25 सितंबर 2026
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राज ठाकरे की माँग: SIR प्रक्रिया रद्द हो, बैलेट पेपर के लिए राष्ट्रव्यापी आंदोलन चलाएँ विपक्षी दल

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राज ठाकरे की माँग: SIR प्रक्रिया रद्द हो, बैलेट पेपर के लिए राष्ट्रव्यापी आंदोलन चलाएँ विपक्षी दल

सारांश

MNS प्रमुख राज ठाकरे ने एक्स पर बड़ा हमला बोला — SIR प्रक्रिया को 'मतदाता सूचियों में हेरफेर का नया हथियार' बताते हुए तत्काल रद्द करने की माँग की और सभी विपक्षी दलों से EVM हटाकर बैलेट पेपर बहाली के लिए राष्ट्रव्यापी आंदोलन छेड़ने का आह्वान किया।

मुख्य बातें

MNS अध्यक्ष राज ठाकरे ने 25 सितंबर 2026 को एक्स पर चल रही SIR प्रक्रिया को तत्काल रद्द करने की माँग की।
ठाकरे ने आरोप लगाया कि SIR का इस्तेमाल 2025 से मतदाता सूचियों में हेरफेर के लिए किया जा रहा है।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के पिछले दो दिनों के मौन पर भी सवाल उठाए।
सभी विपक्षी दलों से EVM हटाकर बैलेट पेपर बहाल करने के लिए राष्ट्रव्यापी आंदोलन का आह्वान।
माँग की कि SIR में सामने आई अनियमितताओं की निष्पक्ष जाँच हो और उसके बाद ही नई सत्यापन प्रक्रिया शुरू हो।

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के अध्यक्ष राज ठाकरे ने 25 सितंबर 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर एक बयान जारी कर चुनाव आयोग की चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को तत्काल रद्द करने की माँग की। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूची सत्यापन की इस प्रक्रिया का इस्तेमाल कथित तौर पर चुनावी परिणामों में हेरफेर के लिए किया जा रहा है। साथ ही उन्होंने देशभर के विपक्षी दलों से इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) को हटाकर पारंपरिक कागज़ी मतपत्र प्रणाली बहाल करने के लिए एक राष्ट्रव्यापी आंदोलन छेड़ने का आह्वान किया।

SIR पर राज ठाकरे के आरोप

ठाकरे ने SIR प्रक्रिया को 2025 से मतदाता सूचियों में फेरबदल के लिए अपनाया गया 'नया हथियार' बताया। उनका कहना है कि अब यह चिंताएँ चुनाव आयोग के भीतर से भी उठने लगी हैं। उन्होंने सत्ताधारी दल पर प्रमुख संस्थागत हस्तियों का उपयोग कर सत्ता पर पकड़ बनाए रखने का आरोप भी लगाया।

ठाकरे ने यह भी रेखांकित किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार चुनाव आयोग के भीतर आंतरिक मतभेदों और बढ़ती सार्वजनिक-राजनीतिक जाँच के बीच पिछले दो दिनों से मौन हैं।

बैलेट पेपर के लिए विपक्षी एकता की अपील

ठाकरे ने सभी विपक्षी दलों से एकजुट होने का आग्रह करते हुए कहा कि 'चुनावी पारदर्शिता केवल मतपत्र मतदान के माध्यम से ही सुनिश्चित की जा सकती है।' उन्होंने माँग की कि भविष्य के सभी चुनाव सख्ती से पारंपरिक कागज़ी मतपत्रों के ज़रिये कराए जाएँ।

उन्होंने एक्स पर लिखा, 'वर्तमान में चल रही SIR प्रक्रिया को पूरी तरह रद्द किया जाना चाहिए, सामने आई अनियमितताओं की निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए और उसके बाद ही एक नई सत्यापन प्रक्रिया शुरू की जानी चाहिए।'

राजनीतिक संदर्भ और बढ़ता विवाद

गौरतलब है कि ठाकरे का यह बयान ऐसे समय में आया है जब चुनाव आयोग के भीतर असहमति की खबरें सार्वजनिक चर्चा में हैं। विपक्षी दल लगातार इस दावे को लेकर एकजुट हो रहे हैं कि चुनाव निकाय की संस्थागत स्वतंत्रता से समझौता किया गया है।

