कर्नाटक स्टिंग विवाद: सिद्दारमैया ने बेंगलुरु कोर्ट में दायर की याचिका, भाजपा ने कांग्रेस पर लगाया 'पीठ में छुरा घोंपने' का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने 13 अक्टूबर 2026 को बेंगलुरु की एडिशनल सिटी एंड सेशंस कोर्ट (सीसीएच-18) में एक याचिका दायर की, जिसमें कथित स्टिंग ऑपरेशन से जुड़े उन ऑडियो और वीडियो क्लिप के प्रसार और प्रसारण पर रोक लगाने की मांग की गई है, जिन्हें वे मानहानिकारक बताते हैं। इस घटनाक्रम ने कर्नाटक की सियासत में नई हलचल पैदा कर दी है, जहाँ भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) पर अपने ही वरिष्ठ नेता को 'धोखा देने' का आरोप मढ़ दिया है।
मामला क्या है और कोर्ट में क्या मांगा
सिद्दारमैया ने बेंगलुरु की अदालत में दायर याचिका में कथित स्टिंग ऑपरेशन से संबंधित ऑडियो-वीडियो क्लिप के प्रसार पर तत्काल रोक लगाने की अपील की है। उन्होंने अदालत से इस पूरे मामले की जाँच कराने की भी माँग की है। इन क्लिप में उनके बारे में 'अपमानजनक' बातें कही गई हैं, ऐसा उनकी ओर से अदालत को बताया गया है।
यह विवाद BJP के पूर्व नेता और विधायक बसनागौड़ा पाटिल यतनाल के उन आरोपों के बाद और उलझ गया, जिनमें कहा गया था कि सिद्दारमैया को ब्लैकमेल करके इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया गया था। केंद्रीय भारी उद्योग और इस्पात मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने भी कथित स्टिंग ऑपरेशन के बारे में सार्वजनिक रूप से टिप्पणी की है।
भाजपा की प्रतिक्रिया: 'कांग्रेस ने किया एहसान-फरामोशी'
विपक्ष के नेता आर. अशोक ने बेंगलुरु में मीडिया से बात करते हुए कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, 'आज कांग्रेस ने ही सिद्दारमैया को अदालत जाने की परेशानी में डाला है। यह एक एहसान-फरामोश और धोखेबाज कांग्रेस है जिसने उनकी पीठ में छुरा घोंपा है। उन्होंने उन्हें ऐसी दयनीय स्थिति में पहुंचा दिया है कि उन्हें स्टे ऑर्डर पाने के लिए अदालत जाना पड़ रहा है। उन्होंने उनका इस्तेमाल किया और फिर उन्हें छोड़ दिया।'
अशोक ने कहा कि वे 'भारी मन से और अपनी इच्छा के विरुद्ध' यह बातें कह रहे हैं। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि सिद्दारमैया ने पूर्व मुख्यमंत्री डी. देवराज उर्स का रिकॉर्ड तोड़ा था और मुख्यमंत्री पद भी छोड़ दिया था। उनके अनुसार, इस योगदान के बाद भी कांग्रेस ने उनके साथ अन्याय किया।
एफआईआर और व्यापक राजनीतिक माँगें
अशोक ने माँग की कि कथित स्टिंग ऑपरेशन और ऑडियो-वीडियो क्लिप के प्रचार-प्रसार के संबंध में तुरंत एफआईआर दर्ज की जाए। उन्होंने कर्नाटक में चल रहे 'गंभीर सूखे' का हवाला देते हुए कांग्रेस सरकार पर किसानों की तकलीफों से मुंह फेरने का आरोप भी लगाया। उनके अनुसार, सरकार की ओर से दी जा रही 'मामूली आर्थिक मदद' को भी किसान लौटा रहे हैं, जबकि सत्तारूढ़ दल इस स्टिंग विवाद में उलझा हुआ है।
मुख्यमंत्री शिवकुमार पर भी निशाना
भाजपा नेता ने मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार की भी आलोचना की। अशोक ने आरोप लगाया कि पद संभालने के बाद से शिवकुमार ने 'कर्नाटक के बजाय दिल्ली में ज्यादा समय बिताया है।' उन्होंने कहा, 'राज्य के लोगों की जरा भी परवाह किए बिना, वे इस बात पर चर्चा करने में व्यस्त हैं कि स्टिंग ऑपरेशन किसने करवाया।'
गौरतलब है कि यह विवाद ऐसे समय में और तूल पकड़ रहा है जब कर्नाटक में कांग्रेस सरकार पर भ्रष्टाचार के कई आरोप पहले से ही लगे हुए हैं और राज्य की राजनीति अस्थिर बनी हुई है। अदालत इस याचिका पर आगे क्या रुख अपनाती है, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।