16 अक्टूबर 2026
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सिद्दारमैया स्टिंग ऑपरेशन पर ₹10-15 करोड़ खर्च का आरोप, भाजपा नेता आर. अशोक ने प्रायोजकों पर एफआईआर की मांग की

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सिद्दारमैया स्टिंग ऑपरेशन पर ₹10-15 करोड़ खर्च का आरोप, भाजपा नेता आर. अशोक ने प्रायोजकों पर एफआईआर की मांग की

सारांश

कर्नाटक में स्टिंग ऑपरेशन विवाद गहराया — BJP नेता आर. अशोक ने दावा किया कि सिद्दारमैया के खिलाफ वीडियो बनाने में ₹10-15 करोड़ की काली धन से फंडिंग हुई। मौजूदा एफआईआर अधूरी बताते हुए उन्होंने प्रायोजकों की पहचान के लिए नई एफआईआर की माँग की। मंत्री कुमारस्वामी ने भी राजनीतिक संरक्षण का आरोप जोड़ा।

मुख्य बातें

BJP नेता और कर्नाटक विपक्ष के नेता आर.
अशोक ने 16 अक्टूबर 2026 को आरोप लगाया कि सिद्दारमैया स्टिंग ऑपरेशन पर ₹10 से 15 करोड़ खर्च हुए।
अशोक ने कहा कि मौजूदा एफआईआर में केवल वीडियो फैलाने वालों का उल्लेख है; स्टिंग के प्रायोजकों पर कार्रवाई नहीं।
उन्होंने दावा किया कि काले धन का उपयोग स्टिंग की फंडिंग के लिए किया गया — यह आरोप अभी सत्यापित नहीं।
केंद्रीय मंत्री एच.डी.
कुमारस्वामी ने गृह मंत्री प्रियांक खड़गे पर निशाना साधते हुए कहा कि स्टिंग के पीछे के व्यक्ति को राजनीतिक संरक्षण मिल रहा है।
अशोक ने इसे राजनीतिक मर्यादा की गिरावट करार दिया और दिवंगत पूर्व मुख्यमंत्रियों वीरेंद्र पाटिल , केंगल हनुमंतैया व एस.
निजलिंगप्पा की विरासत का हवाला दिया।

कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता आर. अशोक ने शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026 को बेंगलुरु में पत्रकारों से बातचीत में आरोप लगाया कि पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस कार्य समिति (CWC) के सदस्य सिद्दारमैया के खिलाफ तैयार किए गए स्टिंग ऑपरेशन वीडियो पर ₹10 से 15 करोड़ तक खर्च किए गए हैं। उन्होंने माँग की कि मौजूदा एफआईआर की सीमा बढ़ाकर उन लोगों की पहचान की जाए जिन्होंने इस पूरे अभियान को करवाया और वित्तपोषित किया।

मुख्य आरोप और अशोक का बयान

आर. अशोक ने सीधे शब्दों में कहा, 'यह मेरी तरफ से एक सीधा आरोप है। पूर्व मुख्यमंत्री सिद्दारमैया के खिलाफ स्टिंग ऑपरेशन करने में लगभग 10 से 15 करोड़ रुपए खर्च किए गए।' उन्होंने सवाल उठाया कि यह धन किसने दिया, यह किस स्रोत से आया और इस पूरी कवायद के पीछे कौन था।

उन्होंने यह भी पूछा, 'क्या कोई ऐसा काम मुफ्त में करेगा?' — यह संकेत देते हुए कि उनके अनुसार इसमें काले धन का उपयोग किया गया। हालाँकि ये आरोप अभी तक सत्यापित नहीं हैं और पुलिस जाँच का विषय हैं।

एफआईआर की सीमा पर सवाल

अशोक ने इस विवाद में दर्ज मौजूदा एफआईआर की कमियाँ गिनाते हुए कहा कि उसमें केवल उन व्यक्तियों का उल्लेख है जिन्होंने वीडियो को सोशल मीडिया पर फैलाया, जबकि स्टिंग ऑपरेशन को करने और प्रायोजित करने वालों का कोई जिक्र नहीं है। उन्होंने कहा, 'कम से कम अगर एफआईआर दर्ज होती है तो पुलिस मामले की जाँच कर सकती है। अभी जो एफआईआर दर्ज है, उसमें स्टिंग ऑपरेशन किसने किया — इस बारे में कोई ठोस जानकारी नहीं है।'

उन्होंने विपक्षी नेताओं को सीधी चुनौती दी कि यदि वे वास्तव में इस मामले की तह तक पहुँचना चाहते हैं तो प्रायोजकों के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज कराएँ।