EVM की विश्वसनीयता पर सवाल नए नहीं हैं — विभिन्न विपक्षी दल वर्षों से बैलेट पेपर वापसी की माँग उठाते रहे हैं। ठाकरे का यह कदम उस राजनीतिक विमर्श को एक बार फिर केंद्र में लाता है जो हर चुनावी चक्र में उभरता है, लेकिन इस बार SIR प्रक्रिया के विवाद ने इसे नया आयाम दे दिया है।

ठाकरे ने आगे क्या कहा

उन्होंने कहा, 'जब हम इस भ्रष्ट प्रक्रिया को समाप्त करके मतपत्र मतदान की ओर लौटेंगे, तभी सत्ता पर इस लंबे समय से चले आ रहे कब्ज़े के पीछे का पूर्ण सत्य उजागर होगा।'

यह बयान चुनावी राजनीति में MNS की सक्रियता को रेखांकित करता है और संकेत देता है कि आने वाले चुनावों से पहले EVM-बनाम-बैलेट पेपर की बहस और तेज़ होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इस बार उनका समय महत्वपूर्ण है — चुनाव आयोग के भीतर असहमति की खबरों के बीच यह बयान विपक्षी एकजुटता की कोशिश भी है। सवाल यह है कि क्या MNS जैसी क्षेत्रीय पार्टी इस मुद्दे पर राष्ट्रीय गठबंधन बना पाएगी, जहाँ बड़े दल भी अपनी-अपनी रणनीति पर चलते हैं। SIR प्रक्रिया पर आरोप गंभीर हैं, लेकिन बिना ठोस साक्ष्य के राजनीतिक बयान संस्थागत जवाबदेही की जगह नहीं ले सकते। चुनाव आयोग पर बढ़ता दबाव यह भी दर्शाता है कि चुनावी विश्वसनीयता का संकट महज़ तकनीक का नहीं, बल्कि शासन-प्रशासन के ढाँचे का सवाल बन चुका है।
RashtraPress
25 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

SIR (विशेष गहन पुनरीक्षण) प्रक्रिया क्या है?
SIR यानी विशेष गहन पुनरीक्षण, चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूचियों को अद्यतन और सत्यापित करने की एक प्रशासनिक प्रक्रिया है। इसके तहत मतदाताओं के पंजीकरण की जाँच और सफाई की जाती है। राज ठाकरे सहित कई विपक्षी नेताओं ने इस पर मतदाता सूचियों में हेरफेर का आरोप लगाया है।
राज ठाकरे ने SIR रद्द करने की माँग क्यों की?
ठाकरे का आरोप है कि SIR प्रक्रिया का इस्तेमाल 2025 से चुनावी परिणामों को प्रभावित करने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इसमें अनियमितताएँ सामने आई हैं और अब चुनाव आयोग के भीतर से भी चिंताएँ उठ रही हैं।
राज ठाकरे ने EVM के बजाय बैलेट पेपर की माँग क्यों उठाई?
ठाकरे का तर्क है कि इलेक्ट्रॉनिक मतदान प्रणाली जनता के विश्वास को कमज़ोर करती है और पारंपरिक बैलेट पेपर ही चुनावी पारदर्शिता सुनिश्चित कर सकता है। उन्होंने सभी विपक्षी दलों से इस माँग को लेकर राष्ट्रव्यापी आंदोलन में शामिल होने का आह्वान किया है।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर राज ठाकरे ने क्या कहा?
ठाकरे ने रेखांकित किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार चुनाव आयोग के भीतर आंतरिक मतभेदों और बढ़ती राजनीतिक जाँच के बीच पिछले दो दिनों से मौन हैं। उन्होंने इसे संस्थागत जवाबदेही पर सवाल के रूप में उठाया।
राज ठाकरे के इस बयान का राजनीतिक असर क्या हो सकता है?
यह बयान ऐसे समय में आया है जब विपक्षी दल चुनाव आयोग की स्वतंत्रता पर सवाल उठाते हुए एकजुट हो रहे हैं। यदि विभिन्न दल MNS के आह्वान पर साझा मंच बनाते हैं, तो आगामी चुनावों से पहले EVM-बनाम-बैलेट पेपर विवाद और तेज़ हो सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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