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भाजपा नेता आर. अशोक का आरोप: सिद्दारमैया ने कर्नाटक को वित्तीय संकट में छोड़ा, बेटे के लिए पद की जुगत में

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भाजपा नेता आर. अशोक का आरोप: सिद्दारमैया ने कर्नाटक को वित्तीय संकट में छोड़ा, बेटे के लिए पद की जुगत में

सारांश

भाजपा नेता आर. अशोक ने सिद्दारमैया पर कर्नाटक को वित्तीय संकट में छोड़ने का आरोप लगाया है — गृह लक्ष्मी से लेकर ESCOM तक भुगतान रुके बताए। सिद्दारमैया ने 8.1% विकास दर और GST रैंकिंग का हवाला देते हुए आरोप खारिज किए।

मुख्य बातें

अशोक ने 2 जून 2026 को सिद्दारमैया पर कर्नाटक को वित्तीय संकट में छोड़ने का आरोप लगाया।
अशोक का दावा — गृह लक्ष्मी योजना की किश्तें रुकीं, शक्ति योजना के लिए धन नहीं, ESCOM संकट में।
सिद्दारमैया पर आरोप कि वे राज्य की समस्याओं की बजाय बेटे के लिए राजनीतिक पद सुरक्षित करने में लगे हैं।
सिद्दारमैया ने आरोप खारिज किए — कर्नाटक की विकास दर 8.1% , राष्ट्रीय औसत 7.4% से अधिक; राजकोषीय घाटा 3% सीमा के भीतर।
राज्य का ऋण GSDP का 24.94% ; GST संग्रह में कर्नाटक देश में दूसरे स्थान पर — सिद्दारमैया का दावा।
BJP ने विधानसभा और सार्वजनिक विरोध के ज़रिए अभियान जारी रखने की घोषणा की।

कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता और वरिष्ठ भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता आर. अशोक ने मंगलवार, 2 जून 2026 को पूर्व मुख्यमंत्री सिद्दारमैया पर गंभीर आरोप लगाए। अशोक ने दावा किया कि सिद्दारमैया ने राज्य को गंभीर वित्तीय संकट में धकेलने के बाद मुख्यमंत्री पद डी.के. शिवकुमार को सौंपा, और अब उनका सारा ध्यान बेंगलुरु की राजनीति सँभालने के बजाय अपने बेटे के लिए कोई महत्वपूर्ण राजनीतिक पद सुरक्षित करने पर केंद्रित है। अशोक ने यह बयान 'कर्नाटक खंडहर में: सिद्दारमैया की शर्मनाक विरासत' शीर्षक वाले एक कड़े बयान के ज़रिए दिया।

मुख्य आरोप: जानबूझकर छोड़ा दिवालिया राज्य

अशोक ने आरोप लगाया कि सिद्दारमैया ने मुख्यमंत्री पद पर बने रहने के लिए संघर्ष नहीं किया क्योंकि वे राज्य की बिगड़ती वित्तीय स्थिति से भली-भाँति परिचित थे। उन्होंने कहा, 'असली कारण यह है कि सिद्दारमैया जानते थे कि वित्तीय स्थिति चरमरा रही है। उन्होंने जानबूझकर अपने उत्तराधिकारी के लिए एक दिवालिया राज्य छोड़ दिया।' कांग्रेस द्वारा नेतृत्व परिवर्तन को 'सुचारू और व्यवस्थित' बताने के दावे को भी अशोक ने सिरे से खारिज किया।

वित्तीय संकट के आरोप: ठेकेदार, ESCOM और कल्याण योजनाएँ

भाजपा नेता ने कांग्रेस सरकार पर कर्नाटक को 'कर्ज के अथाह सागर' में धकेलने का आरोप लगाया। उनके अनुसार, सरकारी बकाया राशि का भुगतान न होने से कई क्षेत्र प्रभावित हैं। उन्होंने दावा किया कि ठेकेदारों को पूर्ण किए गए कार्यों का भुगतान नहीं मिला, बिजली वितरण कंपनियाँ (ESCOM) गंभीर वित्तीय दबाव में हैं, और धन की कमी के कारण कल्याणकारी योजनाओं पर प्रतिकूल असर पड़ा है।

अशोक ने विशेष रूप से आरोप लगाया कि गृह लक्ष्मी योजना की किश्तें रोकी गई हैं, शक्ति योजना के लिए धन उपलब्ध नहीं है, आरटीसी कर्मचारियों को उनका हक नहीं मिला और अन्नभाग्य योजना के आवंटन में देरी हुई है। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस की 'अवैज्ञानिक' गारंटी योजनाओं का बोझ अंततः नागरिकों पर उच्च करों के रूप में पड़ सकता है।

बेटे के लिए पद और दिल्ली दौरों पर निशाना

अशोक ने सिद्दारमैया की हालिया नई दिल्ली यात्राओं की भी आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि सिद्दारमैया राज्य की वित्तीय चुनौतियों का समाधान खोजने के बजाय अपने बेटे के लिए राजनीतिक पद सुरक्षित करने में अधिक व्यस्त हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि कथित तौर पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी के दबाव में सिद्दारमैया को हटाए जाने से अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) समुदाय में नाराज़गी है और कर्नाटक कांग्रेस में आंतरिक संघर्ष की आशंका है।

