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चुनाव आयोग ने 6 राज्यों में मतदाता सूची पुनरीक्षण की समयसीमा बढ़ाई, 30 नवंबर को फाइनल लिस्ट

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चुनाव आयोग ने 6 राज्यों में मतदाता सूची पुनरीक्षण की समयसीमा बढ़ाई, 30 नवंबर को फाइनल लिस्ट

सारांश

भारत निर्वाचन आयोग ने नागालैंड, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, हरियाणा, महाराष्ट्र और दिल्ली में मतदाता सूची पुनरीक्षण की समयसीमा बढ़ा दी है। अधिकांश राज्यों में अंतिम सूची 30 नवंबर और दिल्ली में 22 दिसंबर 2026 को प्रकाशित होगी। यह बदलाव लाखों पात्र मतदाताओं को नामांकन का अतिरिक्त अवसर देता है।

मुख्य बातें

भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने नागालैंड, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, हरियाणा, महाराष्ट्र और दिल्ली में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की समयसीमा संशोधित की।
हरियाणा और आंध्र प्रदेश में दावे-आपत्तियों का निस्तारण 20 नवंबर 2026 तक; अंतिम सूची 30 नवंबर 2026 को।
महाराष्ट्र में दावे-आपत्तियाँ 13 नवंबर 2026 तक, निस्तारण 25 नवंबर तक; अंतिम सूची 30 नवंबर 2026 को।
दिल्ली में दावे-आपत्तियाँ 25 नवंबर तक, निपटारा 15 दिसंबर तक; अंतिम सूची 22 दिसंबर 2026 को।
सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को लिखित सूचना देना और राज्य राजपत्र में अधिसूचना प्रकाशित कराना अनिवार्य किया गया।

भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने 29 अक्टूबर 2026 को नागालैंड, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, हरियाणा, महाराष्ट्र और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में मतदाता सूचियों के 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (SIR) कार्यक्रम की समयसीमा में संशोधन किया है। इस संशोधन के तहत अधिकांश राज्यों में अंतिम मतदाता सूची 30 नवंबर 2026 को प्रकाशित की जाएगी, जबकि दिल्ली में यह 22 दिसंबर 2026 को जारी होगी।

मुख्य घटनाक्रम

निर्वाचन आयोग के संशोधित आदेश के अनुसार हरियाणा और आंध्र प्रदेश दोनों में 1 जुलाई 2026 को अर्हता तिथि निर्धारित की गई है। इन दोनों राज्यों में नोटिस चरण तथा दावों-आपत्तियों के निस्तारण की अवधि 31 जुलाई 2026 से बढ़ाकर 20 नवंबर 2026 तक कर दी गई है। अंतिम मतदाता सूची 30 नवंबर 2026 को प्रकाशित होगी।

महाराष्ट्र में विशेष गहन पुनरीक्षण के लिए 1 अक्टूबर 2026 को अर्हता तिथि मानी गई है। यहाँ दावे और आपत्तियाँ दाखिल करने की अवधि 31 अगस्त 2026 से 13 नवंबर 2026 तक है, जबकि नोटिस चरण और दावे-आपत्तियों के निस्तारण की अवधि 31 अगस्त 2026 से 25 नवंबर 2026 तक निर्धारित की गई है। अंतिम सूची यहाँ भी 30 नवंबर 2026 को प्रकाशित होगी।

दिल्ली के लिए अलग समयसारणी

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के लिए अलग कार्यक्रम जारी किया गया है। दिल्ली में नागरिक 25 नवंबर 2026 तक दावे और आपत्तियाँ दर्ज करा सकेंगे। इसके बाद 15 दिसंबर 2026 तक सभी दावों-आपत्तियों का निपटारा किया जाएगा और अंतिम मतदाता सूची 22 दिसंबर 2026 को प्रकाशित होगी। यह समयसारणी अन्य राज्यों की तुलना में तीन सप्ताह आगे खिसकती है, जो राजधानी में मतदाता नामांकन की जटिलता और बड़ी संख्या को दर्शाती है।

आयोग के निर्देश और पारदर्शिता

निर्वाचन आयोग ने सभी राज्य सरकारों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि संशोधित कार्यक्रम की अधिसूचना राज्य राजपत्र के असाधारण अंक में तत्काल प्रकाशित कराई जाए। आयोग ने यह भी अनिवार्य किया है कि सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को इस बदलाव की लिखित सूचना दी जाए, ताकि पुनरीक्षण प्रक्रिया में उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित हो सके। आयोग ने यह भी कहा है कि संशोधित कार्यक्रम को विभिन्न माध्यमों से संबंधित अधिकारियों और आम जनता तक पहुँचाया जाए।

