कर्नाटक में कानून-व्यवस्था ध्वस्त: भाजपा नेता आर अशोक बोले — '713 पुलिस अधिकारी निलंबित, लोग अपराधियों से ज्यादा सिस्टम से डरते हैं'

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कर्नाटक में कानून-व्यवस्था ध्वस्त: भाजपा नेता आर अशोक बोले — '713 पुलिस अधिकारी निलंबित, लोग अपराधियों से ज्यादा सिस्टम से डरते हैं'

सारांश

भाजपा नेता आर. अशोक ने कर्नाटक में दो साल में 713 पुलिस अधिकारियों के निलंबन और 95 पर आपराधिक मामलों के आंकड़े पेश कर सिद्धारमैया सरकार को कठघरे में खड़ा किया। उनका दावा है कि राज्य में लोग अब अपराधियों से नहीं, बल्कि सिस्टम से डरते हैं — और बेंगलुरु की वैश्विक साख दाँव पर है।

मुख्य बातें

अशोक ने 13 मई को कर्नाटक में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर सिद्धारमैया सरकार को घेरा।
दावा: पिछले दो वर्षों में 713 पुलिस अधिकारी निलंबित, 95 के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज।
विभागीय जाँचों में 400 से अधिक पुलिस अधिकारी कथित तौर पर दोषी पाए गए।
राज्य के सरकारी स्कूलों में 38,163 शिक्षक पद रिक्त, जो कुल पदों का लगभग 22% है।
अशोक ने चेतावनी दी कि बेंगलुरु की ब्रांड वैल्यू और वैश्विक साख को नुकसान पहुँच सकता है।

बेंगलुरु में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता और कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने बुधवार, 13 मई को मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में कानून-व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है और हालात इतने गंभीर हो गए हैं कि आम नागरिक अपराधियों से ज्यादा कानून लागू करने वाले तंत्र से डरने लगे हैं।

पुलिस विभाग पर गंभीर आरोप

अशोक ने आंकड़ों का हवाला देते हुए दावा किया कि पिछले दो वर्षों में कर्नाटक में 713 पुलिस अधिकारियों को निलंबित किया गया है। उनके अनुसार, यह संख्या किसी एक-दो अधिकारी की चूक नहीं, बल्कि पूरे विभाग के भीतर व्यवस्था के ध्वस्त होने का प्रमाण है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि 95 पुलिसकर्मियों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें लूट, चोरी और हत्या जैसे संगीन अपराध शामिल हैं।

विपक्ष के नेता ने सवाल उठाया कि जब सार्वजनिक सुरक्षा के लिए जिम्मेदार लोग स्वयं गंभीर अपराधों में लिप्त हों, तो नागरिक उन पर भरोसा कैसे करें। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस विभाग ने अनुशासन, नैतिकता और जनता का भरोसा खो दिया है और भ्रष्टाचार के दलदल में धँस गया है।

विभागीय जाँच में 400 से अधिक दोषी

अशोक ने दावा किया कि विभागीय जाँचों में 400 से अधिक पुलिस अधिकारी दोषी पाए गए हैं। उन्होंने पूछा कि सरकार ने इन दोषियों के खिलाफ क्या ठोस कार्रवाई की है। उनके अनुसार, कुछ कर्मी कथित तौर पर गुंडों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं, नकली दस्तावेजों का नेटवर्क चला रहे हैं और निर्दोष नागरिकों को परेशान कर रहे हैं — और यह सब बिना किसी कानूनी भय के हो रहा है।

उन्होंने इसे सिर्फ पुलिस विभाग की नाकामी नहीं, बल्कि गृह विभाग का पूर्ण दिवालियापन करार दिया और सवाल उठाया कि कांग्रेस सरकार की गारंटी योजनाओं के तहत नागरिकों की जान, माल और इज्जत की सुरक्षा की गारंटी कौन देगा।

बेंगलुरु की साख पर खतरा

बेंगलुरु की छवि को लेकर चिंता जताते हुए अशोक ने दावा किया कि निलंबित अधिकारियों में से अधिकांश इसी शहर से थे। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर भारत की टेक्नोलॉजी राजधानी में कानून-व्यवस्था इस स्तर तक गिर गई, तो इससे बेंगलुरु की ब्रांड वैल्यू और वैश्विक साख को गंभीर नुकसान पहुँचेगा। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या सरकार अपराधियों पर लगाम कस रही है या उन्हें राजनीतिक संरक्षण दे रही है।

