मनोहर पर्रिकर: स्कूटर पर सवारी करने वाले सादगी के प्रतीक
सारांश
Key Takeaways
- सादगी और ईमानदारी का जीवन जीना
- आम आदमी की तरह व्यवहार करना
- राजनीति में सामाजिक जुड़ाव का महत्व
- गोवा के विकास में योगदान
- रक्षा मंत्री के रूप में भारत की सुरक्षा को बढ़ाना
नई दिल्ली, 16 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। सादगी की मिसाल रखते हुए, एक राज्य के मुख्यमंत्री होने के बावजूद मनोहर पर्रिकर ने स्कूटर की सवारी और सड़क किनारे चाय पीने की आदत नहीं छोड़ी। आम आदमी के रूप में उनकी पहचान इतनी गहरी थी कि बड़े से बड़े अधिकारी भी उन्हें पहचानने में असफल रह जाते थे। जब वह गोवा से निकलकर देश की राजधानी पहुंचे, तब भी उनकी ख़ास शैली बरकरार रही। यह कहानी है गोवा के चार बार मुख्यमंत्री और भारत के रक्षा मंत्री रह चुके दिवंगत मनोहर पर्रिकर की।
13 दिसंबर 1955 को गोवा के मापुसा में जन्मे मनोहर पर्रिकर आरएसएस के एक सक्रिय कार्यकर्ता थे। भाजपा के वरिष्ठ नेता प्रमोद महाजन ने उन्हें राजनीति में लाने का कार्य किया। पर्रिकर ने हार से शुरुआत की, लेकिन बाद में उन्होंने गोवा में भाजपा को खड़ा करने का श्रेय पाया। उनकी ईमानदारी, सादगी, और कर्तव्यनिष्ठा ने उन्हें एक ऐसे नेता के रूप में स्थापित किया, जो आज की युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा स्रोत बने।
वीवीआईपी होने के बावजूद, पर्रिकर ने एक आम आदमी की तरह जीवन व्यतीत किया। मुख्यमंत्री रहते हुए, उन्होंने आधी आस्तीन की कमीज़ और सैंडल पहनकर गोवा की सड़कों पर स्कूटर चलाई। कई बार जब रास्ते में फंस जाते, तो किसी की गाड़ी पर पीछे बैठकर निकल जाते। राज्य की जनता उन्हें 'स्कूटर वाले सीएम' के नाम से जानती थी।
सड़क किनारे चाय पीना उनके लिए राज्य और देश की हकीकत को जानने का एक साधन था। एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा, "चाय की दुकान पर जाकर बातचीत करना सबसे बड़ा काम है, क्योंकि वहाँ से आपको राज्य की सभी जानकारी मिल जाती है।"
कई बार उनकी सादगी ने उन्हें असहज स्थितियों में भी डाल दिया। एक बार दिल्ली के एक फाइव स्टार होटल में पहुंचने पर, दरबान ने उन्हें पहचानने में गलती की।
यह एकमात्र किस्सा नहीं है; जब वे गोवा के नए मुख्यमंत्री बने थे, तब बेंगलुरु में उनकी सुरक्षा के लिए सभी प्रोटोकॉल थे, लेकिन पर्रिकर अपने बैग के साथ सीधे बाहर निकल गए और कोई भी उन्हें पहचान नहीं पाया। पर्रिकर ने बताया, "नया मुख्यमंत्री बना था, तो किसी ने इतना ध्यान नहीं दिया।"
सिर्फ सादगी ही उनकी पहचान नहीं थी। गोवा के विकास में उनके योगदान के लिए उन्हें आधुनिक गोवा का निर्माता कहा गया।
जब वे केंद्र की राजनीति में आए, तो उन्होंने इकोनॉमी क्लास में यात्रा की और अपना बैग स्वयं उठाया। रक्षा मंत्री रहते हुए, उन्होंने भारत की सुरक्षा क्षमताओं को बढ़ाया और स्वदेशी रक्षा उत्पादों को प्राथमिकता दी। उनके फैसले पूर्व सैनिकों के जीवन में भी सुधार लाए।
9 नवंबर 2014 को पर्रिकर रक्षा मंत्री बने और 13 मार्च 2017 तक इस पद पर रहे। 14 मार्च 2017 को उन्होंने फिर से गोवा के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। उन्होंने 17 मार्च 2019 को गोवा में अंतिम सांस ली।