गौरतलब है कि विशेष गहन पुनरीक्षण एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है जिसके तहत निर्वाचन नामावली को अद्यतन किया जाता है — फर्जी नाम हटाए जाते हैं, नए पात्र मतदाताओं को जोड़ा जाता है और पते में बदलाव दर्ज किए जाते हैं। इस प्रक्रिया की विश्वसनीयता किसी भी चुनाव की निष्पक्षता की बुनियाद मानी जाती है।

आम जनता पर असर

समयसीमा बढ़ाए जाने से इन छह राज्यों के लाखों पात्र मतदाताओं को अपना नाम सूची में जुड़वाने या सुधार कराने का अतिरिक्त समय मिलेगा। विशेष रूप से वे युवा जो 1 जुलाई 2026 तक 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुके हैं, वे इस अवधि में अपना नाम मतदाता सूची में दर्ज करा सकते हैं। आलोचकों का कहना है कि बार-बार समयसीमा बढ़ाने से प्रशासनिक तैयारियों पर सवाल उठते हैं, हालाँकि आयोग का मानना है कि इससे समावेशी भागीदारी सुनिश्चित होती है।

क्या होगा आगे

संशोधित कार्यक्रम के अनुसार अधिकांश राज्यों में 30 नवंबर 2026 और दिल्ली में 22 दिसंबर 2026 को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशन के बाद आयोग अगले चुनावी चक्र की तैयारी शुरू कर सकेगा। यह प्रक्रिया उन राज्यों में विशेष महत्व रखती है जहाँ निकट भविष्य में विधानसभा या स्थानीय निकाय चुनाव संभावित हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन बार-बार होने वाले ऐसे संशोधन यह सवाल भी उठाते हैं कि मूल कार्यक्रम किस आधार पर तय किया जाता है। दिल्ली के लिए अलग और लंबी समयसारणी राजधानी में मतदाता नामांकन की जटिलता को रेखांकित करती है, जहाँ प्रवासी आबादी और पते में बदलाव एक स्थायी चुनौती है। आलोचक यह भी पूछ सकते हैं कि जब डिजिटल मतदाता पंजीकरण प्रणाली मौजूद है, तो समयसीमा विस्तार की नौबत क्यों आती है। वास्तविक कसौटी यह होगी कि इस अतिरिक्त समय में कितने पात्र नागरिक सूची में जुड़ पाते हैं।
RashtraPress
30 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत निर्वाचन आयोग ने किन राज्यों में मतदाता सूची पुनरीक्षण की समयसीमा बढ़ाई है?
आयोग ने नागालैंड, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, हरियाणा, महाराष्ट्र और दिल्ली में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की समयसीमा संशोधित की है। इन सभी राज्यों में संशोधित कार्यक्रम के तहत दावों-आपत्तियों की प्रक्रिया और अंतिम सूची प्रकाशन की तारीखें आगे बढ़ा दी गई हैं।
इन राज्यों में अंतिम मतदाता सूची कब प्रकाशित होगी?
हरियाणा, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, तेलंगाना और नागालैंड में अंतिम मतदाता सूची 30 नवंबर 2026 को प्रकाशित होगी। दिल्ली में यह सूची 22 दिसंबर 2026 को जारी की जाएगी।
दिल्ली में मतदाता सूची में नाम जुड़वाने या आपत्ति दर्ज कराने की अंतिम तारीख क्या है?
दिल्ली में नागरिक 25 नवंबर 2026 तक दावे और आपत्तियाँ दर्ज करा सकेंगे। इसके बाद 15 दिसंबर 2026 तक सभी दावों-आपत्तियों का निपटारा किया जाएगा और अंतिम वोटर लिस्ट 22 दिसंबर 2026 को प्रकाशित होगी।
विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) क्या होता है और यह क्यों जरूरी है?
विशेष गहन पुनरीक्षण वह प्रक्रिया है जिसके तहत निर्वाचन नामावली को अद्यतन किया जाता है — फर्जी या दोहरे नाम हटाए जाते हैं, नए पात्र मतदाताओं को जोड़ा जाता है और पते में बदलाव दर्ज किए जाते हैं। यह प्रक्रिया चुनावों की निष्पक्षता और मतदाता भागीदारी की बुनियाद मानी जाती है।
हरियाणा और आंध्र प्रदेश में मतदाता सूची की अर्हता तिथि क्या है?
हरियाणा और आंध्र प्रदेश दोनों में 1 जुलाई 2026 को अर्हता तिथि निर्धारित की गई है। इसका अर्थ है कि जो नागरिक इस तिथि तक 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुके हैं, वे 20 नवंबर 2026 तक मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के पात्र हैं।
राष्ट्र प्रेस
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