30 अक्टूबर 2026
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सिद्धारमैया को बेंगलुरु पुलिस की क्लीन चिट: स्टिंग वीडियो के आरोप फर्जी, दिल्ली से एक गिरफ्तार

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सिद्धारमैया को बेंगलुरु पुलिस की क्लीन चिट: स्टिंग वीडियो के आरोप फर्जी, दिल्ली से एक गिरफ्तार

सारांश

बेंगलुरु पुलिस की जाँच ने स्टिंग वीडियो को फर्जी करार दिया और एक सुनियोजित राजनीतिक साजिश की ओर उँगली उठाई। 2011 की कथित घटना को 2023 में रिकॉर्ड कर 2026 में वायरल किए गए इस वीडियो के सिलसिले में दिल्ली NCR से एक आरोपी गिरफ्तार किया गया है, जिसके राजनीतिक कनेक्शन की जाँच जारी है।

मुख्य बातें

बेंगलुरु CCB साइबर क्राइम पुलिस ने 29 अक्टूबर 2026 को कथित स्टिंग मामले में सिद्धारमैया को क्लीन चिट दी।
क्राइम नंबर 56/2026 की जाँच में वीडियो के आरोप प्रथम दृष्टया झूठे और मनगढ़ंत पाए गए।
वीडियो कथित तौर पर 2011 की घटना पर आधारित था, लेकिन 2023 में रिकॉर्ड किया गया और 2026 में वायरल हुआ।
वीडियो अपलोड करने में VPN, मास्क्ड IP और फर्जी फोन नंबर जैसी उन्नत डिजिटल तकनीकों का इस्तेमाल किया गया।
24 अक्टूबर 2026 को दिल्ली NCR से एक फ्रीलांस कंटेंट क्रिएटर को गिरफ्तार किया गया; उसके राजनीतिक कनेक्शन की जाँच जारी है।
जब्त मोबाइल फोन फॉरेंसिक लैब में भेजा गया है; रिपोर्ट का इंतजार है।

बेंगलुरु सिटी पुलिस की सेंट्रल क्राइम ब्रांच (CCB) की साइबर क्राइम शाखा ने 29 अक्टूबर 2026 को कथित स्टिंग ऑपरेशन मामले में कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस वर्किंग कमिटी (CWC) के सदस्य सिद्धारमैया को क्लीन चिट दे दी है। पुलिस ने आधिकारिक बयान में कहा कि सोशल मीडिया पर वायरल हुए कथित वीडियो में लगाए गए यौन शोषण के आरोप प्रथम दृष्टया झूठे और मनगढ़ंत प्रतीत होते हैं। जाँच में यह भी सामने आया है कि यह वीडियो एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा हो सकता है, जिसका मकसद जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों की छवि धूमिल करना था।

मुख्य घटनाक्रम

क्राइम नंबर 56/2026 की जाँच के दौरान पुलिस ने वीडियो में नजर आने वाले सभी लोगों की पहचान कर उनसे विस्तृत पूछताछ की — कुछ लोगों से तो कई बार पूछताछ हुई। पुलिस के अनुसार, अब तक दर्ज किए गए बयानों और जुटाए गए साक्ष्यों से यह प्रमाणित नहीं होता कि वीडियो में दिखाई गई घटना वास्तव में उस रूप में घटी। जिस मोबाइल फोन से कथित तौर पर यह वीडियो रिकॉर्ड किया गया था, उसे खोज निकाल कर जब्त कर लिया गया है और फॉरेंसिक जाँच के लिए प्रयोगशाला भेजा गया है।

वीडियो की समय-रेखा और डिजिटल साजिश

जाँच में एक चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है — पुलिस के अनुसार यह वीडियो 2023 में रिकॉर्ड किया गया था, जबकि इसमें जिस घटना का उल्लेख है, वह 2011 की बताई जा रही है। घटना के करीब 12 साल बाद इसे रिकॉर्ड करने की मंशा की जाँच की जा रही है। सितंबर और अक्टूबर 2026 के दौरान इसे YouTube और X (पूर्व में ट्विटर) सहित कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपलोड किया गया।

डिजिटल निशान छिपाने के लिए वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क (VPN), मास्क किए गए IP एड्रेस, वर्चुअल फोन नंबर जैसी उन्नत तकनीकों का इस्तेमाल किया गया। जाँच में कर्नाटक के बाहर के स्थानों से जुड़े डिजिटल निशान भी मिले हैं।

