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महाराष्ट्र SIR विवाद: CM फडणवीस बोले — मतदाता सूची शुद्धिकरण दशकों पुरानी नियमित प्रक्रिया

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महाराष्ट्र SIR विवाद: CM फडणवीस बोले — मतदाता सूची शुद्धिकरण दशकों पुरानी नियमित प्रक्रिया

सारांश

CM देवेंद्र फडणवीस ने SIR को दशकों पुरानी नियमित प्रक्रिया बताते हुए विपक्ष की आलोचनाओं को खारिज किया। दावे-आपत्तियों की समयसीमा 26 अक्टूबर तक बढ़ाई गई; अंतिम सूची 16 नवंबर को आएगी। हर पात्र मतदाता के अधिकार की रक्षा का आश्वासन।

मुख्य बातें

CM देवेंद्र फडणवीस ने 14 अक्टूबर 2026 को एक्स पर महाराष्ट्र में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया का बचाव किया।
भारत निर्वाचन आयोग ने दावे और आपत्तियों की अंतिम तिथि बढ़ाकर 26 अक्टूबर 2026 की।
अंतिम मतदाता सूची पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 16 नवंबर 2026 को प्रकाशित होगी।
नाम जोड़ने के लिए फॉर्म-6 और विवरण सुधार के लिए फॉर्म-8 का उपयोग करें।
नाम जोड़ने या हटाने का अंतिम अधिकार केवल इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ERO) के पास।
सहायता के लिए हेल्पलाइन नंबर 1950 या स्थानीय BLO से संपर्क करें।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने 14 अक्टूबर 2026 को राज्य में जारी विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया का पुरज़ोर बचाव किया और विपक्ष की आलोचनाओं को सिरे से खारिज किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि SIR कोई नई या मनमानी व्यवस्था नहीं है, बल्कि यह दशकों से भारत की चुनावी प्रक्रिया का अभिन्न हिस्सा रही है। फडणवीस ने कहा कि मज़बूत लोकतंत्र के लिए स्वच्छ और सटीक मतदाता सूची अनिवार्य है।

मुख्यमंत्री ने क्या कहा

मतदाता सूची शुद्धिकरण अभियान को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर नागरिकों की चिंताओं का जवाब देते हुए फडणवीस ने कहा कि SIR का एकमात्र उद्देश्य मतदाता सूची को पारदर्शी और अद्यतन बनाना है — किसी भी पात्र नागरिक को उसके संवैधानिक मतदान अधिकार से वंचित करना नहीं।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जिन मतदाताओं के नाम सूची में नहीं हैं या गलती से हटाए गए हैं, उन्हें सुधार के लिए पुनः आवेदन का पूरा अवसर दिया गया है।

समयसीमा विस्तार और आवेदन प्रक्रिया

मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रारंभ में अपेक्षित नागरिक भागीदारी न मिलने के कारण चुनावी तंत्र ने दावे, आपत्तियाँ और नए पंजीकरण की अंतिम तिथि बढ़ा दी है। इससे पहले भारत निर्वाचन आयोग ने सोमवार, 12 अक्टूबर 2026 को यह समयसीमा बढ़ाई थी। अब नागरिक 26 अक्टूबर 2026 तक दावे और आपत्तियाँ दर्ज करा सकते हैं।

पहली बार मतदान करने वाले पात्र नागरिक या जिनका नाम प्रारूप सूची में नहीं है, वे फॉर्म-6 के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। नाम, पता या अन्य व्यक्तिगत विवरण में त्रुटि होने पर फॉर्म-8 जमा कर सुधार कराया जा सकता है।

तकनीक का उपयोग और अंतिम निर्णय का अधिकार

फडणवीस ने स्पष्ट किया कि डुप्लीकेट या संदिग्ध प्रविष्टियों की पहचान के लिए आधुनिक तकनीकी उपकरणों का उपयोग किया जाता है, लेकिन किसी भी नाम को जोड़ने या हटाने का अंतिम निर्णय केवल इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ERO) ही लेते हैं।

उन्होंने कहा कि डुप्लीकेट, मृत और स्थायी रूप से अन्यत्र जा चुके लोगों के नाम हटाना चुनाव की पवित्रता बनाए रखने और प्रत्येक वैध वोट की सुरक्षा के लिए आवश्यक है।

