महाराष्ट्र SIR विवाद: CM फडणवीस बोले — मतदाता सूची शुद्धिकरण दशकों पुरानी नियमित प्रक्रिया
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने 14 अक्टूबर 2026 को राज्य में जारी विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया का पुरज़ोर बचाव किया और विपक्ष की आलोचनाओं को सिरे से खारिज किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि SIR कोई नई या मनमानी व्यवस्था नहीं है, बल्कि यह दशकों से भारत की चुनावी प्रक्रिया का अभिन्न हिस्सा रही है। फडणवीस ने कहा कि मज़बूत लोकतंत्र के लिए स्वच्छ और सटीक मतदाता सूची अनिवार्य है।
मुख्यमंत्री ने क्या कहा
मतदाता सूची शुद्धिकरण अभियान को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर नागरिकों की चिंताओं का जवाब देते हुए फडणवीस ने कहा कि SIR का एकमात्र उद्देश्य मतदाता सूची को पारदर्शी और अद्यतन बनाना है — किसी भी पात्र नागरिक को उसके संवैधानिक मतदान अधिकार से वंचित करना नहीं।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जिन मतदाताओं के नाम सूची में नहीं हैं या गलती से हटाए गए हैं, उन्हें सुधार के लिए पुनः आवेदन का पूरा अवसर दिया गया है।
समयसीमा विस्तार और आवेदन प्रक्रिया
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रारंभ में अपेक्षित नागरिक भागीदारी न मिलने के कारण चुनावी तंत्र ने दावे, आपत्तियाँ और नए पंजीकरण की अंतिम तिथि बढ़ा दी है। इससे पहले भारत निर्वाचन आयोग ने सोमवार, 12 अक्टूबर 2026 को यह समयसीमा बढ़ाई थी। अब नागरिक 26 अक्टूबर 2026 तक दावे और आपत्तियाँ दर्ज करा सकते हैं।
पहली बार मतदान करने वाले पात्र नागरिक या जिनका नाम प्रारूप सूची में नहीं है, वे फॉर्म-6 के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। नाम, पता या अन्य व्यक्तिगत विवरण में त्रुटि होने पर फॉर्म-8 जमा कर सुधार कराया जा सकता है।
तकनीक का उपयोग और अंतिम निर्णय का अधिकार
फडणवीस ने स्पष्ट किया कि डुप्लीकेट या संदिग्ध प्रविष्टियों की पहचान के लिए आधुनिक तकनीकी उपकरणों का उपयोग किया जाता है, लेकिन किसी भी नाम को जोड़ने या हटाने का अंतिम निर्णय केवल इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ERO) ही लेते हैं।
उन्होंने कहा कि डुप्लीकेट, मृत और स्थायी रूप से अन्यत्र जा चुके लोगों के नाम हटाना चुनाव की पवित्रता बनाए रखने और प्रत्येक वैध वोट की सुरक्षा के लिए आवश्यक है।
नागरिकों से अपील और हेल्पलाइन
मुख्यमंत्री ने महाराष्ट्र के सभी पात्र नागरिकों से अपील की कि वे आधिकारिक पोर्टल या स्थानीय बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) के माध्यम से प्रारूप मतदाता सूची में अपना नाम जाँचें और सहायता के लिए हेल्पलाइन नंबर 1950 का उपयोग करें।
गौरतलब है कि राज्य की प्रारूप मतदाता सूची 31 अगस्त 2026 को प्रकाशित की गई थी। दावे और आपत्तियों पर नोटिस जारी करने तथा निपटारे की प्रक्रिया 10 नवंबर 2026 तक चलेगी, और अंतिम मतदाता सूची पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 16 नवंबर 2026 को प्रकाशित की जाएगी।
आगे क्या होगा
यह ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र में अगले विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ धीरे-धीरे तेज़ हो रही हैं और मतदाता सूची की शुद्धता एक संवेदनशील राजनीतिक मुद्दा बन चुकी है। आलोचकों का कहना है कि SIR के दौरान नाम हटाने की प्रक्रिया में पारदर्शिता और अधिक होनी चाहिए। सरकार का कहना है कि निर्धारित समयसीमा के भीतर हर वास्तविक मतदाता को सूची में शामिल करने का पूरा प्रयास किया जाएगा।