महाराष्ट्र में 2.7 लाख मतदाताओं की उम्र संबंधी गड़बड़ियां: चुनाव आयोग ने कहा — समयसीमा में सुधार हुआ
सारांश
मुख्य बातें
चुनाव आयोग ने 10 अक्टूबर 2026 को स्पष्ट किया कि महाराष्ट्र की मतदाता सूची में 100 वर्ष से अधिक आयु के 2.7 लाख मतदाताओं से जुड़ी उम्र संबंधी विसंगतियों को दावे और आपत्तियों की अवधि समाप्त होने से पहले ही दूर कर लिया गया था। महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) के अनुरोध पर आयोग की विशेष टीम ने निर्धारित समयसीमा के भीतर यह प्रक्रिया पूरी की, जिससे प्रभावित मतदाताओं को अलग से फॉर्म-8 भरकर सुधार का आवेदन देने की आवश्यकता नहीं पड़ी।
क्या था विवाद
विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत महाराष्ट्र की मतदाता सूची की जाँच के दौरान यह दावा उठाया गया था कि सूची में 100 वर्ष से अधिक आयु के 2.7 लाख मतदाताओं के नाम दर्ज हैं। इसके साथ ही यह भी आरोप लगाया गया कि चुनाव आयोग को इन विसंगतियों को सुधारने में एक महीने का समय लगा।
यह ऐसे समय में आया है जब विपक्षी दल एसआईआर प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं और आरोप लगा रहे हैं कि कुछ मतदाताओं के नाम गलत तरीके से काटे जा रहे हैं। इस मुद्दे को लेकर नई दिल्ली में भी प्रदर्शन जारी है।
चुनाव आयोग का स्पष्टीकरण
आयोग ने बताया कि महाराष्ट्र के सीईओ के अनुरोध पर उसकी टीम ने समय रहते उम्र संबंधी मामलों का निपटारा कर दिया था। आयोग के अनुसार, यह सुधार दावे और आपत्तियों की अवधि समाप्त होने से पहले पूरा कर लिया गया, जिससे मतदाताओं को अतिरिक्त प्रशासनिक बोझ नहीं उठाना पड़ा।
गौरतलब है कि फॉर्म-8 वह प्रपत्र है जिसके माध्यम से कोई मतदाता अपनी व्यक्तिगत जानकारी — जैसे जन्मतिथि या पते — में सुधार के लिए आवेदन करता है। आयोग ने कहा कि चूँकि सुधार पहले ही हो चुके थे, इसलिए यह प्रक्रिया अनावश्यक हो गई।
एसआईआर प्रक्रिया क्या है
विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के अंतर्गत मतदाता सूची का व्यापक सत्यापन किया जाता है, जिसमें मृत, डुप्लीकेट या स्थानांतरित मतदाताओं के नाम हटाए जाते हैं और नए योग्य मतदाताओं के नाम जोड़े जाते हैं। चुनाव आयोग का कहना है कि यह एक निष्पक्ष और नियमित प्रक्रिया है।
हालाँकि, विपक्षी दलों का आरोप है कि इस प्रक्रिया में कुछ वैध मतदाताओं के नाम भी गलत तरीके से हटाए जा रहे हैं। यह विवाद राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान खींच रहा है और नई दिल्ली में इसे लेकर धरना-प्रदर्शन भी जारी हैं।
आम मतदाता पर असर
चुनाव आयोग के स्पष्टीकरण से यह स्पष्ट होता है कि जिन 2.7 लाख मतदाताओं की उम्र सूची में गलत दर्ज थी, उनकी जानकारी बिना किसी अतिरिक्त आवेदन के अपडेट कर दी गई। यह उन मतदाताओं के लिए राहत की बात है, जिन्हें अन्यथा सुधार की लंबी प्रशासनिक प्रक्रिया से गुजरना पड़ता।
आगे चलकर एसआईआर की प्रक्रिया और उससे जुड़े विवाद पर विपक्ष की निगरानी जारी रहने की संभावना है, विशेषकर जब महाराष्ट्र में अगले चुनावी चक्र की तैयारियाँ शुरू होंगी।