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बी.आर. चोपड़ा की जयंती: दोस्तों के साथ हंसी-मजाक से शुरू हुआ सफर, सामाजिक मुद्दों को सिनेमा में लाने वाले महान निर्देशक

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बी.आर. चोपड़ा की जयंती: दोस्तों के साथ हंसी-मजाक से शुरू हुआ सफर, सामाजिक मुद्दों को सिनेमा में लाने वाले महान निर्देशक

सारांश

बी.आर. चोपड़ा, एक महान फिल्म निर्देशक, ने अपने करियर की शुरुआत दोस्तों के साथ मजाक-मजाक में की। उनकी फिल्मों ने सामाजिक मुद्दों को पर्दे पर लाकर विचारों को बदलने का काम किया।

मुख्य बातें

चोपड़ा का नाम भारतीय सिनेमा में विशेष स्थान रखता है।
उन्होंने सामाजिक मुद्दों को फिल्म के माध्यम से उठाया।
उनकी पहली फिल्म 'अफसाना' थी, जो सुपरहिट हुई।
उनका मानना था कि फिल्में समाज में बदलाव ला सकती हैं।
उन्होंने वेश्यावृत्ति जैसे संवेदनशील मुद्दों पर भी फिल्में बनाई।

मुंबई, 21 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। हिंदी सिनेमा के विकास में जितना बड़ा योगदान कलाकारों का होता है, उतना ही महत्वपूर्ण योगदान रचनात्मक दृष्टि वाले फिल्म निर्देशकों का होता है। ये निर्देशक ही हैं जो पर्दे पर कहानियों को जीते हैं और समाज को महत्वपूर्ण संदेश देते हैं। ऐसे महान निर्देशकों में बी.आर. चोपड़ा का नाम प्रमुखता से लिया जाता है।

बी.आर. चोपड़ा ने न केवल मनोरंजन से भरपूर फिल्में बनाई, बल्कि उन्होंने समाज में फैली कुरीतियों और संवेदनशील मुद्दों को अपने सिनेमा के माध्यम से उजागर किया। उन विषयों पर भी उन्होंने फिल्में बनाई जिन पर सामान्यतः खुलकर चर्चा नहीं होती थी। 22 अप्रैल को उनकी जयंती के अवसर पर भारतीय सिनेमा में उनके योगदान को याद किया जा रहा है।

बी.आर. चोपड़ा का नाम सुनते ही 'महाभारत' के दृश्य याद आ जाते हैं। महाभारत के संगीत और किरदार आज भी लोगों के दिलों में बसे हुए हैं, लेकिन उनके द्वारा निर्देशित फिल्मों ने दर्शकों को सोचने पर मजबूर कर दिया। बी.आर. चोपड़ा ने समाज के परिवर्तन का इंतजार नहीं किया, बल्कि अपनी 'धूल का फूल', 'नया दौर', 'कानून', 'साधना', 'गुमराह', और 'निकाह' जैसी फिल्मों के जरिए समाज को बदलने का प्रयास किया। क्या आप जानते हैं कि इतनी कालजयी फिल्मों और 'महाभारत' का निर्माण करने वाले बी.आर. चोपड़ा ने अपने खाली समय में दोस्तों के साथ मजाक-मजाक में फिल्में बनाना शुरू किया था?

बी.आर. चोपड़ा की पहली निर्देशित फिल्म 'अफसाना' थी, जिसे उन्होंने अपने दोस्तों के साथ मिलकर बनाया। फिल्म में अशोक कुमार, प्राण, और वीना मुख्य भूमिका में थे। दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने कभी किसी को असिस्ट नहीं किया और न ही निर्देशन का कोई प्रशिक्षण लिया। 'अफसाना' बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट साबित हुई, और यहीं से उनके निर्देशक बनने का सफर प्रारंभ हुआ।

अपनी फिल्म 'अफसाना' के बारे में बात करते हुए बी.आर. चोपड़ा ने बताया कि उस समय वे एक फिल्म पत्रकार थे। उन्होंने कहा, "कॉलेज के दिनों में मुझे लिखने का बहुत शौक था और कॉलेज खत्म होने के बाद मैंने अखबार में काम करना शुरू किया। देश के विभाजन के समय अखबारों पर पाबंदी लगी, और उस समय मैं अपनी इच्छानुसार नहीं लिख पा रहा था। तब मेरे कुछ दोस्तों ने सुझाव दिया कि चलो एक फिल्म बनाते हैं। हमने सबने मिलकर पैसे जुटाए और फिल्म का निर्माण किया, जो सुपरहिट हो गई।"

बहुत कम लोग जानते हैं कि बी.आर. चोपड़ा की फिल्म 'साधना' को लेकर उद्योग में काफी विवाद था। उनके दोस्तों और फिल्म इंडस्ट्री ने फिल्म को न बनाने की सलाह दी थी, क्योंकि यह एक वेश्या पर आधारित थी। लोगों का मानना था कि इस विषय पर फिल्म बनाना समाज में नकारात्मक प्रभाव डालेगा। लेकिन बी.आर. चोपड़ा ने ठान लिया कि अगर बदलाव लाना है तो फिल्म बनानी होगी।

उनका मानना था कि वेश्यावृत्ति एक सामाजिक समस्या है जिसे सुधार के माध्यम से हल किया जा सकता है। वे यह भी मानते थे कि यदि समाज इस पेशे में काम करने वाली महिलाओं को स्वीकार करता है और सम्मानपूर्वक मुख्यधारा में स्थान देता है, तो भविष्य में किसी भी महिला को मजबूरी में इस मार्ग पर नहीं आना पड़ेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उन्हें सोचने पर भी मजबूर कर देती थीं। उनके कार्य से यह प्रमाणित होता है कि सिनेमा केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि समाज सुधार का माध्यम भी हो सकता है।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बी.आर. चोपड़ा ने कौन-कौन सी मशहूर फिल्में बनाई?
बी.आर. चोपड़ा ने 'महाभारत', 'धूल का फूल', 'नया दौर', 'कानून', 'साधना', 'गुमराह', और 'निकाह' जैसी मशहूर फिल्में बनाई।
क्या बी.आर. चोपड़ा ने निर्देशन की कोई औपचारिक ट्रेनिंग ली थी?
नहीं, बी.आर. चोपड़ा ने कभी किसी को असिस्ट नहीं किया और न ही निर्देशन के लिए कोई औपचारिक प्रशिक्षण लिया।
बी.आर. चोपड़ा की पहली फिल्म कौन सी थी?
बी.आर. चोपड़ा की पहली निर्देशित फिल्म 'अफसाना' थी।
बी.आर. चोपड़ा ने समाज में कौन से मुद्दों को उठाया?
उन्होंने वेश्यावृत्ति, सामाजिक कुरीतियों और संवेदनशील मुद्दों को अपनी फिल्मों में उठाया।
बी.आर. चोपड़ा का योगदान हिंदी सिनेमा में क्या है?
उनका योगदान सामाजिक मुद्दों को सिनेमा के माध्यम से उजागर करके दर्शकों को जागरूक करना था।
राष्ट्र प्रेस
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