6 अक्टूबर 2026
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शिवसेना (यूबीटी) का 'सामना' में BJP को अल्टीमेटम: SIR से 13 करोड़ वोटर प्रभावित, बगावत की चेतावनी

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शिवसेना (यूबीटी) का 'सामना' में BJP को अल्टीमेटम: SIR से 13 करोड़ वोटर प्रभावित, बगावत की चेतावनी

सारांश

शिवसेना (यूबीटी) ने 'सामना' में BJP को खुली चुनौती दी — SIR प्रक्रिया से 13 करोड़ मतदाताओं के अधिकार छिनने का आरोप, सर्वोच्च न्यायालय के जज और पूर्व गृह सचिव की आलोचना का हवाला, और मुंबई रैली के बाद बड़े जन-विद्रोह की चेतावनी।

मुख्य बातें

शिवसेना (यूबीटी) ने मुखपत्र 'सामना' में 6 अक्टूबर 2026 को BJP और CEC ज्ञानेश कुमार पर तीखा हमला बोला।
SIR प्रक्रिया के तहत देशभर में 13 करोड़ और अकेले महाराष्ट्र में 2 करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम बिना नोटिस हटाने का आरोप।
सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति उज्जवल भुइयां ने कहा था — मनमानी प्रक्रिया से मतदाता अधिकार छीनना संविधान का उल्लंघन।
पूर्व केंद्रीय गृह सचिव आर.के.
सिंह ने SIR अभियान को जन-प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 22 का उल्लंघन बताया।
विपक्ष की प्रमुख माँगें: SIR रद्द करना, EVM हटाना, बैलेट पेपर पर वापसी।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और मंत्री आशीष शेलार ने विरोध को 'बेताब राजनीति' और 'सस्ती पॉलिटिक्स' करार दिया।

शिवसेना (यूबीटी) ने 6 अक्टूबर 2026 को अपने मुखपत्र 'सामना' में भारतीय जनता पार्टी (BJP) और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को कड़ी चेतावनी दी — विशेष सारांश पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के ज़रिये 13 करोड़ मतदाताओं के वोटिंग अधिकार बिना नोटिस छीने जाने का आरोप लगाते हुए जन-विद्रोह की भविष्यवाणी की गई। शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले खेमे ने मुंबई में महा विकास अघाड़ी (MVA) की विरोध रैली का बचाव किया और BJP पर 'भ्रष्ट चुनाव आयोग' के सहारे सत्ता में बने रहने का आरोप लगाया।

विवाद का केंद्र: SIR प्रक्रिया पर आरोप

शिवसेना (यूबीटी) ने आरोप लगाया कि SIR प्रक्रिया के तहत पूरे भारत में लगभग 13 करोड़ मतदाताओं को — जिनमें अकेले महाराष्ट्र में 2 करोड़ से अधिक शामिल हैं — बिना किसी पूर्व सूचना या उचित सुनवाई के मतदाता सूची से हटाया गया। मुखपत्र में कहा गया कि यह लोकतंत्र की आत्मा पर सीधा प्रहार है।

संपादकीय में लिखा गया: 'सत्ता का घमंड है और BJP ज्ञानेश कुमार जैसों को ताकत देकर इस सत्ता का मज़ा ले रही है।' रैली में लाखों लोगों के तिरंगा लेकर सड़क पर उतरने को 'रोना-धोना' कहे जाने पर मुखपत्र ने कहा कि यह 'तिरंगे का अपमान' है।

न्यायिक और प्रशासनिक आलोचना का हवाला

शिवसेना (यूबीटी) ने सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति उज्जवल भुइयां की टिप्पणी का उल्लेख किया, जिन्होंने कहा था कि नागरिकों को मतदान के अधिकार से वंचित करने वाली कोई भी मनमानी प्रक्रिया संवैधानिक ढाँचे का उल्लंघन है। न्यायमूर्ति भुइयां के अनुसार किसी जीवित मतदाता का नाम बिना उचित प्रक्रिया और पूर्व सूचना के सूची से नहीं हटाया जा सकता और वोट देने का अधिकार छीनना 'आत्मा को शरीर से अलग करने' जैसा है।

इसके अतिरिक्त, मुखपत्र ने पूर्व केंद्रीय गृह सचिव एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री आर.के. सिंह का भी संदर्भ दिया, जिन्होंने सार्वजनिक रूप से SIR अभियान को गैरकानूनी करार दिया था। सिंह के अनुसार उचित जाँच या सुनवाई के बिना मतदाताओं को हटाना जन-प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 22 का सीधा उल्लंघन है।

BJP और राज्य सरकार की प्रतिक्रिया

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने MVA की विरोध रैली को 'राजनीतिक ज़मीन तलाशने की बेताब कोशिश' बताया। राज्य मंत्री आशीष शेलार ने इसे 'सस्ती राजनीति' और प्रदर्शनकारियों की माँगों को 'चिल्लाना' कहा।

इस पर 'सामना' ने पलटवार किया: 'अगर एक अनुभवी प्रशासनिक अधिकारी और सर्वोच्च न्यायालय के जज दोनों इस प्रक्रिया को मनमाना और गैरकानूनी कहते हैं, तो क्या BJP उनकी बातों को भी 'चीखना' कहेगी?'

