क्या मुंबई की जनता ने उद्धव ठाकरे की माफिया सेना पर विजय प्राप्त की?
सारांश
Key Takeaways
- मुंबई की जनता ने माफिया शासन का विरोध किया।
- भाजपा ने चुनाव में बड़ी जीत हासिल की।
- उद्धव ठाकरे की पार्टी की स्थिति कमजोर हुई।
- मनसे को बेहद कम सीटें मिलीं।
- राज ठाकरे के मुकाबले उद्धव की पार्टी का प्रदर्शन बेहतर रहा।
मुंबई, १७ जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने महाराष्ट्र के निकाय चुनावों में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना-यूबीटी की पराजय के बाद तीखा हमला किया है। भाजपा के नेता किरीट सोमैया ने कहा कि मुंबई की जनता ने उद्धव ठाकरे की माफिया सेना का वध किया है। मुंबई ने यह स्पष्ट कर दिया है कि शहर का विकास ही प्राथमिकता है।
किरीट सोमैया ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा कि लूटपाट, जबरन वसूली, बाहुबल का प्रयोग और धमकाना, यही उद्धव और राज ठाकरे का असली कार्य रहा है। चुनाव नतीजों के माध्यम से मुंबईवासियों ने अपना उत्तर दे दिया है। अब उद्धव ठाकरे की पार्टी का नाम बदलकर 'उद्धव सेना मुंबई' या 'उद्धव सेना मुस्लिम' होना चाहिए, क्योंकि उनकी सीटें केवल मुंबई में सिमट गई हैं।
भाजपा नेता ने यह भी कहा कि उद्धव ठाकरे ने चुनाव में राज ठाकरे का इस्तेमाल किया है। नतीजों से यह स्पष्ट है कि राज के मुकाबले उद्धव की पार्टी को अधिक सीटें मिली हैं, लेकिन उद्धव चुनाव के बाद राज को बाहर कर देंगे।
भाजपा विधायक राम कदम ने कहा कि मुंबई और महाराष्ट्र में दोनों भाईयों (उद्धव और राज ठाकरे) ने अपने नाम का प्रचार किया, पर चुनाव नतीजों के बाद मनसे को पूरे महाराष्ट्र में केवल १३ पार्षद मिले हैं। उद्धव ठाकरे को उनके पिता की हिंदुत्व की विचारधारा के साथ गद्दारी करने के लिए दंडित किया गया है। वे पूरे महाराष्ट्र में केवल १५० सीटों पर सिमट गए हैं।
राम कदम ने आगे कहा कि ठाकरे ब्रदर्स को मीडिया में बहुत चर्चा मिली, लेकिन उन्हें न तो जनमत मिला है और न कोई आधार। भाजपा ने पुराना रिकॉर्ड तोड़कर लगभग १५०० पार्षद हासिल किए हैं।
मनसे प्रमुख राज ठाकरे पर निशाना साधते हुए राम कदम ने कहा कि जहां मनसे की सरकार थी (नासिक और पुणे), वहां के लोगों ने उन्हें लगभग पूरी तरह नकार दिया। मुंबई में भी मनसे के केवल छह प्रत्याशी जीतकर आए हैं। उन्हें स्वीकार करना चाहिए कि वे १३ सीटों से आगे नहीं बढ़ पाए हैं।