दिल्ली से गिरफ्तारी और राजनीतिक कड़ियाँ

तकनीकी विश्लेषण के आधार पर जाँचकर्ताओं ने YouTube पर वीडियो अपलोड करने में इस्तेमाल मोबाइल फोन का पता लगाया, जो दिल्ली की एक पुराने और रिफर्बिश्ड डिवाइस बेचने वाली दुकान से जुड़ा है। इस सिलसिले में 24 अक्टूबर 2026 को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) से एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया।

प्रारंभिक जाँच में यह सामने आया है कि गिरफ्तार व्यक्ति एक फ्रीलांस सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर के रूप में काम करता है और कथित तौर पर नई दिल्ली में रहने वाले कुछ राजनीतिक रूप से प्रभावशाली लोगों से उसके संबंध हो सकते हैं। इन कथित संबंधों की प्रकृति और दायरे की जाँच अभी जारी है।

पुलिस की अपील और आगे की कार्रवाई

बेंगलुरु सिटी पुलिस ने आम जनता, मीडिया संगठनों और सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं से अपील की है कि वे बिना पुष्टि किए आरोपों को न फैलाएँ और जल्दबाजी में कोई निष्कर्ष न निकालें। जाँच में यह भी पता लगाया जा रहा है कि क्या वीडियो को गलत इरादे से तैयार करने, प्रसारित करने और अपलोड करने में कई लोगों ने मिलकर काम किया। आगे की पूछताछ के लिए चिन्हित लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं, लेकिन जाँच की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए उनके नाम अभी सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।

गौरतलब है कि यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब कर्नाटक की राजनीति पहले से ही कई विवादों के केंद्र में है। फॉरेंसिक लैब की रिपोर्ट आने के बाद जाँच की दिशा और स्पष्ट होने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो 'साजिश' का आरोप भी उतना ही अधूरा रहेगा जितना वह वीडियो।
RashtraPress
30 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सिद्धारमैया को बेंगलुरु पुलिस ने क्लीन चिट क्यों दी?
बेंगलुरु CCB की साइबर क्राइम पुलिस ने जाँच में पाया कि कथित स्टिंग वीडियो में लगाए गए यौन शोषण के आरोप प्रथम दृष्टया झूठे और मनगढ़ंत हैं। दर्ज किए गए बयानों और जुटाए गए सबूतों से यह प्रमाणित नहीं होता कि वीडियो में दिखाई गई घटना वास्तव में उस रूप में घटी।
कथित स्टिंग वीडियो कब का है और कब वायरल हुआ?
पुलिस के अनुसार यह वीडियो 2023 में रिकॉर्ड किया गया था, जबकि इसमें 2011 की घटना का उल्लेख है। सितंबर और अक्टूबर 2026 में इसे YouTube और X (पूर्व में ट्विटर) सहित कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपलोड किया गया।
इस मामले में दिल्ली से कौन गिरफ्तार हुआ?
24 अक्टूबर 2026 को दिल्ली NCR से एक फ्रीलांस सोशल मीडिया कंटेंट क्रिएटर को गिरफ्तार किया गया। प्रारंभिक जाँच में उसके नई दिल्ली के कुछ राजनीतिक रूप से प्रभावशाली लोगों से कथित संबंधों का संकेत मिला है, जिनकी जाँच जारी है।
वीडियो फैलाने में किस तकनीक का इस्तेमाल हुआ?
वीडियो को अज्ञात अकाउंट्स के जरिए अपलोड किया गया और डिजिटल पहचान छिपाने के लिए VPN, मास्क किए गए IP एड्रेस और वर्चुअल फोन नंबरों का उपयोग किया गया। जाँच में कर्नाटक के बाहर के स्थानों से जुड़े डिजिटल निशान भी मिले हैं।
इस मामले में आगे क्या होगा?
जब्त मोबाइल फोन फॉरेंसिक लैब में है और उसकी रिपोर्ट का इंतजार है। आगे की पूछताछ के लिए चिन्हित व्यक्तियों को नोटिस जारी किए गए हैं और जाँच जारी है।
राष्ट्र प्रेस
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