प्रदर्शनकारियों की मुख्य माँगें

मुखपत्र ने मुंबई की सड़कों पर उतरे प्रदर्शनकारियों की तीन प्रमुख माँगें दोहराईं — SIR प्रक्रिया को तत्काल रद्द करना, इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) को समाप्त करना, और बैलेट पेपर से मतदान की पुनर्बहाली।

आगे की राह

यह टकराव ऐसे समय में सामने आया है जब SIR प्रक्रिया को लेकर देशभर में कानूनी और राजनीतिक विवाद गहरा रहा है। गौरतलब है कि सर्वोच्च न्यायालय में इस मुद्दे पर सुनवाई जारी है और विपक्षी दल एकजुट होकर इसे लोकतंत्र पर हमला बता रहे हैं। आने वाले दिनों में MVA और अन्य विपक्षी दलों की ओर से और बड़े आंदोलन की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो सत्तापक्ष का 'सस्ती राजनीति' वाला जवाब पर्याप्त नहीं। असली सवाल यह है कि 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाने की प्रक्रिया में 'उचित सुनवाई' का तंत्र कहाँ था — और चुनाव आयोग ने इसे सार्वजनिक क्यों नहीं किया। EVM बनाम बैलेट पेपर की माँग को 'रोना-धोना' कहकर खारिज करना उस व्यापक अविश्वास को और गहरा करता है जो चुनावी संस्थाओं के प्रति जनमानस में बढ़ रहा है।
RashtraPress
6 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

SIR प्रक्रिया क्या है और इस पर विवाद क्यों है?
SIR यानी विशेष सारांश पुनरीक्षण वह प्रक्रिया है जिसके तहत चुनाव आयोग मतदाता सूचियों की समीक्षा कर नाम हटाता या जोड़ता है। शिवसेना (यूबीटी) समेत विपक्षी दलों का आरोप है कि इस बार 13 करोड़ मतदाताओं के नाम बिना नोटिस और उचित सुनवाई के हटाए गए, जो जन-प्रतिनिधित्व अधिनियम और संविधान का उल्लंघन है।
न्यायमूर्ति उज्जवल भुइयां ने SIR पर क्या कहा था?
सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति उज्जवल भुइयां ने कहा था कि नागरिकों को मतदान के अधिकार से वंचित करने वाली कोई भी मनमानी प्रक्रिया संवैधानिक ढाँचे का उल्लंघन है। उन्होंने यह भी कहा था कि किसी जीवित मतदाता का नाम बिना उचित प्रक्रिया और पूर्व सूचना के हटाना 'आत्मा को शरीर से अलग करने' जैसा है।
आर.के. सिंह ने SIR अभियान को गैरकानूनी क्यों बताया?
पूर्व केंद्रीय गृह सचिव और पूर्व केंद्रीय मंत्री आर.के. सिंह ने सार्वजनिक रूप से कहा कि उचित जाँच या सुनवाई के बिना मतदाताओं को सूची से हटाना जन-प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 22 का सीधा उल्लंघन है। शिवसेना (यूबीटी) ने इसी बयान को 'सामना' में उद्धृत कर BJP की आलोचना की।
मुंबई में MVA रैली की मुख्य माँगें क्या थीं?
मुंबई में MVA और सहयोगी डेमोक्रेटिक समूहों की रैली में तीन प्रमुख माँगें थीं — SIR प्रक्रिया को तत्काल रद्द करना, इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) को समाप्त करना और बैलेट पेपर से मतदान की पुनर्बहाली।
BJP और महाराष्ट्र सरकार ने विरोध रैली पर क्या प्रतिक्रिया दी?
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने MVA रैली को 'राजनीतिक ज़मीन तलाशने की बेताब कोशिश' बताया। राज्य मंत्री आशीष शेलार ने प्रदर्शन को 'सस्ती राजनीति' और माँगों को 'चिल्लाना' कहा, जिसकी शिवसेना (यूबीटी) ने कड़ी निंदा की।
राष्ट्र प्रेस
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