उद्धव ठाकरे का 'गर्जना मोर्चा' में मोदी-शाह पर हमला: 'मेक इन इंडिया' की आड़ में तानाशाही दफन करेंगे
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने 4 अक्टूबर 2026 को मुंबई में आयोजित 'गर्जना मोर्चा' में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भारतीय चुनाव आयोग (ECI) के कामकाज पर सीधा निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ताधारी केंद्र सरकार 'मेक इन इंडिया' के नाम की आड़ में तानाशाही की फसल बो रही है, जिसे वे जड़ से उखाड़ फेंकेंगे।
रैली में क्या बोले उद्धव ठाकरे
उद्धव ठाकरे ने अपने संबोधन में कहा, 'जब वे पहली बार प्रधानमंत्री बने, तो उन्होंने मेक इन इंडिया की घोषणा की। हमने उस विजन का समर्थन किया। लेकिन अगर आप मेक इन इंडिया के नाम पर तानाशाही पैदा कर रहे हैं, तो हम आज यहाँ उस तानाशाही को दफनाने के लिए खड़े हैं।' यह रैली महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे के साथ मिलकर आयोजित की गई थी।
उन्होंने इस प्रदर्शन को 'भारत के संवैधानिक ढाँचे और नागरिक स्वतंत्रता की रक्षा के लिए एक राष्ट्रव्यापी अभियान' के रूप में परिभाषित किया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि संस्थागत अतिक्रमण जारी रहा तो जनता का असंतोष जल्द ही सड़कों पर उतर सकता है।
मतदाता सूची से हटाए गए नाम — बड़े आरोप
उद्धव ठाकरे ने दावा किया कि देशभर में 13 करोड़ मतदाताओं के नाम मतदाता सूचियों से चुपके से हटा दिए गए हैं — जिनमें अकेले महाराष्ट्र में 2 करोड़, तमिलनाडु में 70 लाख और पश्चिम बंगाल में 30 लाख मतदाता शामिल हैं। उन्होंने भीड़ से पूछा, 'यह आँकड़ा महाराष्ट्र की पूरी आबादी के बराबर है। क्या यह मनमाना नाम हटाना आपको स्वीकार्य है?'
गौरतलब है कि ये आरोप उद्धव ठाकरे की ओर से लगाए गए हैं; चुनाव आयोग की तरफ से इन दावों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। उन्होंने यह भी कहा कि पश्चिम बंगाल में आगामी उपचुनावों से ठीक पहले कई अमान्य मतदाता आवेदनों को वैध घोषित कर दिया गया।
चुनाव आयुक्त की नियुक्ति और न्यायिक देरी पर सवाल
उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति प्रक्रिया पर आपत्ति जताई। उद्धव ठाकरे ने कहा कि चयन समिति से भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को विधायी रूप से हटाए जाने के बाद, तीन सदस्यीय समिति में प्रधानमंत्री, गृह मंत्री अमित शाह और विपक्ष के नेता शामिल हैं। उनके अनुसार, 'समिति में गृह मंत्री के होने से सत्ताधारी सरकार को स्वतः ही 2-1 का बहुमत मिल जाता है।'
उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष के नेता राहुल गांधी की औपचारिक असहमति और निर्धारित अदालती सुनवाई का इंतजार किए बिना ज्ञानेश कुमार को नियुक्त कर दिया गया। कानूनी देरी की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा, 'अगर सुनवाई 5 तारीख को होती है और मतदान 6 तारीख को है, तो बहाल किए गए मतदाता अपने अधिकारों का प्रयोग कैसे कर पाएंगे?'
कानून-व्यवस्था और हिंदुत्व पर तीखे सवाल
उद्धव ठाकरे ने महाराष्ट्र में सत्ताधारी प्रशासन की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए ठाणे में शिवसेना पदाधिकारी प्रदीप पूर्णेकर की हाल ही में हुई हत्या का हवाला दिया। उन्होंने कहा, 'आपकी पुलिस और गृह मंत्री अब कहाँ हैं? क्या यही आपका हिंदुत्व का रूप है?' उन्होंने यह भी दावा किया कि 'भाजपा' और 'प्रशासन' शब्द आपस में विरोधाभासी हो चुके हैं।
शिवसेना के संस्थापक बालासाहेब ठाकरे का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि बालासाहेब ने लोकतंत्र के ऐसे 'दयनीय और प्रतिशोधी' स्वरूप को हमेशा खारिज किया था। उन्होंने अनुमान लगाया कि मौजूदा गति से शेष विवादित मतदाता आवेदनों के सत्यापन में लगभग 146 महीने लगेंगे।
व्यापक विपक्षी एकजुटता और मार्च का स्वरूप
मेट्रो सिनेमा से सीएसएमटी स्थित बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) मुख्यालय तक फैले इस विरोध मार्च में हजारों समर्थकों ने केवल भारतीय तिरंगे के साथ मार्च किया और पार्टी के झंडों का कड़ाई से परहेज किया। इस रैली में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार), कांग्रेस, किसान एवं मजदूर पार्टी ऑफ इंडिया (PWP), वामपंथी दल, MNS और शिवसेना (यूबीटी) के कार्यकर्ता एक साथ नज़र आए।
यह हाई-प्रोफाइल संयुक्त रैली महाराष्ट्र में राजनीतिक ध्रुवीकरण की बड़ी आहट है — विरोधी गुटों को एक मंच पर लाकर चुनाव आयोग और केंद्र सरकार को एक साथ चुनौती देने का यह प्रयास आने वाले दिनों में और तेज होने के संकेत दे रहा है।