सिद्दारमैया का पक्ष: मज़बूत राजकोषीय प्रदर्शन का दावा

गौरतलब है कि निवर्तमान मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कर्नाटक के मज़बूत राजकोषीय प्रदर्शन का हवाला दिया। उन्होंने बताया कि जीएसटी संग्रह में कर्नाटक महाराष्ट्र के बाद राष्ट्रीय स्तर पर दूसरे स्थान पर है। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य की 8.1 प्रतिशत की विकास दर राष्ट्रीय औसत 7.4 प्रतिशत से अधिक है। सिद्दारमैया के अनुसार, राज्य का राजकोषीय घाटा राजकोषीय उत्तरदायित्व अधिनियम की 3 प्रतिशत की सीमा के भीतर है और ऋण सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) का लगभग 24.94 प्रतिशत है।

भाजपा की आगे की रणनीति

अशोक ने स्पष्ट किया कि BJP विधानसभा के भीतर और सार्वजनिक विरोध प्रदर्शनों के ज़रिए इन मुद्दों को उठाती रहेगी। पार्टी ठेकेदारों, आरटीसी कर्मचारियों और सरकारी कल्याण योजनाओं के लाभार्थियों के लंबित भुगतान सुनिश्चित करने के लिए अपना अभियान जारी रखेगी। यह टकराव ऐसे समय में सामने आया है जब कर्नाटक में कांग्रेस का नेतृत्व परिवर्तन हुआ है और राज्य की राजनीति में नई हलचल शुरू हो गई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन उनका समय उतना ही महत्वपूर्ण है — नेतृत्व परिवर्तन के ठीक बाद विपक्ष का यह हमला कर्नाटक में BJP की पुनर्सक्रियता की रणनीति का हिस्सा लगता है। असली सवाल यह है कि क्या गारंटी योजनाओं के भुगतान में देरी एक संरचनात्मक राजकोषीय समस्या है या प्रशासनिक अड़चन — दोनों पक्ष अपने-अपने आँकड़े पेश कर रहे हैं, लेकिन स्वतंत्र राजकोषीय ऑडिट के बिना सच्चाई का पता लगाना मुश्किल है। OBC नाराज़गी का दावा भी ध्यान देने योग्य है, क्योंकि यह 2028 के विधानसभा चुनावों से पहले जातीय गोलबंदी का संकेत हो सकता है।
RashtraPress
18 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भाजपा नेता आर. अशोक ने सिद्दारमैया पर क्या आरोप लगाए हैं?
अशोक ने आरोप लगाया है कि सिद्दारमैया ने कर्नाटक को वित्तीय संकट में छोड़ते हुए मुख्यमंत्री पद डी.के. शिवकुमार को सौंपा और अब वे अपने बेटे के लिए राजनीतिक पद सुरक्षित करने में लगे हैं। उन्होंने गृह लक्ष्मी, शक्ति और अन्नभाग्य जैसी योजनाओं के भुगतान रुकने और ESCOM के संकट का भी हवाला दिया।
सिद्दारमैया ने इन आरोपों का जवाब कैसे दिया?
सिद्दारमैया ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि कर्नाटक की विकास दर 8.1% है जो राष्ट्रीय औसत 7.4% से अधिक है। उन्होंने यह भी बताया कि राज्य का राजकोषीय घाटा 3% की वैधानिक सीमा के भीतर है और GST संग्रह में कर्नाटक देश में दूसरे स्थान पर है।
कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन क्यों हुआ और इसका OBC समुदाय पर क्या असर है?
कांग्रेस ने सिद्दारमैया की जगह डी.के. शिवकुमार को नेतृत्व सौंपा, जिसे पार्टी ने सुचारू बताया। अशोक ने कथित तौर पर दावा किया कि यह बदलाव राहुल गांधी के दबाव में हुआ और इससे OBC समुदाय में नाराज़गी है, जो कर्नाटक कांग्रेस में आंतरिक संघर्ष को जन्म दे सकती है।
कर्नाटक की गारंटी योजनाओं पर भाजपा की क्या आपत्ति है?
भाजपा का आरोप है कि कांग्रेस की 'अवैज्ञानिक' गारंटी योजनाओं ने राज्य की अर्थव्यवस्था को कमज़ोर किया है और इनका वित्तीय बोझ अंततः नागरिकों पर उच्च करों के रूप में पड़ सकता है। अशोक ने विशेष रूप से ठेकेदारों, ESCOM और आरटीसी कर्मचारियों के लंबित भुगतान का उल्लेख किया।
भाजपा आगे क्या कदम उठाने की योजना बना रही है?
आर. अशोक ने घोषणा की है कि भाजपा विधानसभा के भीतर और सार्वजनिक विरोध प्रदर्शनों के ज़रिए इन मुद्दों को उठाती रहेगी। पार्टी ठेकेदारों, आरटीसी कर्मचारियों और कल्याण योजनाओं के लाभार्थियों के लंबित भुगतान सुनिश्चित कराने के लिए अभियान जारी रखेगी।
राष्ट्र प्रेस
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