चुनाव आयोग के खिलाफ 4 अक्टूबर मार्च: एनसीपी-एसपी शिवसेना यूबीटी और एमएनएस के साथ उतरेगी सड़क पर
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) — जिसे एनसीपी-एसपी के नाम से जाना जाता है — ने घोषणा की है कि वह 4 अक्टूबर 2026 को मुंबई में आयोजित उस विरोध मार्च में शामिल होगी, जो ठाकरे परिवार के नेतृत्व में भारतीय चुनाव आयोग (ईसीआई) के विरुद्ध निकाला जा रहा है। पार्टी के राज्य अध्यक्ष शशिकांत शिंदे ने गुरुवार, 1 अक्टूबर को यह जानकारी देते हुए बताया कि पदाधिकारी, कार्यकर्ता और समर्थक बड़ी संख्या में इस मार्च में भाग लेंगे।
मार्च का मार्ग और मुख्य माँग
यह विरोध मार्च बायकुला स्थित रिचर्डसन एंड क्रूडस कंपनी परिसर से शुरू होकर बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) मुख्यालय तक जाएगा। मार्च की केंद्रीय माँग मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा है। उल्लेखनीय है कि इस प्रदर्शन में भाग लेने वाले एनसीपी-एसपी कार्यकर्ता पार्टी के झंडे नहीं उठाएंगे, बल्कि जनहित में एकजुट होकर सड़कों पर उतरेंगे।
राजनीतिक पृष्ठभूमि और गठबंधन की एकता
महा विकास अघाड़ी (MVA) की बैठक के बाद शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे और शरद पवार के बीच विस्तृत चर्चा हुई। पवार ने सभी पार्टी कार्यकर्ताओं को इस मार्च में पूरी ताकत से भाग लेने का निर्देश दिया है। मार्च की तैयारियों के लिए मुंबई, नवी मुंबई और ठाणे के प्रमुख पदाधिकारियों की एक आपातकालीन बैठक भी बुलाई गई है।
यह ऐसे समय में आया है जब विपक्षी दलों में ईवीएम और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर सवाल लगातार उठाए जा रहे हैं। एमएनएस प्रमुख राज ठाकरे ने मंगलवार को उद्धव ठाकरे के साथ एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि ईवीएम में हेराफेरी और चुनावी धांधली की चिंताएं वर्षों से उठाई जाती रही हैं। राज ठाकरे ने यह भी कहा कि 2017-18 में उन्होंने इन मुद्दों पर कई राजनीतिक नेताओं से मुलाकात की थी और यह मार्च 'मतदाताओं के अपमान और चुनावी निष्पक्षता के उल्लंघन के खिलाफ' है।
लोकतांत्रिक विरोध पर शिंदे की चिंता
शिंदे ने कहा कि राज्य और देश में लोकतांत्रिक तरीकों से विरोध करना मुश्किल हो गया है। उनके अनुसार, जब भी सरकार की जनविरोधी नीतियों के विरुद्ध आवाज़ उठाई जाती है, तो सरकारी तंत्र का उपयोग दमनकारी कार्रवाई के लिए किया जाता है और संबंधित व्यक्ति को बदनाम करने की कोशिश होती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी आगामी सभी विरोध प्रदर्शनों में हिस्सा लेती रहेगी।
मराठा आरक्षण और सूखे का मुद्दा भी उठाया
शिंदे ने मराठा आरक्षण का मुद्दा भी उठाया और कहा कि सरकार ने इस संबंध में किए गए वादे अभी तक पूरे नहीं किए हैं। उन्होंने मनोज जरांगे पाटिल का ज़िक्र करते हुए कहा कि जरांगे पाटिल ने सरकार को तीन महीने की समय सीमा दी थी, लेकिन सरकार ने पिछले महीने उन पर दबाव डालने के लिए कार्रवाई की — जो उनके अनुसार 'लोकतंत्र के लिए खतरनाक' है। इसके अलावा, 5 अक्टूबर को महाराष्ट्र में भीषण सूखे की स्थिति की ओर ध्यान आकर्षित करने के लिए राज्यभर के प्रशासन को ज्ञापन सौंपे जाएंगे।
आगे क्या होगा
गौरतलब है कि यह मार्च महाराष्ट्र की राजनीति में एक असामान्य पल है — जहाँ एमएनएस, जो पहले शिवसेना (यूबीटी) की प्रतिद्वंद्वी रही है, अब एक ही मंच पर नजर आ रही है। 4 अक्टूबर के मार्च में राज ठाकरे ने कहा कि वे मंच से सीधे और स्पष्ट बात करेंगे। विपक्षी एकता की यह कोशिश आगामी चुनावी राजनीति पर किस तरह असर डालती है, यह देखने वाली बात होगी।