चुनाव आयोग ने 6 राज्यों में मतदाता सूची पुनरीक्षण की समयसीमा बढ़ाई, 30 नवंबर को फाइनल लिस्ट
सारांश
मुख्य बातें
भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने 29 अक्टूबर 2026 को नागालैंड, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, हरियाणा, महाराष्ट्र और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में मतदाता सूचियों के 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (SIR) कार्यक्रम की समयसीमा में संशोधन किया है। इस संशोधन के तहत अधिकांश राज्यों में अंतिम मतदाता सूची 30 नवंबर 2026 को प्रकाशित की जाएगी, जबकि दिल्ली में यह 22 दिसंबर 2026 को जारी होगी।
मुख्य घटनाक्रम
निर्वाचन आयोग के संशोधित आदेश के अनुसार हरियाणा और आंध्र प्रदेश दोनों में 1 जुलाई 2026 को अर्हता तिथि निर्धारित की गई है। इन दोनों राज्यों में नोटिस चरण तथा दावों-आपत्तियों के निस्तारण की अवधि 31 जुलाई 2026 से बढ़ाकर 20 नवंबर 2026 तक कर दी गई है। अंतिम मतदाता सूची 30 नवंबर 2026 को प्रकाशित होगी।
महाराष्ट्र में विशेष गहन पुनरीक्षण के लिए 1 अक्टूबर 2026 को अर्हता तिथि मानी गई है। यहाँ दावे और आपत्तियाँ दाखिल करने की अवधि 31 अगस्त 2026 से 13 नवंबर 2026 तक है, जबकि नोटिस चरण और दावे-आपत्तियों के निस्तारण की अवधि 31 अगस्त 2026 से 25 नवंबर 2026 तक निर्धारित की गई है। अंतिम सूची यहाँ भी 30 नवंबर 2026 को प्रकाशित होगी।
दिल्ली के लिए अलग समयसारणी
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के लिए अलग कार्यक्रम जारी किया गया है। दिल्ली में नागरिक 25 नवंबर 2026 तक दावे और आपत्तियाँ दर्ज करा सकेंगे। इसके बाद 15 दिसंबर 2026 तक सभी दावों-आपत्तियों का निपटारा किया जाएगा और अंतिम मतदाता सूची 22 दिसंबर 2026 को प्रकाशित होगी। यह समयसारणी अन्य राज्यों की तुलना में तीन सप्ताह आगे खिसकती है, जो राजधानी में मतदाता नामांकन की जटिलता और बड़ी संख्या को दर्शाती है।
आयोग के निर्देश और पारदर्शिता
निर्वाचन आयोग ने सभी राज्य सरकारों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि संशोधित कार्यक्रम की अधिसूचना राज्य राजपत्र के असाधारण अंक में तत्काल प्रकाशित कराई जाए। आयोग ने यह भी अनिवार्य किया है कि सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को इस बदलाव की लिखित सूचना दी जाए, ताकि पुनरीक्षण प्रक्रिया में उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित हो सके। आयोग ने यह भी कहा है कि संशोधित कार्यक्रम को विभिन्न माध्यमों से संबंधित अधिकारियों और आम जनता तक पहुँचाया जाए।
गौरतलब है कि विशेष गहन पुनरीक्षण एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है जिसके तहत निर्वाचन नामावली को अद्यतन किया जाता है — फर्जी नाम हटाए जाते हैं, नए पात्र मतदाताओं को जोड़ा जाता है और पते में बदलाव दर्ज किए जाते हैं। इस प्रक्रिया की विश्वसनीयता किसी भी चुनाव की निष्पक्षता की बुनियाद मानी जाती है।
आम जनता पर असर
समयसीमा बढ़ाए जाने से इन छह राज्यों के लाखों पात्र मतदाताओं को अपना नाम सूची में जुड़वाने या सुधार कराने का अतिरिक्त समय मिलेगा। विशेष रूप से वे युवा जो 1 जुलाई 2026 तक 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुके हैं, वे इस अवधि में अपना नाम मतदाता सूची में दर्ज करा सकते हैं। आलोचकों का कहना है कि बार-बार समयसीमा बढ़ाने से प्रशासनिक तैयारियों पर सवाल उठते हैं, हालाँकि आयोग का मानना है कि इससे समावेशी भागीदारी सुनिश्चित होती है।
क्या होगा आगे
संशोधित कार्यक्रम के अनुसार अधिकांश राज्यों में 30 नवंबर 2026 और दिल्ली में 22 दिसंबर 2026 को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशन के बाद आयोग अगले चुनावी चक्र की तैयारी शुरू कर सकेगा। यह प्रक्रिया उन राज्यों में विशेष महत्व रखती है जहाँ निकट भविष्य में विधानसभा या स्थानीय निकाय चुनाव संभावित हैं।