कुमारस्वामी का भी कांग्रेस पर निशाना

केंद्रीय भारी उद्योग और इस्पात मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने गुरुवार को कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे पर अपना हमला जारी रखा। कुमारस्वामी ने स्टिंग ऑपरेशन को संभालने के तरीके पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि इस ऑपरेशन के पीछे जो व्यक्ति है, उसे राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है। उनके इस बयान ने मामले को और अधिक राजनीतिक रंग दे दिया।

राजनीतिक मर्यादा का सवाल

आर. अशोक ने इस पूरे विवाद को 'राजनीतिक स्तर में गिरावट' करार दिया। उन्होंने चेतावनी दी कि इस तरह की हरकतें दिवंगत वीरेंद्र पाटिल, केंगल हनुमंतैया और एस. निजलिंगप्पा जैसे वरिष्ठ पूर्व मुख्यमंत्रियों का अपमान है, जिन्होंने राज्य की प्रतिष्ठा को बनाए रखा। यह टिप्पणी कर्नाटक की पुरानी राजनीतिक परंपराओं की याद दिलाते हुए वर्तमान परिवेश की आलोचना के रूप में देखी जा रही है।

आगे क्या होगा

यह मामला कर्नाटक की राजनीति में एक नया मोड़ ले रहा है, जहाँ एक तरफ BJP प्रायोजकों की जाँच की माँग कर रही है, तो दूसरी तरफ सत्तारूढ़ कांग्रेस वीडियो के प्रसार पर केंद्रित एफआईआर को पर्याप्त मान रही है। पुलिस की आगामी जाँच की दिशा और न्यायालय में संभावित याचिकाएँ यह तय करेंगी कि यह विवाद किस ओर जाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह स्पष्ट नहीं। BJP खुद वर्षों से ऐसे ऑपरेशनों के आरोपों से अछूती नहीं रही, इसलिए उसकी 'एफआईआर लाओ' की माँग को नैतिक दबाव से अधिक राजनीतिक रणनीति के रूप में पढ़ा जाना चाहिए। जब तक पुलिस निष्पक्ष जाँच नहीं करती, ₹10-15 करोड़ का यह आँकड़ा एक बेरोकटोक आरोप ही बना रहेगा।
RashtraPress
16 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सिद्दारमैया स्टिंग ऑपरेशन विवाद क्या है?
यह कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्दारमैया से जुड़े एक कथित स्टिंग ऑपरेशन वीडियो से जुड़ा विवाद है। BJP नेता आर. अशोक ने आरोप लगाया है कि इस वीडियो के निर्माण पर ₹10 से 15 करोड़ खर्च किए गए और इसमें काले धन का उपयोग हुआ।
आर. अशोक ने एफआईआर की माँग क्यों की?
अशोक का तर्क है कि मौजूदा एफआईआर केवल वीडियो फैलाने वालों पर केंद्रित है, जबकि स्टिंग ऑपरेशन को करवाने और प्रायोजित करने वालों की पहचान नहीं हो रही। उनका कहना है कि नई एफआईआर से पुलिस असली फंडर्स तक पहुँच सकती है।
एच.डी. कुमारस्वामी का इस मामले से क्या संबंध है?
केंद्रीय मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने गृह मंत्री प्रियांक खड़गे पर आरोप लगाया कि स्टिंग ऑपरेशन के पीछे जो व्यक्ति है उसे राजनीतिक संरक्षण मिल रहा है। उन्होंने स्टिंग को संभालने के सरकारी तरीके पर भी सवाल उठाए।
क्या ₹10-15 करोड़ का यह आरोप सत्यापित है?
नहीं, यह अभी तक केवल आर. अशोक का आरोप है और पुलिस या किसी स्वतंत्र एजेंसी द्वारा सत्यापित नहीं किया गया है। पुलिस जाँच की दिशा और न्यायिक प्रक्रिया ही इसकी सत्यता का निर्धारण करेगी।
इस विवाद का कर्नाटक की राजनीति पर क्या असर पड़ सकता है?
यह मामला सत्तारूढ़ कांग्रेस सरकार और मुख्यमंत्री सिद्दारमैया की साख को लेकर विपक्ष के लिए एक राजनीतिक अवसर बन चुका है। एफआईआर की जाँच का दायरा और न्यायालय में किसी संभावित याचिका का नतीजा यह तय करेगा कि इसके आगे क्या होता है।
राष्ट्र प्रेस
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