शिक्षा व्यवस्था पर भी निशाना

कानून-व्यवस्था के अलावा अशोक ने कर्नाटक की सार्वजनिक शिक्षा व्यवस्था पर भी सरकार को घेरा। उन्होंने दावा किया कि पूरे राज्य में सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के 38,163 पद रिक्त हैं, जो कुल शिक्षण पदों का लगभग 22 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि हर पाँच में से एक शिक्षण पद खाली होने पर स्कूलों से ठीक से काम करने की उम्मीद नहीं की जा सकती। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर यही स्थिति बनी रही, तो शिक्षा, गरीब बच्चों का भविष्य और सामाजिक समानता सभी को नुकसान पहुँचेगा।

अशोक ने सरकार से तत्काल व्यवस्था सुधारने और पुलिस विभाग में जनता का भरोसा बहाल करने का आग्रह किया, साथ ही चेतावनी दी कि जनता का बढ़ता आक्रोश अंततः इस सरकार को सत्ता से बाहर कर सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

95 आपराधिक मामले, 400 विभागीय दोषी — अगर सत्यापित हों तो वाकई चिंताजनक हैं, लेकिन विपक्ष की प्रेस कॉन्फ्रेंस और स्वतंत्र ऑडिट में फर्क होता है। असली सवाल यह है कि इन निलंबनों के बाद कितने अधिकारियों को दोषसिद्धि मिली और कितने बहाल हो गए — यह आँकड़ा सार्वजनिक नहीं है। बेंगलुरु की 'टेक कैपिटल' छवि पर चिंता वैध है, क्योंकि निवेशक और स्टार्टअप समुदाय कानून-व्यवस्था की धारणा को गंभीरता से लेते हैं। शिक्षा में 22% पद रिक्त होने का मुद्दा राजनीतिक आरोप से परे, एक संरचनात्मक संकट है जिस पर सरकार को जवाब देना होगा।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कर्नाटक में कितने पुलिस अधिकारी निलंबित किए गए हैं?
भाजपा नेता आर. अशोक के दावे के अनुसार, पिछले दो वर्षों में कर्नाटक में 713 पुलिस अधिकारियों को निलंबित किया गया है और 95 के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज किए गए हैं। उन्होंने इसे पूरे पुलिस तंत्र के ध्वस्त होने का संकेत बताया।
आर. अशोक ने बेंगलुरु की साख को लेकर क्या चेतावनी दी?
अशोक ने चेतावनी दी कि निलंबित अधिकारियों में से अधिकांश बेंगलुरु से थे और अगर भारत की टेक्नोलॉजी राजधानी में कानून-व्यवस्था इस स्तर तक गिरी, तो इससे शहर की ब्रांड वैल्यू और वैश्विक साख को नुकसान पहुँचेगा।
कर्नाटक के सरकारी स्कूलों में कितने शिक्षक पद रिक्त हैं?
भाजपा के दावे के अनुसार, पूरे कर्नाटक में सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के 38,163 पद रिक्त हैं, जो कुल शिक्षण पदों का लगभग 22 प्रतिशत है। अशोक ने इसे क्रूर लापरवाही करार देते हुए कहा कि इससे सार्वजनिक शिक्षा व्यवस्था धीरे-धीरे ध्वस्त हो रही है।
भाजपा ने सिद्धारमैया सरकार पर क्या मुख्य आरोप लगाए?
भाजपा ने आरोप लगाया कि कर्नाटक में पुलिस विभाग ने अनुशासन और नैतिकता खो दी है, कुछ कर्मी कथित तौर पर गुंडों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं और सरकार अपराधियों को राजनीतिक संरक्षण दे रही है। पार्टी ने गृह विभाग को पूरी तरह विफल बताया।
कर्नाटक में कानून-व्यवस्था को लेकर विपक्ष की माँग क्या है?
विपक्ष के नेता आर. अशोक ने सरकार से तत्काल पुलिस विभाग को साफ करने, दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और जनता का भरोसा बहाल करने की माँग की है। उन्होंने यह भी पूछा कि कांग्रेस की गारंटी योजनाओं में नागरिकों की सुरक्षा की गारंटी कौन देगा।
राष्ट्र प्रेस