गर्जना मोर्चा पर BJP-शिवसेना का तंज: 'दोहरा मापदंड और पब्लिसिटी स्टंट', ठाकरे बंधुओं पर हमला
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र के सत्तारूढ़ गठबंधन भारतीय जनता पार्टी (BJP) और शिवसेना ने रविवार, 4 अक्टूबर 2026 को राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में मुंबई में निकाले गए 'गर्जना मोर्चा' को 'दोहरे मापदंड का प्रदर्शन' और 'पब्लिसिटी स्टंट' करार दिया। यह मार्च भारतीय चुनाव आयोग (ECI) और इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVM) के विरोध में आयोजित किया गया था।
मंत्री शेलार का तीखा पलटवार
महाराष्ट्र के सांस्कृतिक मामलों के मंत्री आशीष शेलार ने इस आयोजन को 'गर्जना मार्च' के बजाय 'कोल्हे-कुई मार्च' (सियारों की आवाज) बताते हुए विपक्ष पर तीखा निशाना साधा। उन्होंने प्रदर्शन के दिन को विश्व पशु दिवस से भी जोड़ा और कहा कि चुनाव हारने के बाद विपक्षी दलों की शिकायतें 'अंगूर खट्टे हैं' वाली मानसिकता को उजागर करती हैं।
एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में शेलार ने कहा, 'जब विपक्षी दल जीतते हैं, तब EVM और चुनाव आयोग उन्हें निष्पक्ष लगते हैं। लेकिन जब वे हारते हैं, तो मशीनों और प्रशासनिक संस्थाओं को दोष देते हैं। जनता इस तरह के दोहरे रवैये को स्वीकार नहीं करेगी।'
ईवीएम जीत का ऐतिहासिक संदर्भ
मंत्री शेलार ने याद दिलाया कि उद्धव ठाकरे की पार्टी ने 2007, 2012 और 2017 में EVM के ज़रिए हुए बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनावों में जीत हासिल की थी। उन्होंने यह भी कहा कि राज ठाकरे की पार्टी ने 2009 के ईवीएम मतदान में सबसे अधिक विधायक जिताए थे। उनके अनुसार, EVM लागू करने का मूल निर्णय कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में लिया गया था और उस समय मिली जीतों पर कांग्रेस ने कभी सवाल नहीं उठाया।
उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल में हुए छह राज्यों के चुनावों का भी हवाला दिया — जहाँ केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी में गैर-भाजपा सरकारें बनीं, जबकि पश्चिम बंगाल, बिहार और असम में NDA को जनादेश मिला — यह तर्क देते हुए कि चुनाव आयोग पर एकतरफा पक्षपात के आरोप निराधार हैं।
मतदाता सूची विवाद: विपक्ष के रुख पर सवाल
मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर शेलार ने विपक्ष की पुरानी माँगों और उनके मौजूदा विरोध में विरोधाभास उजागर किया। उन्होंने कहा कि अक्टूबर 2025 में मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने खुद 96 लाख फर्जी मतदाताओं का आरोप लगाते हुए मतदाता सूची सुधार की माँग की थी। नवंबर 2025 में शिवसेना (UBT) और एनसीपी (एसपी) ने एक से अधिक जगह दर्ज मतदाताओं की जाँच की माँग की थी, और जनवरी 2026 में ऐसे नामों को हटाने की अपील भी की गई थी।
शेलार ने सवाल किया, 'अब जब चुनाव आयोग SIR प्रक्रिया के ज़रिए मतदाता सूचियों को सही और सुरक्षित बनाने का काम कर रहा है, तो विपक्षी नेता इसका विरोध क्यों कर रहे हैं?' उन्होंने कहा कि 90 प्रतिशत मतदाताओं की मैपिंग पहले ही पूरी हो चुकी है।
शिरसाट का व्यंग्य: 'टी-शर्ट वाला पब्लिसिटी स्टंट'
छत्रपति संभाजीनगर में उपस्थित शिवसेना के सामाजिक न्याय मंत्री संजय शिरसाट ने इस मोर्चे का मज़ाक उड़ाते हुए इसे 'एक जैसी टी-शर्ट पहनकर फोटो खिंचवाने का अवसर' बताया। उन्होंने कहा, 'मुंबई में हुए विरोध प्रदर्शन से ज़्यादा चर्चा दोनों भाइयों के एक साथ आने की है। यह सिर्फ एक पब्लिसिटी स्टंट है।'
शिरसाट ने आयोजन की राजनीतिक साख पर भी प्रश्नचिह्न लगाया — यह पूछते हुए कि क्या किसी एक भी प्रमुख राजनीतिक दल ने इस प्रदर्शन में भागीदारी की, और क्या शरद पवार या कोई अन्य वरिष्ठ नेता इसमें शामिल हुए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि विपक्ष वाकई गंभीर है, तो उसे जंतर-मंतर जाकर 'चलो दिल्ली' का आह्वान करना चाहिए।
आगे का राजनीतिक परिदृश्य
यह राजनीतिक वाद-विवाद ऐसे समय में उभरा है जब महाराष्ट्र में आगामी नगर निकाय चुनावों की तैयारियाँ जारी हैं और ECI की SIR प्रक्रिया अंतिम चरण में है। गौरतलब है कि ठाकरे बंधुओं — जो वर्षों की राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के बाद एक मंच पर आए — का यह साझा विरोध प्रदर्शन विपक्षी गोलबंदी के रूप में देखा जा रहा है, हालाँकि सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन इसे खारिज कर रहा है। आने वाले हफ्तों में EVM और मतदाता सूची का मुद्दा महाराष्ट्र की राजनीति में केंद्रीय रहने की संभावना है।