शिवसेना (यूबीटी) का 'सामना' में BJP को अल्टीमेटम: SIR से 13 करोड़ वोटर प्रभावित, बगावत की चेतावनी
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना (यूबीटी) ने 6 अक्टूबर 2026 को अपने मुखपत्र 'सामना' में भारतीय जनता पार्टी (BJP) और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को कड़ी चेतावनी दी — विशेष सारांश पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के ज़रिये 13 करोड़ मतदाताओं के वोटिंग अधिकार बिना नोटिस छीने जाने का आरोप लगाते हुए जन-विद्रोह की भविष्यवाणी की गई। शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले खेमे ने मुंबई में महा विकास अघाड़ी (MVA) की विरोध रैली का बचाव किया और BJP पर 'भ्रष्ट चुनाव आयोग' के सहारे सत्ता में बने रहने का आरोप लगाया।
विवाद का केंद्र: SIR प्रक्रिया पर आरोप
शिवसेना (यूबीटी) ने आरोप लगाया कि SIR प्रक्रिया के तहत पूरे भारत में लगभग 13 करोड़ मतदाताओं को — जिनमें अकेले महाराष्ट्र में 2 करोड़ से अधिक शामिल हैं — बिना किसी पूर्व सूचना या उचित सुनवाई के मतदाता सूची से हटाया गया। मुखपत्र में कहा गया कि यह लोकतंत्र की आत्मा पर सीधा प्रहार है।
संपादकीय में लिखा गया: 'सत्ता का घमंड है और BJP ज्ञानेश कुमार जैसों को ताकत देकर इस सत्ता का मज़ा ले रही है।' रैली में लाखों लोगों के तिरंगा लेकर सड़क पर उतरने को 'रोना-धोना' कहे जाने पर मुखपत्र ने कहा कि यह 'तिरंगे का अपमान' है।
न्यायिक और प्रशासनिक आलोचना का हवाला
शिवसेना (यूबीटी) ने सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति उज्जवल भुइयां की टिप्पणी का उल्लेख किया, जिन्होंने कहा था कि नागरिकों को मतदान के अधिकार से वंचित करने वाली कोई भी मनमानी प्रक्रिया संवैधानिक ढाँचे का उल्लंघन है। न्यायमूर्ति भुइयां के अनुसार किसी जीवित मतदाता का नाम बिना उचित प्रक्रिया और पूर्व सूचना के सूची से नहीं हटाया जा सकता और वोट देने का अधिकार छीनना 'आत्मा को शरीर से अलग करने' जैसा है।
इसके अतिरिक्त, मुखपत्र ने पूर्व केंद्रीय गृह सचिव एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री आर.के. सिंह का भी संदर्भ दिया, जिन्होंने सार्वजनिक रूप से SIR अभियान को गैरकानूनी करार दिया था। सिंह के अनुसार उचित जाँच या सुनवाई के बिना मतदाताओं को हटाना जन-प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 22 का सीधा उल्लंघन है।
BJP और राज्य सरकार की प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने MVA की विरोध रैली को 'राजनीतिक ज़मीन तलाशने की बेताब कोशिश' बताया। राज्य मंत्री आशीष शेलार ने इसे 'सस्ती राजनीति' और प्रदर्शनकारियों की माँगों को 'चिल्लाना' कहा।
इस पर 'सामना' ने पलटवार किया: 'अगर एक अनुभवी प्रशासनिक अधिकारी और सर्वोच्च न्यायालय के जज दोनों इस प्रक्रिया को मनमाना और गैरकानूनी कहते हैं, तो क्या BJP उनकी बातों को भी 'चीखना' कहेगी?'
प्रदर्शनकारियों की मुख्य माँगें
मुखपत्र ने मुंबई की सड़कों पर उतरे प्रदर्शनकारियों की तीन प्रमुख माँगें दोहराईं — SIR प्रक्रिया को तत्काल रद्द करना, इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) को समाप्त करना, और बैलेट पेपर से मतदान की पुनर्बहाली।
आगे की राह
यह टकराव ऐसे समय में सामने आया है जब SIR प्रक्रिया को लेकर देशभर में कानूनी और राजनीतिक विवाद गहरा रहा है। गौरतलब है कि सर्वोच्च न्यायालय में इस मुद्दे पर सुनवाई जारी है और विपक्षी दल एकजुट होकर इसे लोकतंत्र पर हमला बता रहे हैं। आने वाले दिनों में MVA और अन्य विपक्षी दलों की ओर से और बड़े आंदोलन की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।