मुंबई में ECI विरोध मार्च आज: राज और उद्धव ठाकरे करेंगे नेतृत्व, SIR प्रक्रिया रद्द करने की माँग
सारांश
मुख्य बातें
मुंबई में 4 अक्टूबर 2026 (रविवार) को भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के खिलाफ एक बड़ा जन-विरोध मार्च आयोजित किया जा रहा है, जिसका नेतृत्व महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे और शिवसेना (UBT) नेता उद्धव ठाकरे मिलकर करेंगे। यह मार्च वोटर लिस्ट में कथित हेरफेर और चुनावी रोल की 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (SIR) प्रक्रिया में संरचनात्मक गड़बड़ियों के विरोध में आयोजित किया गया है। आयोजकों ने मेट्रो सिनेमा से मार्च की शुरुआत की घोषणा की है।
मार्च की पृष्ठभूमि और माँगें
शनिवार को शिवसेना (UBT) और MNS ने संयुक्त बयान जारी करते हुए चुनाव आयोग पर मतदाताओं को धोखा देने और केंद्र में सत्ताधारी दल की एक शाखा की तरह कार्य करने का गंभीर आरोप लगाया। दोनों पार्टियों ने SIR प्रक्रिया को तत्काल रद्द करने की माँग रखी है। राज ठाकरे ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर भी निशाना साधा और कहा कि सत्ताधारी पार्टी अपनी राजनीतिक पकड़ बनाए रखने के लिए संवैधानिक संस्थाओं का दुरुपयोग कर रही है।
गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में EVM की विश्वसनीयता और मतदाता सूचियों की पारदर्शिता को लेकर विपक्षी दलों में व्यापक असंतोष पहले से मौजूद है। राज ठाकरे ने सभी विपक्षी दलों से पेपर बैलेट की वापसी के लिए एक राष्ट्रव्यापी आंदोलन खड़ा करने की भी अपील की।
एकजुट विपक्षी मोर्चे की कोशिश
आयोजकों ने स्पष्ट किया कि यह विरोध प्रदर्शन किसी एक पार्टी की राजनीति तक सीमित नहीं है। बयान में कहा गया, 'यह जनता की रैली है। यह सुनिश्चित करने के लिए कि यह किसी एक पार्टी तक सीमित न रहे, बल्कि पूरे राजनीतिक सिस्टम और नागरिकों की सामूहिक आवाज बने, हम इस मोर्चे में शामिल होने के लिए सभी राजनीतिक दलों से संपर्क करेंगे।'
हालांकि MNS और शिवसेना (UBT) संगठनात्मक तैयारी में अगुवाई कर रहे हैं, नेताओं ने जोर दिया कि इस मंच पर सभी विचारधाराओं के दलों का स्वागत है। यह उल्लेखनीय है कि राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे — दोनों के बीच वर्षों से राजनीतिक दूरी रही है — इस मुद्दे पर एक मंच पर आना अपने आप में एक राजनीतिक संदेश है।
आम जनता से सीधी अपील
बयान में नागरिकों से मुंबई की सड़कों पर बड़ी संख्या में उतरने की अपील की गई और इस आंदोलन को देश के लोकतांत्रिक ढाँचे तथा संस्थागत अखंडता की रक्षा के लिए एक निर्णायक अवसर बताया गया। बयान का समापन इन शब्दों से हुआ: 'इस रैली में बड़ी संख्या में शामिल हों। देश के लोकतंत्र और संविधान को बचाने के लिए एकजुट हों!'
क्या होगा आगे
यह मार्च महाराष्ट्र की राजनीति में ECI और SIR प्रक्रिया के खिलाफ विपक्ष की एकजुटता का पहला बड़ा सार्वजनिक प्रदर्शन हो सकता है। कथित तौर पर आयोजक इसे एक व्यापक राष्ट्रीय आंदोलन का आधार बनाने की योजना बना रहे हैं। मार्च में भागीदारी की संख्या और विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया यह तय करेगी कि यह विरोध राज्य स्तर पर सिमटता है या राष्ट्रीय रूप लेता है।