नागरिकों से अपील और हेल्पलाइन

मुख्यमंत्री ने महाराष्ट्र के सभी पात्र नागरिकों से अपील की कि वे आधिकारिक पोर्टल या स्थानीय बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) के माध्यम से प्रारूप मतदाता सूची में अपना नाम जाँचें और सहायता के लिए हेल्पलाइन नंबर 1950 का उपयोग करें।

गौरतलब है कि राज्य की प्रारूप मतदाता सूची 31 अगस्त 2026 को प्रकाशित की गई थी। दावे और आपत्तियों पर नोटिस जारी करने तथा निपटारे की प्रक्रिया 10 नवंबर 2026 तक चलेगी, और अंतिम मतदाता सूची पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 16 नवंबर 2026 को प्रकाशित की जाएगी।

आगे क्या होगा

यह ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र में अगले विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ धीरे-धीरे तेज़ हो रही हैं और मतदाता सूची की शुद्धता एक संवेदनशील राजनीतिक मुद्दा बन चुकी है। आलोचकों का कहना है कि SIR के दौरान नाम हटाने की प्रक्रिया में पारदर्शिता और अधिक होनी चाहिए। सरकार का कहना है कि निर्धारित समयसीमा के भीतर हर वास्तविक मतदाता को सूची में शामिल करने का पूरा प्रयास किया जाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह बचाव इसलिए आवश्यक हुआ क्योंकि प्रारंभिक भागीदारी इतनी कम रही कि समयसीमा बढ़ानी पड़ी — जो खुद इस बात का संकेत है कि ज़मीनी संचार की कमी रही। आलोचकों का कहना है कि तकनीकी उपकरणों से नाम हटाने की प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी है, और ERO के अंतिम निर्णय का दावा तब तक अपर्याप्त है जब तक शिकायत निवारण तंत्र सार्वजनिक और सत्यापन-योग्य न हो। महाराष्ट्र के राजनीतिक परिदृश्य को देखते हुए, जहाँ चुनावी प्रतिस्पर्धा तीखी है, मतदाता सूची की शुद्धता एक तकनीकी प्रशासनिक मामला नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक विश्वसनीयता का प्रश्न बन गई है।
RashtraPress
14 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाराष्ट्र में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) क्या है?
SIR यानी विशेष गहन पुनरीक्षण एक नियमित चुनावी प्रक्रिया है जिसके तहत मतदाता सूची से डुप्लीकेट, मृत और स्थानांतरित लोगों के नाम हटाए जाते हैं और नए पात्र मतदाताओं को जोड़ा जाता है। इसका उद्देश्य सूची को सटीक और अद्यतन बनाए रखना है, न कि किसी पात्र मतदाता को वंचित करना।
SIR के तहत दावे और आपत्तियाँ दर्ज कराने की अंतिम तिथि क्या है?
भारत निर्वाचन आयोग ने समयसीमा बढ़ाते हुए अब 26 अक्टूबर 2026 तक दावे और आपत्तियाँ दर्ज कराने की अनुमति दी है। अंतिम मतदाता सूची 16 नवंबर 2026 को प्रकाशित की जाएगी।
अगर मेरा नाम मतदाता सूची में नहीं है तो मैं क्या करूँ?
पहली बार मतदान करने वाले या जिनका नाम प्रारूप सूची में नहीं है, वे फॉर्म-6 के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। नाम, पता या अन्य विवरण में सुधार के लिए फॉर्म-8 जमा करना होगा। सहायता के लिए हेल्पलाइन नंबर 1950 या स्थानीय BLO से संपर्क किया जा सकता है।
SIR में नाम हटाने का अंतिम अधिकार किसके पास है?
CM फडणवीस के अनुसार, भले ही डुप्लीकेट या संदिग्ध प्रविष्टियों की पहचान के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग किया जाता है, लेकिन किसी भी नाम को जोड़ने या हटाने का अंतिम निर्णय केवल इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ERO) के पास है।
विपक्ष SIR प्रक्रिया का विरोध क्यों कर रहा है?
आलोचकों का कहना है कि SIR के दौरान नाम हटाने की प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी है और इससे पात्र मतदाताओं के वंचित होने का जोखिम है। CM फडणवीस ने इन आशंकाओं को गलतफहमी बताते हुए खारिज किया और कहा कि प्रक्रिया संवैधानिक रूप से स्थापित है।
राष्ट्र प्रेस
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