्या होता है?
यह एक ऐसा प्रमाण पत्र है जो बिना मानकों को पूरा किए जारी किया जाता है, जिससे कंपनियों को धोखा दिया जाता है।
इस गिरोह ने कितनी ठगी की है?
इस गिरोह ने अब तक 68 लाख रुपए की ठगी की है।
पुलिस ने क्या कार्रवाई की है?
पुलिस ने 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया और उनके पास से कई फर्जी दस्तावेज बरामद किए।
यह गिरोह कैसे काम करता था?
यह गिरोह सोशल मीडिया पर आकर्षक विज्ञापन चलाकर कंपनियों को धोखा देता था।
किस प्रकार के दस्तावेज बरामद हुए?
पुलिस ने 9 लैपटॉप, एक टैबलेट और 8 मोबाइल फोन के साथ फर्जी दस्तावेज बरामद किए।
राष्ट्र प्रेस
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