सिद्दारमैया के खिलाफ फर्जी वीडियो मामले में CCB ने दो संदिग्ध हिरासत में लिए, FIR दर्ज
सारांश
मुख्य बातें
बेंगलुरु की केंद्रीय अपराध शाखा (CCB) की साइबर क्राइम यूनिट ने 14 अक्टूबर 2026 को कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस कार्यसमिति के सदस्य सिद्दारमैया की शिकायत पर FIR दर्ज करते हुए दो संदिग्धों को हिरासत में लिया है। सिद्दारमैया का आरोप है कि उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचाने के इरादे से सोशल मीडिया पर उनसे जुड़े फर्जी और दुर्भावनापूर्ण वीडियो प्रसारित किए जा रहे हैं।
मुख्य घटनाक्रम
बेंगलुरु पुलिस आयुक्त सीमंथ कुमार सिंह के निर्देश पर साइबर क्राइम ब्रांच ने जाँच शुरू की और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों पर वीडियो प्रसारित करने वाले प्रमुख खातों के आईपी पते ट्रेस किए। इन आईपी पतों के आधार पर संबंधित उपकरणों के मालिकों की पहचान की गई और दोनों संदिग्धों को एक अज्ञात स्थान पर पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि कथित वीडियो का स्रोत क्या था और इस अभियान के पीछे किसका हाथ है।
सिद्दारमैया की शिकायत और अदालती याचिका
सिद्दारमैया ने स्वयं पुलिस आयुक्त को लिखित शिकायत सौंपी, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया कि यह एक सुनियोजित राजनीतिक साजिश है और उन्होंने भ्रामक सामग्री फैलाने वाले सोशल मीडिया खातों का विवरण भी दिया।
इसके अलावा उन्होंने मंगलवार को बेंगलुरु की सिविल एवं सत्र न्यायालय में एक याचिका दायर कर समाचार पत्रों, टेलीविजन चैनलों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों को उनसे जुड़े कथित स्टिंग ऑपरेशन वीडियो के प्रकाशन या प्रसारण पर रोक लगाने का आदेश माँगा है। गौरतलब है कि यह वीडियो पिछले कुछ दिनों से विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों पर प्रसारित हो रहा था।
सिद्दारमैया का पक्ष
सिद्दारमैया ने दावा किया है कि उनका इस स्टिंग ऑपरेशन वीडियो से कोई संबंध नहीं है और कुछ 'शरारती तत्व' इसे उनके खिलाफ मानहानिकारक सामग्री के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। अपने बयान में उन्होंने कहा, 'मेरी अंतरात्मा जानती है कि मैं इस मामले में पूरी तरह निर्दोष हूँ।' उन्होंने विश्वास जताया कि कर्नाटक की जनता, जो उनके पाँच दशक लंबे राजनीतिक करियर से परिचित है, सच्चाई को समझेगी।
साइबर अपराध की जाँच प्रक्रिया
CCB की साइबर क्राइम यूनिट ने शिकायत दर्ज होते ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों की निगरानी आरंभ कर दी। जाँच में आईपी एड्रेस ट्रेसिंग और उपकरण पहचान जैसी तकनीकी प्रक्रियाओं का उपयोग किया गया। यह ऐसे समय में आया है जब भारत में राजनेताओं के विरुद्ध डीपफेक और फर्जी वीडियो के जरिये दुष्प्रचार के मामले लगातार बढ़ रहे हैं।
आगे क्या होगा
दोनों हिरासत में लिए गए संदिग्धों से पूछताछ जारी है और जाँच के दायरे में और भी लोगों के आने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। अदालत में दायर याचिका पर सुनवाई का इंतजार है, जो यह तय करेगी कि वीडियो के प्रसार पर अस्थायी रोक लगाई जाएगी या नहीं। कर्नाटक की राजनीति में यह मामला आने वाले दिनों में और अधिक गर्माने के आसार हैं।